उमेश ने उखाड़ फेंका चैम्पियन का राजनीतिक किला

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार ने पत्रकारिता करते समय कभी इस बात पर मंथन भी नहीं किया था कि वह कभी राजनीति में अपनी एंट्री करेंगे लेकिन खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैम्पियन ने जब चंद पत्रकारों के साथ खुली अभद्रता की तो यह बात उमेश कुमार के सीने में चुभ गई और उन्होंने देहरादून से खानपुर का सफर तय किया और वहां उन्होंने चुनावी रणभूमि में उतरने के लिए चैम्पियन को बार-बार ललकारना शुरू किया। उमेश कुमार ने खानपुर में जिस तरह से बच्चों से लेकर बडों तक का दिल जीता उसी के चलते खानपुर की जनता ने उमेश कुमार को अपना नया विधायक मान लिया था और इसी के चलते चुनावी रणभूमि में उतरे उमेश कुमार को शुरूआती दौर में ही यकीन हो गया था कि खानपुर की जनता ने उन्हें अपना जीत का आशीर्वाद दे दिया है। पत्रकारिता से राजनीति में उमेश कुमार ने जिस तरह से बडी एंट्री की है और खानपुर को अपनी राजनीतिक विरासत समझने वाले कुंवर प्रणव चैम्पियन व बसपा उम्मीदवार रविन्दर पनियाला को उन्हीं की विधानसभा में चारो खाने चित किया है उससे राजनीति के बडे-बडे महापंडितों की नींद उड गई है। उल्लेखनीय है कि उमेश कुमार ने चाणक्य नीति पर चलते हुए खानपुर विधानसभा में विकास की गंगा अपने पैसों से बहानी शुरू की और वर्षों से चली आ रही मुसीबतों को जिस तरह से उमेश कुमार ने खानपुर विधानसभा में दूर करने का मिशन शुरू किया उससे चप्पे-चप्पे पर उन्हें हैलीकाप्टर वाला उमेश कहा जाने लगा। हैरानी तो उस समय हुई जब छोटे-छोटे बच्चे भी अपनी मां से यह जिद्द करने लगे कि जब तक वह उमेश से नहीं मिल लेंगे खाना नहीं खायेंगे। यही प्यार उमेश कुमार की जीत का हथियार बना। शुरूआती दौर में उमेश कुमार को भाजपा व बसपा कम मापने में लगी हुई थी लेकिन उमेश कुमार अपनी रणनीति से अपनी जीत का सफर तय करने की दिशा में हर दिन आगे बढते चले गये और उनकी इस जीत ने उत्तराखण्ड की सियासत में एक नई हलचल मचा दी है।

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