तो उत्तराखण्ड की लाखों महिलाओं को कौन दिलायेगा इंसाफ?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार दस सालों से महिला सशक्तिकरण का दम भर रही है और राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री खुद अगली पक्ति में खडेघ् हुये हैं। साढे नौ साल से राज्य में कद्दावर महिला कैबिनेट मंत्री मौजूदा दौर में महिला सशक्तिकरण मंत्री के पद पर आसीन हैं लेकिन प्रदेश में अजीब से हालात हैं। महिला सशक्तिकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य अपने पति गिरधारी लाल साहूू के आगे इतनी बेबस हैं कि उसके अत्याचारों का विरोध ही नहीं कर पाई और सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ उसके बाद रेखा आर्य को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया कि उनका बीपी बढ़ गया था। उत्तराखण्ड की फिजाओं में यह सवाल तैर रहा है कि एक मंत्री इतनी बेबस कैसे हो गई कि वह एक दशक से भी अधिक समय से अपने पति के जुलम सहती रही। बहस चल उठी है कि एक मंत्री को बाइस साल बाद पता चला कि उनका पति पहले से शादीशुदा है इस पर यकीन करना मुश्किल नहीं नामुमकिन है। बरेली से लेकर देहरादून तक सबको पता है कि सरकार में महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू पहले से ही विवाहित हैं तो फिर मंत्री रेखा आर्य को इसका पता नहीं था यह कैसे सम्भव है? वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी महिला मंत्री के साथ हुये अत्याचार को लेकर अब सरकार को ही घेरने का चक्रव्यूह तैयार कर लिया है कि जब राज्य की महिला सशक्तिकरण मंत्री ही अपने राज्य में बेबस है तो फिर राज्य की लगभग साठ लाख महिलाओं की सुरक्षा कौन करेगा।
उत्तराखंड में करीब एक दशक से महिला सशक्तिकरण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को सरकार की प्राथमिकताओं में गिनाते रहे हैं। लेकिन इसी सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के निजी जीवन से जुड़े विवाद ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस मंत्री के कंधों पर प्रदेश की लाखों महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की जिम्मेदारी है, यदि वही अपने पारिवारिक जीवन में गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही हैं, तो आखिर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के सरकारी दावों को किस नजरिए से देखा जाए? रेखा आर्य लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में प्रभावशाली महिला चेहरा रही हैं। सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाली मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े आरोपों और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मंत्री लंबे समय से घरेलू प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों का सामना कर रही थीं, तो मामला इतने वर्षों तक सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आया? क्या राजनीतिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक दबाव या सामाजिक परिस्थितियां ऐसी रहीं कि एक प्रभावशाली पद पर बैठी महिला भी खुलकर अपनी बात नहीं रख सकी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सामने आना जरूरी है। मंत्री रेखा आर्य की तबीयत बिगड़ने और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराए जाने की चर्चाओं ने भी इस पूरे विवाद को और संवेदनशील बना दिया है। उनके रक्तचाप बढ़ने की बात सामने आई है, हालांकि अस्पताल में भर्ती होने की परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला अब केवल एक मंत्री के निजी जीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला सम्मान और सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों की परीक्षा बनता जा रहा है। इस विवाद का एक और गंभीर पहलू गिरधारी लाल साहू के पूर्व वैवाहिक संबंधों को लेकर किए जा रहे दावे हैं। चर्चाओं में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या मंत्री रेखा आर्य को अपने पति के पहले से विवाहित होने की जानकारी नहीं थी? यदि ऐसा था तो इतने वर्षों तक यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया? हालांकि किसी व्यक्ति की पूर्व वैवाहिक स्थिति, उसकी जानकारी और उससे जुड़े घटनाक्रम का निष्कर्ष केवल चर्चाओं के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। संबंधित पक्षों के बयान और प्रमाण सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उत्तराखंड की राजनीति में यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि महिला सशक्तिकरण विभाग स्वयं महिलाओं को घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जागरूक करता है। ऐसे में विभाग की मुखिया से जुड़े गंभीर आरोपों ने सरकारी योजनाओं और उनके वास्तविक प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा इस मामले को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए जाने की बात भी सामने आ रही है। विपक्ष के लिए यह मुद्दा महिला सुरक्षा और सरकारी दावों के बीच कथित विरोधाभास को उठाने का अवसर बन सकता है। हालांकि राजनीतिक आरोपों से अलग यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी महिला के व्यक्तिगत जीवन में उत्पन्न संकट को उसकी कमजोरी का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। घरेलू उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता किसी महिला के पद या राजनीतिक प्रभाव से कम नहीं होती। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने और महिला सुरक्षा को मजबूत करने की बात करती रही है। ऐसे में सरकार की एक वरिष्ठ महिला मंत्री से जुड़े विवाद पर पारदर्शिता और संवेदनशीलता की अपेक्षा स्वाभाविक है। यदि किसी प्रकार की प्रताड़ना, धमकी अथवा हिंसा के आरोप सामने आए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। प्रदेश में अब इस बात पर भी निगाहें हैं कि मंत्री रेखा आर्य स्वयं इस पूरे विवाद पर क्या स्पष्ट करती हैं और उनके पति गिरधारी लाल साहू का पक्ष क्या सामने आता है। किसी भी आरोप को जांच से पहले स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा, लेकिन गंभीर आरोपों पर चुप्पी भी अटकलों को बढ़ा सकती है। इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2004 में हुए विवाह के करीब 22 वर्ष बाद मंत्री ने अपने पति पर पहली शादी की बात छिपाने का आरोप लगाया है। ऐसे में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने लंबे वैवाहिक जीवन में यह तथ्य कब और कैसे सामने आया? क्या मंत्री को पहले कभी इसकी जानकारी मिली थी या हाल के घटनाक्रम ने उन्हें इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही मिल सकेगा।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब रेखा आर्य ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अपनी हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। देहरादून के कैंट थाने में 15 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें मारपीट, धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी और एससी-एसटी अधिनियम से संबंधित आरोप शामिल हैं। अब कांग्रेस ने भी इस मामले में सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से महिला मंत्री की सुरक्षा को लेकर जवाब चाहता है। राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की योजनाओं को लागू कराने की जिम्मेदारी स्वयं रेखा आर्य के विभाग के पास है। इस प्रकरण ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा है कि घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का सामना किसी भी सामाजिक या राजनीतिक पद पर बैठी महिला को करना पड़ सकता है। पद, प्रतिष्ठा और सरकारी सुरक्षा के बावजूद यदि किसी महिला को अपनी जान का खतरा महसूस हो, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। रेखा आर्य ने भी सोशल मीडिया पर जारी अपने भावुक संदेश में महिलाओं से अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। उनका यह कदम अब प्रदेश की उन महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश बन गया है जो पारिवारिक दबाव अथवा सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण अपनी शिकायत सामने नहीं रख पातीं। इस बीच एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र डोबाल के अनुसार शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब इस हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस की जांच, कथित ऑडियो की सत्यता, पूर्व विवाह से जुड़े दस्तावेज और आरोपी पक्ष का बयान महत्वपूर्ण होंगे। प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार में एक कैबिनेट मंत्री द्वारा लगाए गए इतने गंभीर आरोपों की जांच किस निष्पक्षता और तेजी से आगे बढ़ती है।


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