पुष्कर के सिर पर फिर ताज सजने की पुकार

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से पूर्व राज्य के अन्दर शोर सुनने को मिल रहा था कि इस बार भाजपा व कांग्रेस के बीच कडा मुकाबला होगा और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तो राज्यभर में भोपू बजाते फिर रहे थे कि राज्यवासियों ने भाजपा को सत्ता से खदेडने का मन बना लिया है और कांग्रेस बडे बहुमत से चुनाव जीतेगी। वहीं उत्तराखण्ड में नरेन्द्र मोदी के विजन को आगे बढाने के मिशन में जुटे पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री व भाजपा हाईकमान को विश्वास दिलाया था कि वह उत्तराखण्ड में एक बार फिर भाजपा की सत्ता में वापसी को लेकर रात-दिन एक कर देंगे। प्रधानमंत्री व भाजपा हाईकामन को दिये गये वचन के बाद पुष्कर सिंह धामी ने अपना हाथ फैक्चर होने के बावजूद रात तीन-तीन बजे तक पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बडी रणनीति बनाकर आवाम को भाजपा के पक्ष में करने का जो जज्बा दिखाया उसी का परिणाम रहा कि राज्य के अन्दर कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह धामी की रणनीति के चलते ढेर हो गई लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी को पुष्कर ंिसह धामी से हडपने के लिए भाजपा के ही कुछ दिग्गज नेताओं ने भीतरघात का खेल खेलते हुए सीएम को खटीमा सीट से हरवाकर अपने मिशन में कामयाबी का सेहरा चुपचाप अपने सिर पर बांध रखा है? उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार पांच साल सत्ता चलाने वाली भाजपा ने दुबारा सत्ता मे ंवापसी की तो राज्यवासियों ने इसका श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरल और मिलनसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिया है। अब राज्य के अन्दर एक ही आवाज गूंज रही है कि धामी को दो फिर ‘राजÓ। सोशल मीडिया पर भी पुष्कर सिंह धामी को राजनीति का एक बडा योद्धा बताकर उन्हें फिर मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग जोर पकड रही है तो वहीं कुछ विधायकों ने भी पुष्कर सिह धामी को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाये जाने के लिए अपनी विधानसभा सीट का बलिदान करने के लिए आगे खडे हुये दिखाई दे रहे हैं। अब जिस तरह से नई सरकार को लेकर उत्तराखण्ड के अन्दर भाजपा के प्रवेक्षकों का आगमन रोक दिया गया है उससे साफ झलक रहा है कि भाजपा हाईकमान नये मुख्यमंत्री की ताजपोशी को लेकर खुद फैसला करेगा। उत्तराखण्डवासियों को इस बात का इल्म ही नहीं था कि जिस पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने मात्र छह माह के लिए मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें कांटो भरा ताज पहनाकर उन्हें राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार लाने का बडा जिम्मा सौंपा है वह राजनीति के इतने बडे चाणक्य निकलेंगे कि वह अपनी सौम्यता और नम्रता से राज्यवासियों का दिल ही जीत लेंगे। पुष्कर सिंह धामी पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान जेपी नड्डा ने विश्वास कर उन्हें चुनावी संग्राम में उतारा था और सीएम ने भी अपनी छह माह के कार्यकाल में अपनी सत्ता पर तिनकाभर भी आंच नहीं आने दी और उन्होंने जिस तरह से पारदर्शिता के साथ सरकार चलाई और भ्रष्ट अफसरों को साफ अल्टीमेटम दिया था कि उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। पुष्कर सिंह धामी ने छह माह की सत्ता में अपने आपको मुख्यमंत्री मानने के बजाए एक जनसेवक के रूप में काम करने में विश्वास रखा और गरीब से गरीब इंसान के लिए जिस तरह से उन्होंने अपना मुख्यमंत्री आवास चौबीस घंटे खुला रखा उसी से ही राज्यवासियों के मन में एक आशा की किरण जाग गई थी कि राज्य का नया मुखिया इतना सरल और नम्र है कि उससे कोई भी जाकर अपना दर्द सुना सकता है और उस दर्द को सुनकर मुख्यमंत्री उसका हल भी तत्काल निकालने में पीछे नहीं रहे। सडकों पर ऐसे दृश्य देखने को मिले जहां मुख्यमंत्री ने गरीब वृद्ध महिलाओं को अपने से दूर पाकर उन्हें अपने सीने से लगाया और उन्हें यह आश्वासन दिया कि वह उनके पुत्र के समान है और उनके सामने कोई भी संकट आयेगा तो वह उनके साथ खडे रहेंगे। एक मुख्यमंत्री का वृद्ध गरीब महिलाओं के लिए इतना स्नेह राज्य की जनता ने बार-बार देखा और यही कारण रहा कि राज्य में भाजपा के साढे चार साल के कार्यकाल में आवाम के मन में जो नाराजगी पनप रही थी वह मात्र छह माह के भीतर ही पुष्कर सिंह धामी ने खत्म कर दी और राज्य के अन्दर वह इतने बडे राजनेता बन गये जिनके सामने भाजपा के कई बडे-बडे दिग्गज नेता भी अब राज्यवासियों को छोटे नजर आ रहे हैं? राज्य के अन्दर पुष्कर सिंह धामी को भले ही भीतरघात के चक्रव्यूह में फंसाकर हरा दिया गया हो लेकिन राज्य के अन्दर एक बडी आवाज सुनने को मिल रही है कि जिस पुष्कर ंिसह धामी ने भाजपा को फिर सत्ता दिलाई उन्हें ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया जाये।

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