उत्तरकाशी(चिरंजीवी सेमवाल)। गंगोत्री हाईवे धरासू नालूपानी में भूस्खलन से 24 घंटे से लगातार बंद का है जिससे सैकड़ों मुसाफिर फसे हुए हैं। सोमवार को दोपहर बाद ठीक चार बजे गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग नालूपानी में भारी भूस्खलन से सड़क पर पूरा श्पहाड़श् आ गिरा है जिससे हाईवे पर दोनों ओर से देर रात्रि तक वाहनों की लंबी कतारें लगी थी। लोगों को उम्मीद थी कि देर रात्रि तक हाईवे खुलेगी लेकिन देर रात्रि बीआरओ की मशीनों ने कार्य बंद कर दिया जिससे हाईवे खुलने के इंतजार में बैठे दर्जनों वाहन मायूस होकर वापस लौटें है।
इधर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उत्तरकाशी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि बीआरओ की मशीनें दोनों तरफ से कार्य में जुटे है। मंगलवार को 4 बजे दिन तक हाईवे खुलने की संभावना बताई लेकिन अब तक हाईवे नहीं खुली। हाईवे को खोलने के बीआरओ लगातार प्रयास कर रही है परंतु बड़े- बड़े पत्थर व भूस्खलन का मलवा अधिक होने के कारण अभी तक मार्ग बंद है। बीआरओ की ०2 मशीनें दोनों ओर से लगातार सफाई कार्य कर रही है परंतु ऊपर से भी मलवा गिर रहा है। गौरतलब है कि इस बरसाती सीजन में दरकता गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग आपदा से बेहाल नजर आ रहा है। जगह-जगह भूधंसाव और भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे पर आवागमन जोखिम भरा होने के साथ ही भागीरथी घाटी में भारी मुश्किल हालात का कारण बना है। खासकर आपदा के एक माह से अधिक समय के बाद भी धराली पहुंच से दूर है। इसके चलते गंगोत्री धाम की यात्रा भी ठप पड़ी है। नलूणा में पिछले बार बार मार्ग भारी भूस्खलन होने के कारण बंद रहा है। मानसून सीजन में गंगोत्री राजमार्ग पर भूस्खलन और भूधंसाव ने जमकर कहर बरपाया। हर्षिल-धराली में तेलगाड़ और खीर गंगा की बाढ़ भी हाईवे की बदहाली का कारण बना है।
इस बार धरासू से लेकर हर्षिल तक गंगोत्री हाईवे पर लैंडस्लाइड की ऐसी मार पड़ी कि अब तक भी स्थिति पटरी पर नहीं लौट सकी। डबरानी से लेकर सोनगाड़ के बीच बंद सड़क ने गंगोत्री हाईवे पर यातायात को सबसे अधिक प्रभावित रखा। गंगोत्री नेशनल हाईवे पर पर धरासू ,नालूपानी, रतूड़ीसेरा, बंदरकोट, नेताला, नलूणा, डबरानी, सोनगाड़ आदि सबसे संवेदनशील भूस्खलन प्रभावित जगह हैं। नालूपानी और नलूणा सबसे संवेदनशील है, जहां बिन बारिश भी पहाड़ी से मलबा गिरता रहता है। नलूणा में पिछले दिनों से भूस्खलन होने के कारण बार बार बंद हो रहा है। सड़क मार्ग के बंद होने से लोग परेशानी में है। इतना ही नहीं बीआरओ ने भूस्खलन जोन क्षेत्रों में करोड़ों की लागत से विदेशी टेक्नोलॉजी से ट्रीटमेंट क्या था लेकिन वह ट्रीटमेंट सिर्फ दिखाओ बना और करोड़ों की धनराशि निर्मित सड़क भूस्खलन से तबाह हो गई है। इससे बीआरओ के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं?
