भाजपा को नजर आ रही

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अंकिता हत्याकांड में ‘साजिश की बू’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर चार साल से बेदाग होकर सरकार चला रहे मुख्यमंत्री को अब पार्टी के ही कुछ नेता अपनी रडार पर लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। समय-समय पर मुख्यमंत्री को पर्दे के पीछे रहकर अस्थिर करने के लिए वह कोई न कोई ऐसा प्रोपगंडा कर देते हैं जिससे कि राज्य के अन्दर एक भ्रम फैल जाये कि उत्तराखण्ड की सियासत में कुछ बडा होने वाला है? पिछले कुछ वर्षों से तो मुख्यमंत्री के खिलाफ अफवाहों का दौर तेजी के साथ बढता चला है जिससे राज्य के अन्दर विकास का पहिया थमता रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री को निशाने पर लेने का जो चक्रव्यूह रचा जाता रहा है उससे राज्य की राजनीति में एक बडी हलचल बिना बात के दिखाई देती रही है। वहीं अचानक अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक कथित वीआईपी के नाम का खुलासा भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर आकर जिस अंदाज में शोर मचाकर किया है उससे उत्तराखण्ड की सियासत में एक भूचाल तो मचा ही हुआ है लेकिन भाजपा के दिग्गज राजनेताओं को इसके पीछे साजिश की बडी बू नजर आ रही है और यही कारण है कि भाजपा के कुछ नेता बार-बार मीडिया के सामने आकर ऐलान करते आ रहे हैं कि अगर किसी के पास कोई ठोस सबूत हैं तो वह सामने आये और उन सबूतों को देखकर सरकार कोई भी जांच कराने के लिए तैयार है।
उत्तराखण्ड की सियासत में पिछले कुछ दिनों से उस समय एक बडा भूचाल मचा हुआ है जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी ने सोशल मीडिया पर आकर दहाडते हुए शोर मचाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा के एक कथित नेता की भूमिका थी जिस पर पर्दा डाला गया और उसके नाम का कभी खुलासा भी नहीं हुआ। फिल्मी अंदाज में उर्मिला सनावर ने अचानक सोशल मीडिया पर आकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर ऐसा शोर मचाना शुरू किया कि मानो उन्होंने अपनी आंखों से इस वीआईपी को उस रिजॉट की तरफ जाते हुए देखा हो जिसका नाम वह कथित वीआईपी को लेकर बोलती हुई नजर आ रही हैं। सवाल यह भी है कि आखिरकार अगर उर्मिला सनावर के पास कथित वीआईपी को लेकर कोई बडा सबूत था तो वह मीडिया के सामने आने से क्यों हिचकिचाहट मे रही और सिर्फ सोशल मीडिया पर वह कथित वीआईपी के नाम का शोर मचाकर सरकार के मुखिया को एक बडी साजिश के तहत बदनाम करने के लिए आगे बढ गई हो?
सवाल यह है कि आखिरकार जो ऑडियो अब उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर उजागर किया है वह ऑडियो विधानसभा चुनाव से कुछ अर्से पूर्व ही क्यों किया? सवाल यह भी तैर रहे हैं कि आखिर उर्मिला सनावर और उसके पति सुरेश राठौर के बीच जो बातचीत हुई उसकी प्रमाणिकता का पैमाना आखिर किसने मापा कि वह ऑडियो शत-प्रतिशत ठीक है? एक पूर्व विधायक अगर किसी नेता या अफसर पर कोई आरोप लगा दे तो उससे क्या यह साबित हो जाता है कि जिस पर आरोप लगाया जा रहा है वही गुनाहगार है? भाजपा के अन्दर एक लम्बे समय से कुछ नेताओं के बीच गुटबाजी का दौर चलता आ रहा है और यह गुटबाजी अकसर जिस चरम पर पहुंचती रही है यह किसी से छिपा नहीं हॅै इसलिए उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया पर कथित वीआईपी के नाम को लेकर हो हल्ला मचाना कहीं एक बडी साजिश का हिस्सा तो नहीं यह आज भी राज्य के गलियारों में एक बहस का विषय बना हुआ है। उत्तराखण्ड की सियासत में उस समय एक बडा भूचाल अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर आ गया जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की रजत जयंती पर विकास की नई उडान पर तेजी के साथ उड रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले भी इस बात का खुलासा कर चुके हैं कि उनको लेकर अकसर अफवाहों का दौर शुरू किया जाता है लेकिन वह इस पर कभी ध्यान नहीं देते और सिर्फ उत्तराखण्ड को आगे ले जाने में ही विश्वास रखते हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बात भी आवाम बोल रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छ राजनीति से कहीं न कहीं उनकी पार्टी के ही कुछ नेता सम्भवतः ईर्ष्या करते हैं और उनके खिलाफ ऐसी साजिशें रचते हैं जिससे कि उन्हें वह अस्थिर करने का तांडव कर सके।

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