रीलबाज खाकीधारियों पर रडार

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खाकी को बनाया रील मंच तो होगा एक्शन
वर्दी में भौकाल दिखाने वालों पर एडीजी सख्त
खाकी पहनकर ‘स्टार’ बनने का चस्का पडे़गा महंगा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में एक लम्बे दशक से देखने में आ रहा है कि काफी खाकीधारी वर्दी में ही रील बनाने के चस्के में अपने आपको सोशल मीडिया पर फिल्मी अंदाज में आवाम के सामने अपना भौकाल दिखा रहे हैं जबकि हैरानी वाली बात है कि एक पूर्व डीजीपी ने अपने कार्यकाल में दो टूक चेतावनी दी थी कि अगर किसी ने भी अधिकारी या दरोगा ने वर्दी में सोशल मीडिया पर रील बनाकर पुलिस महकमे की आचरण नियमावली को हवा में उडाया तो उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। हैरानी वाली बात है कि लम्बे समय से काफी खाकीधारी सोशल मीडिया पर वर्दी में ही रील बनाकर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर अपने आपको खाकी का सुपर दिखाने के एजेंडे पर आगे बढे हुये हैं जिससे आवाम के बीच ऐसे रीलबाज खाकीधारियों को लेकर जग हसाई हो रही है। वहीं अब एडीजी कानून व्यवस्था ने ऐलान किया है कि वर्दी में अगर किसी भी पुलिसकर्मी ने रील बनाई तो उनके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।
उत्तराखण्ड पुलिस में वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर फिल्मी अंदाज में रील बनाने का बढ़ता चलन अब पुलिस मुख्यालय के निशाने पर आ गया है। लंबे समय से कई पुलिसकर्मी वर्दी में फिल्मी गानों, डायलॉग और स्टाइलिश वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते रहे हैं। इन रीलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे कि क्या खाकी का उद्देश्य कानून व्यवस्था संभालना है या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना। अब एडीजी कानून व्यवस्था ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस मुख्यालय को इस मुद्दे पर सख्ती दिखानी पड़ी हो। इससे पहले तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी स्पष्ट निर्देश जारी कर चुके थे कि वर्दी पुलिस की गरिमा, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार, लोकप्रियता या मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता। उस समय भी चेतावनी दी गई थी कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करता है तो उसके विरुद्ध पुलिस आचरण नियमावली के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद कई पुलिसकर्मी इन निर्देशों को नजरअंदाज करते रहे और लगातार वर्दी में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करते रहे।
पुलिस महकमे के भीतर भी इस प्रवृत्ति को लेकर समय-समय पर असहजता जताई जाती रही है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि वर्दी केवल एक ड्रेस नहीं, बल्कि कानून के प्रति जवाबदेही, अनुशासन और जनता के विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मी वर्दी को सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत पहचान बनाने का माध्यम बनाते हैं तो इससे पूरे पुलिस बल की पेशेवर छवि प्रभावित होती है। एडीजी कानून व्यवस्था के ताजा निर्देश के बाद अब साफ संकेत मिल गया है कि सोशल मीडिया पर श्रीलबाज पुलिसकर्मियोंश् के खिलाफ विभाग अब सख्त रुख अपनाएगा। पुलिस मुख्यालय चाहता है कि खाकी की पहचान सोशल मीडिया के फिल्मी वीडियो से नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनता की सुरक्षा और निष्पक्ष कार्यशैली से बने। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि कोई पुलिसकर्मी वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचार करता पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

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