उत्तराखण्ड का आवाम मान रहा मोदी का सखा सबका लाडला

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धामी का मंत्रः न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में चार साल से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री ने अपनी दिल अजीज राजनीति का जो आइना राज्यवासियों के सामने पेश कर रखा है उसके चलते आज वह उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में धाकड से धुरंधर मुख्यमंत्री का ताज अपने सिर पर बंधवा चुके हैं। बच्चे से लेकर बडे तक अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर उनके साथ सैल्फी लेने के लिए जिस अंदाज में आगे आ रखे हैं उससे आम जनमानस यह देखकर गदगद है कि राज्य का मुख्यमंत्री सबको अपना परिवार मानते हैं और उसी के चलते वह सबके बीच जाकर उनके साथ जो रिश्ता निभाते हैं उसी के चलते आज मोदी के सखा सबके लाडले बन चुके हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर भले ही चुनावी संग्राम का शोर मच गया हो लेकिन मुख्यमंत्री को इस बात का इल्म है कि वह जिस विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं उससे 2027 में होने वाले विधानसभा के चुनाव में राज्य की जनता एक बार फिर कमल खिलाने के लिए जरूर आगे आयेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने चार साल पहले अभेद विश्वास दिखाकर उन्हें उत्तराखण्ड के अन्दर विकास के पथ पर आगे चलने का मंत्र दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के संकल्प को उत्तराखण्ड में धरातल पर उतारने के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों के खिलाफ बडा ऑपरेशन शुरू किया था। चार साल से धाकड़ राजनीति करते हुए उन्होंने विकास का जो एक नया पथ बनाया उसे देखकर राज्य की जनता अपने दिल अजीज मुख्यमंत्री की कार्यशैली से गदगद नजर आ रही है और यही कारण है कि चार साल के अल्प कार्यकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने आवाम के मन में जो अपनी जगह बना ली है उसके चलते आज वह उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर के अन्दर धुरंधर मुख्यमंत्री के रूप में अपनी बडी पहचान बनाने में कामयाब हो चुके हैं।
उत्तराखण्ड़ की जनता ने राज्य बनने के बाद से ही एक से एक धुरंदर मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल देखा लेकिन जनता के दिलों मे राज करने के लिए कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री कामयाबी की सीढी नहीं चढ़ पाया था? चार साल से बेदाग होकर सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री की धमक से विपक्ष के अधिकांश नेता तो बेचैन नजर ही आ रहे हैं साथ मे भाजपा के भी काफी नेताओं मे मुख्यमंत्री की पारदर्शी सरकार चलाने की शैली ने उनके माथे पर शिकन डाल रखी है। मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री की तर्ज पर संदेश दे रखा है कि ‘न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगा’, शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री की इस शैली से भाजपा के कुछ नेता पर्दे के पीछे रहकर हमेशा मुख्यमंत्री को अपने निशाने पर लेने से नहीं चूकते। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चल रही है कि विरोधी चाहे कुछ भी ढोल पीटते रहे लेकिन यह बात भी सत्य है कि धामी जनता के दिलों मे अपना घर बना चुके हैं और वह बच्चों के अंकल मामा बन गये तो वहीं मातृशक्ति के प्रति मुख्यमंत्री की उदारता और उनकी रक्षा करने का उन्होंने जो वचन दिया हुआ है उसी का परिणाम है कि मातृशक्ति मुख्यमंत्री को अपना रक्षक मानकर उन्हें हमेशा यही आशीर्वाद देती आ रही हैं कि ‘सीएम साहब आप हमेशा सलामत रहो’।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार साल पूर्व जब मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी तो किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि वह उत्तराखण्ड के सबसे बेहतर मुख्यमंत्री साबित होंगे। मुख्यमंत्री ने सरकार चलाने के लिए सबसे पहले संदेश दिया कि ‘न खाऊंगा और न किसी को खाने दूंगा’। मुख्यमंत्री के इस संकल्प पर राज्य की जनता को शुरूआती दौर मे विश्वास नहीं हो रहा था और वह इसे सिर्फ एक पब्लिक स्टंट मान रही थी लेकिन मुख्यमंत्री ने जब उसी शैली पर काम करने का सिलसिला शुरू किया तो आवाम भी उनका कायल हो गया कि युवा मुख्यमंत्री कोई भी संकल्प हवाबाजी मे नहीं बल्कि उसे धरातल पर उतारने के लिए लेते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक दशक से राज्य की राजनीति को देखा है और उन्हें इस बात का शुरूआती दौर से ही इल्म था कि अगर उत्तराखण्ड की सत्ता मे अपनी धमक दिखानी है तो उसके लिए सबसे पहले उन्हें आवाम के दिलों मे अपनी जगह बनानी होगी। पुष्कर ंिसह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जो राज्य के सभी जिलों मे बार-बार वहां दस्तक देकर आवाम के बीच चौपाल लगाते हैं और एक साधारण इंसान की तरह उनके बीच रहकर उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाये जाने के लिए उनसे राय मश्वरा भी करते हैं।

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