टोैंस पुल पर बवाल

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एप्रोच रोड धंसने से मचा सियासी घमासान
निर्माण में किसी भी तरह की गुणवत्ता से समझौता करने का नहीं है इरादाः धामी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। प्रेमनगर के टोंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड़ धंसते ही सियासत गर्मा गई और विपक्ष ने सरकार को धेरने के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया कि पुल का निर्माण भ्रष्टाचार की नींव पर बना है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी ने सरकार को कटघरे में खडा करने के लिए पुल पर ही मोर्चा खोल दिया कि जहां सारी सरकार और सारा सिस्टम मौजूद है वहां करोडो की लागत से जब पुल बना तो पुल का निर्माण करने वाले इंजीनियरों को क्या इतना भी इल्म नहीं था कि एप्रोच रोड़ कैसे बनाई जाती है क्योंकि अगर सरकार की आंखों के नीचे भी पुल का निर्माण करने वाले इंजीनियरों ने एप्रोच रोड़ को हवाबाजी में बनाकर आम जनमानस की सुरक्षा के साथ एक बडा खिलवाड किया है तो उन पर भी एक्शन होना चाहिए। सबसे अहम बात तो यह है कि जब पुल की एप्रोच रोड़ धंसी तो वहां वाहनों का आनाजाना शून्य ही था और अगर रोज की तरह इस एप्रोच रोड़ से बडे वाहन आ जा रहे होते तो वहां कोई बडा हादसा और अनहोनी हो जाती और विपक्ष को मौका मिल जाता कि वह सरकार को उसी तरह से घेर देती जैसे हाल मे ही पेपर लीक मामले में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सुद्दोेवाला में सरकारी यूनिवर्सिटी के बाहर बडा बवाल मचाया था।
प्रेमनगर क्षेत्र के नंदा की चौकी में टोंस नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पुल की एप्रोच रोड लगातार बारिश के चलते धंसने के बाद मामला अब सियासी रंग ले चुका है। एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के साथ ही सोशल मीडिया पर ष्पुल धंसने की खबरें तेजी से वायरल होने लगीं, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार और निर्माण एजेंसी पर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर धरना देते हुए आरोप लगाया कि करीब सोलह करोड़ की लागत से बना पुल टिकाऊ साबित नहीं हुआ और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का प्रतीक बताते हुए पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए इसे भ्रष्टाचार का गड्ढा करार दिया और जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि पुल नहीं, बल्कि उसकी एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हुई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सुबह स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और अधिकारियों को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करते हुए तीन घंटे के भीतर एप्रोच रोड बहाल करने के निर्देश दिए। प्रशासन लगातार राहत एवं बहाली कार्य में जुटा है। बारिश से उपजे इस तकनीकी संकट के बीच अब मामला पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर प्रशासन जल्द यातायात बहाल करने में जुटा है, तो दूसरी ओर विपक्ष निर्माण गुणवत्ता, जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। स्थानीय लोग भी पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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