उत्तराखण्ड के सांसद रेस से बाहर धामी का होगा राजतिलक!

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को मिले भारी जनादेश के बाद मुख्यमंत्री का चयन को लेकर जो स्थिति पैदा की जा रही है। उससे जनता एवं भाजपा के ही चयनित विधायकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड में सत्ता वापसी का जो मिथक टूटा है उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ पुष्कर सिंह धामी की ही मेहनत है। जनता ने धामी को ही पूर्ण कार्यकाल देने के लिए जनादेश दिया है। वही आधा दर्जन से ज्यादा भाजपा एवं एक निर्दलीय विधायक पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट छोडऩे के लिए तैयार है। उसके बाद भी भाजपा के कुछ सांसद और कुछ दिग्गज नेता धामी की अपनी सीट हार को आगे लाकर नया मुख्यमंत्री बनाने पर जोर दे रहे। भाजपा के अंदरूनी बवाल का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि पहले भाजपा हाईकमान ने केंद्र के दो बड़े मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एवं पियूष गोयल को पर्यवेक्षक बनाया था लेकिन राज्य के नेताओं को ठीक प्रकार से संभालने व नाराजगी झेलने में दोनों मंत्री अपने को असहज महसूस कर रहे थे। तभी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप कर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को उत्तराखंड का पर्यवेक्षक बनाना पड़ा। उसके बाद दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं उपस्थित होकर विचार करना पड़ा। उसके बाद भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को दिल्ली तलब किया गया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की थी। उसके बाद संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए प्रथमतया उन्हीं पर चर्चा करने के लिए बोला है। जिसके बाद से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दावेदारी ओर भी प्रबल हो गई है। वही धामी विरोधियों का कहना है कि देश के अन्य राज्यों में भी जिन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई है उनका आधार सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी है इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी की अभी तक जो परिस्थितियां सामने रही है उसमें मुख्यमंत्री के चेहरे पर लड़े गए जो- जो चुनाव हुए हैं उन चेहरों को हार ही मिली है। उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। चाहे हिमाचल का उदाहरण हो या छत्तीसगढ़ का उदाहरण रहा हो। इन सभी बातों को रख कर धामी विरोधी नए चेहरे को लाने की बात कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी हाईकमान यह भी चाहता है कि पुष्कर सिंह धामी की तरह ही कोई युवा चेहरा ही सामने आए लेकिन जनता की लगातार मिलती प्रतिक्रियाएं एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थन में सबसे ज्यादा विधायकों की लामबंदी हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ खड़े हैं और उनको ही मुख्यमंत्री बनाए जाने की पैरवी कर रहे हैं। दूसरी ओर राज्य के एक सांसद इस कदर उतावले हैं की वह अपने आवास पर रोजाना फोन कर-कर के भाजपा विधायकों को भोजन व नास्ते पर बुला रहे हैं। जबकि उनके अपने संसदीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की सबसे बुरी हार हुई है। मुख्यमंत्री का सपना देखने वाले सांसद अपनी विधानसभा तक में भी पार्टी को जिताने में नाकामयाब रहे हैं। उसके बाद भी अपने भविष्य की चिंता करते हुए ऊर्जावान युवा चेहरे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री ना बनाए जाने पर आ गए हैं। भाजपा हाईकमान आज सभी परिस्थितियों पर चर्चा करने के बाद अफवाहों के बादलों को हटा देगा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर ही एक बार पूरा विश्वास जताने की चर्चाएं सामने निकल कर आ रही है। इस प्रकार की भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री को सिर्फ मंत्रिमंडल पर चर्चा करने एवं उसके बाद पनपने वाली परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिए ही बुलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने के बाद संदेह कहीं नहीं रह जाता कि उत्तराखंड का मुख्यमंत्री कौन है। इसके अलावा राज्य में उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं चल रही हैं उनको भाजपा हाईकमान ने सिरे से नकार दिया है।

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