सीएम सियासत में बेदाग

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मंत्रियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के दाग
2027 से पहले भ्रष्टाचार के आरोपों से भाजपा बेचैन?
चंद मंत्रियों पर खुलकर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप
देहरादून। उत्तराखण्ड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के मुख्यमंत्री तो बेदाग नजर आ रहे हैं लेकिन उनके कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार को लेकर सीधे वार हो रहे हैं और उन्हें मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखाने की दहाड़ विपक्ष और जन संघर्ष मोर्चा लगाता आ रहा है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संकल्प लेने वाले मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर पार्टी के ही कुछ मंत्री अगर ग्रहण लगा रहे हैं तो साफ है कि उनके भ्रष्टाचार के मामलों का शोर राज्य की सियासत में उस समय खूब मचेगा जब चुनाव का बिगुल बजेगा। मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की हो रही बारिश से आने वाले समय में सरकार के लिए एक बडी मुश्किल खडी हो सकती है। वहीं सियासत में यह आवाज भी उठने लगी है कि कुछ मंत्रियों पर जिस तरह से भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं उसको लेकर जल्द भाजपा हाईकमान 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के रणनीति पर बडा मंथन करके कोई ऐसा फरमान जारी कर सकता है जिससे कुछ राजनेताओं की राजनीतिक विरासत पर ग्रहण लग सकता है? चुनाव से पहले भाजपा के कुछ मंत्रियों पर लग रहे आरोपों से उत्तराखण्ड की सियासत गर्मा गई है और प्रेमनगर के टौंस पुल की एप्रोच रोड टूटने पर कांग्रेस ने लोक निर्माण मंत्री का भी इस्तीफा मांगकर सरकार के सामने एक बडा संकट खडा कर दिया है।
उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती दिखाई देने लगी हैं। प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों पर समय-समय पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव को नया आयाम दे दिया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ जन संघर्ष मोर्चा भी इन मामलों को लगातार उठा रहा है और आरोपों की निष्पक्ष, समयबद्ध एवं पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। इन घटनाक्रमों के बीच प्रदेश की राजनीति में भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, सुशासन, जवाबदेही और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहेंगे। ऐसे में सरकार के लिए केवल आरोपों का खंडन करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आरोपों से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई की दिशा में उठाए जाने वाले कदम भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सार्वजनिक संबोधनों में पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता वाली सरकार की बात लगातार करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरकार ने विभिन्न स्तरों पर पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों की बात भी रखी है। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि मंत्रियों पर लगाए जा रहे आरोपों के मामलों में सरकार आगे क्या रुख अपनाती है। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जिन मामलों में आरोप लगाए गए हैं, उनमें अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की सत्यता का निर्धारण सक्षम जांच एजेंसियों और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होता है। इसलिए इन मामलों में संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि आरोपों से जुड़े मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण नहीं हुआ, तो विपक्ष आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जाने का प्रयास करेगा। वहीं, यदि सरकार निष्पक्ष जांच कराकर तथ्य सार्वजनिक करती है, तो इससे सुशासन और जवाबदेही का संदेश भी जा सकता है। प्रदेश की राजनीति में फिलहाल यही चर्चा सबसे अधिक है कि क्या सरकार इन आरोपों को केवल राजनीतिक बयानबाजी मानकर आगे बढ़ेगी या फिर प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करेगी। आने वाले महीनों में सरकार के फैसले न केवल राजनीतिक माहौल को प्रभावित करेंगे, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विजिलेंस कोर्ट में घिरे गणेश जोशी!
विजिलेंस कोर्ट ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सितम्बर को होगी। विजिलेंस कोर्ट की विशेष जज अंजलि बेंजवाल ने यह नोटिस जारी किया है। अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने विजिलेंस कोर्ट में यह फाइल कर रखा है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित की है उन्होंने इसका आधार गणेश जोशी द्वारा 2022 की विधानसभा चुनाव में दायर किये गये हलफनामे को आधार बनाया है जिसमें उन्होंने अपनी सम्पत्ति नौ करोड दिखाई है।

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