नहीं रूकेगा धामी का विजय रथ

0
7

पुष्कर का साथ निभाने को नारी शक्ति तैयार
आधी आबादी ने ठाना, भाजपा लगाई गी जीत हैट्रिक
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री के विजय रथ को नारी शक्ति का साथ मिलने से आधी आबादी के भरोसे भाजपा विधानसभा चुनाव में हैट्रिक लगाने की तैयारी में आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति के भरोसे फिर मैदान में हैं और उन्हें इस बात का इल्म है कि नारी शक्ति भाजपा के लिए सबसे बड़ी ताकत बनकर उन्हें विधानसभा चुनाव मंे जीत के रथ पर सवार करेगी। मुख्यमंत्री ने महिला शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जो लम्बे समय से मास्टर स्ट्रोक खेलने का दौर शुरू किया हुआ है उससे पहाड़ से लेकर मैदान तक महिलाओं को इस बात का इल्म हो चुका है कि मुख्यमंत्री उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमेशा अगली पक्ति में खडे हुये हैं और उसी का परिणाम है कि आज वह उस पायदान पर आकर खडी हो गई हैं जहां उन्हें भरोसा है कि अब उन्हें किसी के सहारे की कोई जरूरत नहीं है।
उत्तराखंड की सियासत में चुनावी हलचल बढ़ने के साथ अब आधी आबादी यानी महिला मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की नजर टिक गई है। भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक बार फिर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। पार्टी का मानना है कि महिलाओं के बीच सरकार की योजनाओं और फैसलों को लेकर बना भरोसा चुनाव में उसके लिए बड़ी ताकत साबित हो सकता है। भाजपा के लिए महिला मतदाता लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी सरकार के कार्यकाल में महिलाओं से जुड़े फैसलों और योजनाओं को लगातार जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। महिला सुरक्षा, स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूह, रोजगार के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कई मौकों पर महिलाओं को प्रदेश की विकास यात्रा की अहम शक्ति बता चुके हैं। सरकार की कोशिश है कि महिलाओं को योजनाओं का लाभ सीधे मिले और वे आर्थिक रूप से मजबूत बनें। भाजपा इसी काम को अपनी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।
पार्टी समर्थकों का दावा है कि धामी सरकार के कामकाज को लेकर महिलाओं के एक बड़े वर्ग में सकारात्मक माहौल है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं को लेकर सरकार की योजनाओं को पार्टी अपनी उपलब्धियों के तौर पर सामने रख रही है लेकिन चुनावी राजनीति में सिर्फ दावे काफी नहीं होते। महिला मतदाता अपने परिवार की जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखकर भी मतदान करती हैं। महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पानी और सुरक्षा जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में आने वाले चुनाव में भाजपा के सामने सरकार के काम को इन मुद्दों से जोड़कर जनता के बीच विश्वास बनाए रखने की चुनौती भी होगी। भाजपा का चुनावी संदेश फिलहाल स्पष्ट नजर आ रहा हैकृधामी के नेतृत्व में विकास, महिलाओं का भरोसा और लगातार तीसरी बार सत्ता। पार्टी इसे जीत की हैट्रिक की जमीन के तौर पर देख रही है।
वहीं विपक्ष के लिए भी महिला मतदाता किसी चुनौती से कम नहीं होंगे। कांग्रेस समेत अन्य दल सरकार के कामकाज और जनसमस्याओं को मुद्दा बनाकर भाजपा के दावों को चुनौती देने की कोशिश करेंगे। ऐसे में चुनावी मुकाबला केवल नारों का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का होगा। उत्तराखंड की राजनीति में महिला मतदाता अगर किसी एक दल के पक्ष में मजबूती से खड़ी होती हैं तो चुनावी तस्वीर पर उसका सीधा असर पड़ सकता है। भाजपा फिलहाल नारी शक्ति के भरोसे धामी के नेतृत्व में जीत की हैट्रिक का सपना देख रही है। अब देखना होगा कि चुनाव के मैदान में आधी आबादी किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है।

LEAVE A REPLY