भाजपा के हाथ फिर आई सत्ता

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उत्तराखंड में भाजपा ने इस बार बड़ी जीत से अपनी एंट्री कर उस मिथक को तोड दिया जो 2० साल से राज्य के अंदर चला आ रहा था। भाजपा को बडी चुनौती देने वाली कांग्रेस राज्य में ताश के पत्तों की तरह ढेर हो गई और सत्ता बनाने का दम भरने वाली कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भी अपनी सीट नहीं बचा पाये। इस चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी, कोरोना काल को राज्यवासियों ने एक सिरे से खारिज कर मोदी के विजन को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को सत्ता में आने से रोक दिया और भाजपा को फिर सत्ता सौंपकर उन्हें राज्य में एक बार फिर विकास की गंगा बहाने के लिए भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार सौंप दी। कांग्रेस के थींक टैंक जो बी प्लान से सत्ता पर काबिज होने का सपना पाले हुए थे उनका सपना भाजपा ने चारों खाने चित्त कर दिया और राज्य में एक बार फिर भाजपा की सत्ता में धमाकेदार एंट्री ने यह साबित कर दिया कि राज्यवासी उत्तराखंड का विकास देखना चाहते है।
उत्तराखण्ड में बीस साल से दो मिथक चले आ रहे थे कि जिस राजनीतिक दल की सत्ता पांच साल राज करती है वह दुबारा सत्ता में नहीं आती और मौजूदा मुख्यमंत्री भी अपना चुनाव नहीं जीत पाता। भाजपा ने दावा किया था कि इस बार राज्य के अन्दर दोनो मिथक टूट जायेंगे लेकिन एक मिथक तो भाजपा ने तोडकर राज्य में अपनी सरकार बनाकर भगवा फहरा दिया लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट से हार गये और मौजूदा मुख्यमंत्री को लेकर चला आ रहा मिथक अपनी जगह पर ही कायम रहा। उत्तराखण्ड के अन्दर भाजपा को पूर्ण बहुमत व राज्य के मुखिया को मिली हार ने उत्तराखण्डवासियों को हैरान करके रख दिया है और यही सवाल खडे हो रहे हैं कि चुनाव से पूर्व ही यह साफ नजर आ रहा था कि अगर पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा से चुनाव लडने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो उनकी हार निश्चित है क्योंकि उन्हें वहां हराने के लिए उनके चंद अपनों ने ही एक बडा चक्रव्यूह रच रखा है और वह कैंट विधानसभा सीट से अगर चुनाव लड़े तो उन्हें जीत मिलेगी लेकिन खटीमा में वह जीत का परचम नहीं लहरा पायेंगे और यह आशंकायें आज चुनाव परिणाम आने के बाद सच साबित हो गई और वो चंद राजनेता भी अब मुख्यमंत्री बनने की कतार में आगे खडे हुये दिखाई देंगे जिन्होंने मुख्यमंत्री को हराने के लिए एक बडा तानाबाना बुन रखा था। भाजपा के चंद दिग्गज आखिरी समय में हारते-हारते जीत गये जिसके बाद उन्होंने चैन की सांस ली। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस ऐसे उछाल मार रही थी जैसे राज्य की जनता ने उसे अपना जनादेश देकर राज्य के अन्दर कांग्रेस की सरकार बनाने का आशीर्वाद दे दिया हो। चुनाव के बाद से ही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से लेकर पार्टी के कुछ दिग्गज नेता राज्य के गलियारों में भोपू बजाते रहे कि भाजपा को इस बार राज्य की जनता ने तडीपार कर दिया है। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बार-बार यही दावा करते रहे कि राज्य में भाजपा की सरकार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयेगी और हरीश रावत को वनवास में जाना पडेगा। कांग्रेस के दिल्ली से आये चंद नेता चुनाव परिणाम से पूर्व ऐसे खिलखिला रहे थे मानो उन्हें ईवीएम में कैद चुनाव परिणाम नजर आ गये हों और उन्होंने अपनी सरकार बनाने की योजना भी तैयार करनी शुरू कर दी थी और हरीश रावत तो यहां तक रणनीति बना चुके थे कि राज्य का नया मुख्य सचिव कौन होगा और किस विजन के तहत राज्य को आगे ले जाना है। हरीश रावत जिस तरह से बार-बार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने निशाने पर लेते आ रहे थे और पार्टी के अन्दर अपने आपको मुख्यमंत्री बनाये जाने को लेकर जोर अजमाईश कर रहे थे उससे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी कभी भी विचलित नहीं हुये और वह बार-बार यही दावा कर रहे थे कि राज्य के अन्दर एक बार फिर भगवा फहरेगा और राज्य की जनता ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास व विजन को ध्यान में रखते हुये भाजपा के पक्ष में बडा मतदान किया है। यही कारण था कि पुष्कर सिंह धामी चुनाव परिणाम से एक दिन पूर्व तक राज्य में भाजपा की सत्ता की ताजपोशी को लेकर आश्वस्त थे और उन्होंने राजभवन में जिस तरह से गढवाली व कुमांऊनी गीत गाकर उस पर थिरकने के लिए अपने कदम आगे बढाये थे उससे साफ नजर आ रहा था कि राज्य की जनता ने उत्तराखण्ड के विकास को लेकर राज्य में बडा मतदान किया है। उत्तराखण्ड के चुनाव परिणाम सुबह से जब आने शुरू हुये तो कांग्रेस के नेताओं ने तो परिणाम स्थल पर जाने से ही अपने कदम पीछे खींच लिये और वह टीवी पर बैठकर चुनाव परिणाम को देखने लगे। ईवीएम से जब चुनाव परिणामों के रूझान आने शुरू हुये तो शुरूआती दौर में ही भाजपा पूर्ण बहुमत के पायदान पर पहुंच गई और उसके बाद यह साफ हो गया कि उत्तराखण्ड की जनता ने कांग्रेस को एक सिरे से नकार दिया और राज्य के विकास को लेकर उसने एक बार फिर उत्तराखण्ड के अन्दर भगवा फहराने के लिए अपने कदम आगे बढाये। उत्तराखण्ड में एक बार फिर भगवा लहराने से कांग्रेस व सभी दलों का चला आ रहा अंकगणित टॉय-टॉय फिस्स होकर रह गया।

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