सीएम को हरवाने के लिए किसने खटीमा भेजा था पुलिस परिवार की महिलाओं को?

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिस्टम को सही दिशा में दौडाने के लिए अपने छह माह के कार्यकाल में जिस तरह से बडी रणनीति के तहत काम किया और पुलिस महकमें को संदेश दिया कि रंजिशवश किसी पर भी पुलिस का कोई अफसर कार्यवाही नहीं करेगा? पुलिस महकमें के चंद आईपीएस अफसरों की टोली ने पुष्कर सिंह धामी को चुनाव मैदान में हरवाने के लिए साजिश का एक बडा तानाबाना बुना और 46 सौ ग्रेड पे के मुद्दे पर पुष्कर सिंह धामी को राज्य के अन्दर विलेन बनाने के लिए बडा चक्रव्यूह रचा गया और खटीमा में पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हरवाने के लिए पुलिस परिवार की कुछ महिलाओं को किस पुलिस अफसर ने वहां भेजा था यह चुनाव के दौरान लगातार बहस का विषय बना हुआ था? भाजपा के कुछ विंग को भी इस बात की आशंका हुई थी कि पुष्कर सिंह धामी को खटीमा में हरवाने के लिए पुलिस के चंद अफसरों की टोली ने साजिश का बडा खेल खेला था? अब सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या नई सरकार बनने के बाद प्रदेश के मुखिया इस बात की भी जांच कराने के लिए आगे आयेंगे कि आखिरकार किसके इशारे पर पुलिस परिवार की कुछ महिलायें खटीमा में पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए वहां डेरा डालने के लिए गई थी?
उल्लेखनीय है कि पुष्कर ंिसह धामी के सामने जब 46 सौ ग्रेड पे का मामला आया और पुलिस परिवार की महिलाओं ने आंदोलन शुरू किया तो मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया था कि वह इस मुद्दे को खुद देखेंगे और इसके समाधान के लिए उन्होंने एक कमेटी का भी गठन किया था। कमेटी ने अपने लम्बे मंथन के बाद पुलिसकर्मियों को एकमुश्त दो लाख रूपये देने की संस्तुति की थी जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव आचार संहिता लगने से पहले पुलिसकर्मियों को एकमुश्त दो लाख रूपये देने का शासनादेश जारी किया था हालांकि उनके इस फैसले का पुलिस के अन्दर विरोध शुरू हुआ और गोपनीय रूप से यह साजिश शुरू हुई कि चुनाव में भाजपा को अपना मत नहीं देंगे और अपने साथियों को भी भाजपा के पक्ष में मतदान करने से रोकेंगे? इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों के लिए सर्कुलर जारी किया था कि कोई भी पुलिसकर्मी ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत कार्यवाही की जायेगी? चर्चाओं का बाजार उस समय गर्म हुआ जब यह बात उठी कि पुलिस परिवार की कुछ महिलायें खटीमा में पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ प्रचार करने के लिए गई हैं? बहस यह छिडी कि आखिरकार यह महिलायें खुद खटीमा में मुख्यमंत्री के दुष्प्रचार के लिए गई या फिर किसी पुलिस अफसर की शह पर वह खटीमा गई थी? सवाल यह खडे हो रहे हैं कि क्या उत्तराखण्ड के कुछ पुलिस अफसर भी पर्दे के पीछे रहकर इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को हरवाने के लिए कांग्रेस के कुछ राजनेताओं को अपना समर्थन दे रहे थे? चर्चा यहां तक भी है कि चंद आईपीएस ऐसे थे जिन्होंने कांग्रेस के दो राजनेताओं को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने की सम्भावनाओं को देखते हुए चुपचाप उनका साथ देने के मिशन में अपने कदम आगे बढाये? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नये सरकार के मुखिया एक दो आईपीएस अफसरों के मोबाइल नम्बरों की सीडीआर व चुनाव के दौरान उनकी लोकेशन किस राजनेता के आवास पर रही इसकी जांच कराने के लिए किसी बडी कमेटी का गठन करेंगी जिससे राज्य के अन्दर भविष्य में कोई भी पुलिस अफसर सरकार के खिलाफ साजिश रचने का खेल न खेल सके?

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