पंकज की मौत हादसा या साजिश?

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साहनी के बाद पंकज की मौत से मचा भूचाल
बिल्डरों की दुनिया में राजधानी के अन्दर क्या चल रहा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बार फिर एक बिल्डर की पांचवीं मंजिल से गिरकर हुई संदिग्ध मौत ने रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी प्रसिद्ध बिल्डर सतेंद्र साहनी की आत्महत्या ने राजधानी में भूचाल ला दिया था और अब बिल्डर पंकज मित्तल की मौत ने उस पुराने घटनाक्रम की यादें ताजा कर दी हैं। दोनों घटनाओं में पांचवीं मंजिल से गिरने की बात सामने आने के कारण चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां और जांच अलग-अलग हैं।
राजधानी में सतेंद्र साहनी आत्महत्या कांड उस समय सुर्खियों में आया था, जब उनके पास से मिले सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने गुप्ता बंधुओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इस हाईप्रोफाइल मामले ने पुलिस से लेकर राजनीतिक और कारोबारी गलियारों तक हलचल मचा दी थी। गुप्ता बंधुओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, बाद में जांच में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई और अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया। इस घटनाक्रम के बाद जांच के निष्कर्षों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। अब राजधानी में बिल्डर पंकज मित्तल की पांचवीं मंजिल से गिरकर हुई मौत ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। रायपुर थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन इमारत के पास उनका शव मिलने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद परिजनों ने दूसरे बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का आरोप है कि पुनीत अग्रवाल उनकी रकम का भुगतान नहीं कर रहा था और कथित रूप से धमकियां भी दे रहा था। आरोप है कि पैसे मांगने पर उन्हें यह तक कहा जाता था कि जो करना है कर लो।
मामले में कथित सुसाइड नोट की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पंकज मित्तल किसी गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहे थे? क्या कारोबारी लेनदेन को लेकर चल रहा विवाद उनकी मौत की वजह बना या फिर घटना के पीछे कुछ और परिस्थितियां थीं? इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर पंकज मित्तल पांचवीं मंजिल से किन परिस्थितियों में नीचे गिरे? क्या उन्होंने स्वयं छलांग लगाई, यह कोई दुर्घटना थी या घटना में किसी आपराधिक भूमिका की आशंका है? पुलिस के सामने इन सभी संभावनाओं की जांच करने की चुनौती है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन, कथित सुसाइड नोट और संबंधित व्यक्तियों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इस घटना ने राजधानी के रियल एस्टेट कारोबार में आर्थिक लेनदेन और कथित दबाव के मामलों को भी चर्चा में ला दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कारोबारी विवादों में प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की शिकायतों की समय रहते निष्पक्ष जांच हो पाती है? यदि किसी कारोबारी पर धमकी देने या रकम रोकने के आरोप लगते हैं तो उनकी जांच किस स्तर तक की जाती है? हालांकि, पंकज मित्तल के मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं और किसी भी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सतेंद्र साहनी आत्महत्या कांड में जिस तरह सुसाइड नोट के आधार पर गुप्ता बंधुओं की गिरफ्तारी हुई थी और बाद में जांच के निष्कर्ष अलग सामने आए, उसने ऐसे संवेदनशील मामलों में साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित किया था। अब पंकज मित्तल की मौत के मामले में भी आवश्यक है कि पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच करे और आरोपों के साथ-साथ संबंधित पक्ष का बयान भी रिकॉर्ड करे। पंकज मित्तल की संदिग्ध मौत के बाद राजधानी में एक ही सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि आखिर पांचवीं मंजिल से गिरने की इस घटना का वास्तविक सच क्या है? क्या कथित आर्थिक विवाद और धमकियों के आरोपों का उनकी मौत से कोई संबंध है या जांच में कोई अलग कहानी सामने आएगी? फिलहाल इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेंगे।

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