वो ही कप्तान डोबाल है
राजधानी को अपराधमुक्त करने का ले रहा संकल्प
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री के बारे में सब जानते हैं कि राजनेताओं को परखने में उन्हें कितनी महारत है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य की कमान युवा मुख्यमंत्री के हाथों में दी थी तो उत्तराखण्ड की जनता और राजनीतिक पंडित भी हैरान हो गये थे कि जिस राजनेता को कभी भाजपा ने अपनी सरकार में मंत्री नहीं बनाया उन्हें भाजपा हाईकमान ने सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन कर दिया। प्रधानमंत्री की राह पर चलने वाले मुख्यमंत्री ने जब राजधानी पुलिस की कमान डोबाल के हाथों में दी तो आवाम को यह नजर आ गया था कि अब राजधानी में अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा और यही कारण है कि मात्र कुछ समय के भीतर जनता यह कह रही है कि वो शूरवीर है, वो कर्मवीर है, वो ही कप्तान डोबाल है। पुलिस कप्तान ने मात्र चंद समय के भीतर देहात से लेकर शहर में अपराधियों, माफियाओं और हुडदंगबाजों की नाक में नकेल डालने के लिए जो दिलेरी दिखाई है उसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व एसटीएफ और दून पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में एक दहशतगर्द को दबोचकर उसके पाकिस्तान में बैठे आकाओं को दहाड़ लगा दी कि उत्तराखण्ड के अन्दर उनके नेटवर्क को कभी खडा नहीं होने दिया जायेगा।
चौदह अप्रैल को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजधानी देहरादून आ रहे हैं जहां वह डाट काली मन्दिर में पूजा अर्चना करने के बाद वहां से गढी कैंट महेन्द्रा ग्राउंड तक रोड-शो करेगे। प्रधानमंत्री के रोड-शो को लेकर जनपद के पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल ने रात-दिन एक कर दिया है। पुलिस कप्तान खुद रात को सड़कों पर पुलिस टीमों के साथ प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बडा खाका तैयार करने में जुटे हुये हैं। पुलिस कप्तान ने शहर के अन्दर कुछ प्वाइंट चिन्हित किये हुये हैं जहां शहर के एसपी सिटी और देहात के दोनो एसपी, सभी सीओ, कोतवाल, थानेदार एकत्र होते हैं और वहां पुलिस कप्तान शूरवीर की तरह पुलिस अफसरों और छोटे अधिकारियों को दो टूक संदेश देते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा अभेद से भी अभेद रखनी है और शहर के अन्दर संदिग्धों को अपनी रडार पर लिया जाये। पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल ने जहां साइबर टीमों को अलर्ट किया हुआ है तो वहीं एसओजी की टीमें भी सर्विलांस पर हैं और पाकिस्तान से आने-जाने वाली हर कॉल पर नजर रखी जा रही है। प्रमेंद्र डोभाल ने शहर के अन्दर अभेद सुरक्षा का जो चक्रव्यूह तैयार किया है वह यह बता रहा है कि उनके सामने प्रधानमंत्री की यात्रा को अभेद बनाना एक बहुत बडी चुनौती है क्योंकि उनके कार्यकाल में पहली बार देश के प्रधानमंत्री देहरादून आ रहे हैं और उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक बडा रोड-शो हो रहा है।
राजधानी की जनता यह देखकर गदगद है कि शहर और देहात के कुछ इलाके जहां देर रात तक बाजार खुलते थे और वहां अकसर एक बडा संग्राम मचता था और उससे वहां एक दहशत रहती थी लेकिन पुलिस कप्तान ने ऐसा चाबुक चलाया कि अब बाजार बंद होने का समय फिक्स हो गया है और इन बाजारों में अब किसी की हिम्मत नहीं है कि वह संग्राम करके पुलिस को चुनौती दे सके। प्रेमनगर के सुद्दोवाला गांव में लोगों को यह कहते हुए भी सुना गया कि वो वो शूरवीर है, वो कर्मवीर है, वो ही कप्तान डोबाल है। गांव के लोगों का कहना है कि उनके इलाके का बाजार देर रात तक खुलता था और वहां अकसर हुडदंगबाजी और गुंडागर्दी का तांडव देखकर वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के मन में एक बडा डर रहता था लेकिन इस शूरवीर कप्तान ने रात नौ बजे के बाद बाजार न खुलने का खुला अल्टीमेटम दिया तो उसके बाद से ठीक नौ बजे इलाके का समूचा बाजार सुनसान हो जाता है और अब वहां हुडदंग और संघर्ष करना आसान नहीं है। पुलिस कप्तान ने अपने अल्प कार्यकाल में आवाम के मन में जो जगह बना ली है उससे अब साफ हो गया है कि पुलिस कप्तान की जिम्मेदारी दुगना हो गई है कि वह मुख्यमंत्री के अपराधमुक्त विजन को राजधानी में शत-प्रतिशत धरातल पर सच करें।
