शिकायतों के बावजूद कुंभकर्णी नींद सो रहा सिस्टम?
रुड़की। हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो सरकार जनपदों के अफसर भ्रष्टाचार करने वालों की नाक में नकेल डालने का बडा ऑपरेशन चला रहे हैं तो वहीं कुछ भ्रष्टाचारी ऐसे हैं वह सिस्टम को भी चुनौती देने से बाज नहीं आ रहे जिसका खामियाजा आम जनमानस को उठाना पड रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जनमानस अब अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आगे बढने लगा है और उसका दो टूक कहना है कि वह अब भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेगा। वहीं रूडकी के लंढौरा स्थित थिथोला फिटनेस सेंटर में भ्रष्टाचार का खेल आखिर किसके इशारे पर चल रहा है यह किसी को समझ नहीं आ रहा क्योंकि परिवहन विभाग के इस संेटर पर वाहन स्वामियों से तय फीस से तीन गुना ज्यादा रकम वसूलने का खुला आरोप लग रहा है। एक शिकायतकर्ता ने जब मीडिया के सामने इस बात से पर्दा हटाया कि सोलह सौ रूपये सरकारी फीस के बदले पांच हजार रूपये की मांग की जा रही है तो उससे समझा जा सकता है कि सिस्टम किस तरह से कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है और वह सरकार के भ्रष्टाचारमुक्त उत्तराखण्ड के सपने को भी ध्वस्त करने से बाज नहींे आ रहा?
रुड़की के लंढौरा स्थित थिथोला फिटनेस सेंटर भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। परिवहन विभाग के इस सेंटर पर वाहन स्वामियों से तय फीस से तीन गुना ज्यादा रकम वसूली जा रही है। सोलह सौ रुपये की सरकारी फीस के बदले पांच हजार रुपये की मांग की जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि शिकायतों के बाद भी सिस्टम कुंभकर्णी नींद सोया है। आखिर किसकी शह पर चल रहा है यह अवैध वसूली का खेल? यह है रुड़की के लंढौरा स्थित थिथोला का फिटनेस सेंटर, जहां गाड़ियों की फिटनेस नहीं, बल्कि जेब की फिटनेस देखी जाती है। स्थानीय लोगों और बाहरी राज्यों से आने वाले वाहन स्वामियों का आरोप है कि यहां बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं होता। खासकर उत्तराखंड के बाहर से आने वाले वाहनों को निशाना बनाया जाता है। सहारनपुर के मनीष कुमार जैन जब अपनी गाड़ी की फिटनेस कराने पहुंचे, तो उनसे सरकारी फीस के बजाय पांच हजार रुपये मांगे गए। जब मनीष ने विरोध किया, तो कर्मचारियों ने उन्हें कागजों की कमियां बताकर घंटों चक्कर कटवाए। लेकिन मनीष ने हार नहीं मानी और भ्रष्टाचार के इस खेल की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली।
जैसे ही मीडिया ने इस मामले में दखल दिया, सेंटर के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जो फाइल घंटों से अटकी थी, उसे आनन-फानन में सरकारी शुल्क लेकर पास कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल मंडल के रीजनल हेड डॉ. मोहम्मद आवेश खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने माना कि शिकायतें पहले भी आई हैं और जांच के बाद सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। लेकिन सवाल वही है क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? क्योंकि कुछ समय पहले भी यहां एक गार्ड को वसूली के आरोप में पुलिस के हवाले किया गया था, पर नतीजा सिफर रहा। लंढोरा फिटनेस सेंटर पर लगा भ्रष्टाचार का यह दाग कोई नया नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या डॉ. आवेश की जांच के बाद यह वसूली रुकेगी या फिर कैमरा हटते ही दोबारा वही पुराना खेल शुरू हो जाएगा?