उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार का सर्वनाश करने को कब बनेगा लोकायुक्त!

0
126

लोकायुक्त ही भ्रष्टाचार के बडे मगरमच्छों का कर सकता है शिकार?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प मुख्यमंत्री ने लिया हुआ है और रिश्वतखोरों से लेकर भ्रष्टाचारी और घोटालेबाजों की नाक में नकेल डालने के लिए उन्हांेने बडा ऐलान कर रखा है। विजिलेंस उन रिश्वतखोरों को तो जरूर सलाखों के पीछे पहुुंचा रही है जिनके खिलाफ उनके पास शिकायत आती है लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार करने वाले अदृश्य बडे-बडे मगरमच्छों पर विजिलेंस सीधी कार्यवाही इसलिए नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिससे कि वह उनके खिलाफ शासन में जाये बगैर सीधी एक्शन ले सकें? उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त देखने का सपना राज्यवासी अपने मन मे पाले हुये हैं लेकिन यह भी सच है कि भ्रष्टाचार का सर्वनाश करने के लिए एक सशक्त लोकायुक्त की उत्तराखण्ड में जरूरत है और यह लोकायुक्त कब बनेगा यह तो अभी भविष्य के गर्त में कैद है लेकिन अब लोकायुक्त गठन की मांग तेज हो गई है और राष्ट्रवादी रिजनल पार्टी लोकायुक्त के गठन की मांग को लेकर अब आगे बढ़ गई है और उसका कहना है कि अगर लोकायुक्त न बना तो उग्र आंदोलन किया जायेगा।
उत्तराखण्ड के अन्दर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के मन में राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त करने का एक बडा साहस देखने को मिलता था और उनके मन में हमेशा एक पीडा रहती थी कि जिस राज्य को आंदोलन करके हासिल किया गया वहां भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत होना ही चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने राज्य के अन्दर जब एक सशक्त लोकायुक्त का गठन किया तो उस लोकायुक्त की धूम समूचे देश के अन्दर देखने को मिली थी और लोकायुक्त के पक्षधर अन्ना हजारे ने भी भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को एक मजबूत लोकायुक्त बताकर उनकी पीठ थपथपाई थी। भुवन चंद खण्डूरी के द्वारा बनाया गया लोकायुक्त पास होने के बावजूद उनके बाद आई कांग्र्रेस व भाजपा की सरकारों को आखिरकार भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को देखकर क्यों करंट लगता रहा है जिसके चलते वह इस लोकायुक्त को राज्य में हरी झण्डी देने को कभी तैयार ही नहीं दिखी? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालेमुक्त बनाने का संकल्प लिया था लेकिन राज्य आज भी भ्रष्टाचारमुक्त होने के लिए शायद छटपटा रहा है? उत्तराखण्ड में आज भी काफी राजनेता और अफसर ऐसे हैं जिन्हांेने भ्रष्टाचार से बेनामी और अकूत सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा कर रखा है? सरकार के पास ऐसा कोई मजबूत तंत्र अभी तक मौजूद नहीं है जिससे वह भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की काली कमाई का सारा राज बेनकाब करने के लिए एक बडे मिशन के साथ कोई ऑपरेशन चलाकर उन्हें बेनकाब कर सकें? उत्तराखण्ड के अन्दर यह सवाल भी खडे हो रहे हैं कि जब राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिया जा रहा है तो फिर खण्डूरी के लोकायुक्त को जिंदा कर सरकार के मुखिया भ्रष्टाचारियांे और घोटालेबाजों को संदेश क्यों नहीं दे रहे कि अब लोकायुक्त ही भ्रष्टाचार पर प्रहार करेगा?
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ अपना रूख साफ करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून बनाने से लेकर सामान नागरिक सहिता कानून को राज्य में लागू करने के लिए अपने कदम आगे बढा रखे हैं लेकिन राज्य में फैले भ्रष्टाचारियों और बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा करने वाले भ्रष्ट राजनेताओं व अफसरों पर नकेल लगाने के लिए सरकार के पास अभी तक ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिसके सहारे वह ऐसे भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब कर सके? उत्तराखण्ड में एक बार फिर आवाज उठने लगी है कि आखिर लोकायुक्त के नाम से सरकारों को क्यों करंट लगता है जिसके चलते वह राज्य में बने लोकायुक्त को धरातल पर लाने की दिशा में कोई कदम ही नहीं उठाना चाहती? बहस चल रही है कि पुष्कर सरकार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को जिंदा कर उसे मजबूती के साथ खडा करे जिससे राज्य को बाइस सालों से लूटते आ रहे सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों और उनके द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गई सम्पत्तियांे का काला राज उत्तराखण्ड की जनता के सामने आ सके? हैरानी वाली बात है कि खण्डूरी भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री हैं और राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार है तो फिर भुवन चंद खण्डूरी के बनाये गये सशक्त लोकायुक्त को लागू करने की दिशा मंे सरकार के मुखिया कब आगे आयेंगे इस पर राज्यवासियांे की नजरें लग गई हैं?

LEAVE A REPLY