सीएम बोलेः घबराओ मत ‘मैं हूं न’
प्रमुख संवाददाता
चमोली/देहरादून। चमोली के थराली में बादल फटने से मची तबाही ने सरकार और अफसरशाही के माथे पर चिंता की लकीरें डाल रखी हैं। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में रहते ही थराली में बडा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए जिस तरह खुद मोर्चा संभाला उससे यह बात तो साफ हो गई थी कि मुख्यमंत्री किसी भी आपदा के बाद आपदा पीडितों के संकटमोचन बनकर उनके साथ खडे हो जाते हैं और उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि सरकार उनके साथ खडी है। मुख्यमंत्री ने युद्ध स्तर पर बचाव व राहत कार्य के लिए बडा रेस्क्यू ऑपरेशन चलवा रखा है और उन्होंने दिल्ली से दून पहुंचते ही इस आपदा से निपटने के लिए अफसरों के साथ लम्बा मंथन किया और जिनके मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गये उन्हें तत्काल पांच-पांच लाख रूपये मुआवजा देने की भी घोषणा करके उनके आंसुओं को पोछने का काम किया। मुख्यमंत्री आज सुबह जब थराली में आपदा पीडितों से मिलने के लिए पहुंचे तो वहां कुछ लोग जब उनके सामने हाथ जोडकर खडे हुये तो उनकी आंखो से जब धारा प्रवाह आंसू बहते चले गये तो मुख्यमंत्री उन आसूओं को देखकर खूब भावुक हुये और उन्होंने रो रहे आपदा पीडितों को विश्वास दिलाया कि वह घबराये नहीं और वह उनके साथ खडे हुये हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों के आंसू पोछने के लिए जो भावुकता दिखाई उसे देखकर आपदा पीडितों को विश्वास हो चला कि मुख्यमंत्री उनकी पीडा को समझते हुए उनके रक्षक बनकर उनके साथ खडे रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज सुबह आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करने थराली पहुंचे जहां डीएम और पुलिस कप्तान से मुख्यमंत्री ने आपदा से प्रभावित लोगों को कहां-कहां शिफ्ट किया गया है उसके बारे में जानकारी ली तो वहीं उन्होंने डीएम से यह पता लगाया कि आपदा में कितने लोग प्रभावित हुये हैं और जल्द से जल्द आपदा प्रभावितों की सूची बनाने का उन्होंने आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए डीएम को दो टूक संदेश दिया और जहां-जहां मलबा भरा हुआ है उसे जल्द से जल्द खाली कराने और सडकों में आये बडे-बडे मलबे को हटाने के लिए रात-दिन काम करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी जब कुछ आपदा पीडितों से शुरूआती दौर में मिलने के लिए पहुंचे तो कतार में खडे कुछ पुरूषों ने मुख्यमंत्री को देखकर उनके सामने रोते हुए हाथ जोडे और कहा कि सीएम साहब हम तो इस आपदा में बर्बाद हो गये और हमारा सबकुछ खत्म हो गया है। चंद पुरूषों की आंखों में आंसूओं की बहती धारा देखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भावुक हो गये और वह रो रहे लोगों के आंसू पोछने के लिए उनके हाथ पकडकर उन्हें दिलासा दिलाते रहे कि घबराओ मत ‘मैं हूं न’। मुख्यमंत्री को अपने सामने पाकर जिस तरह से कुछ आपदा पीडितों ने उन्हें अपने परिवार का मुखिया मानकर उनके सामने रोते बिलखते अपने दर्द को बयां किया और बताया कि अब उनके पास कुछ नहीं रह गया है और जहां उनका परिवार हसता खेलता हुआ रहता था आज वह बर्बाद हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन आपदा पीडितों के मन की पीडा को समझते हुए उन्हें बार-बार यही दिलासा दिया कि सरकार उनके साथ खडी है और उन्हें किसी भी प्रकार से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आपदा पीडितों की आंखों में आंसू और मुख्यमंत्री का भावुकता में नजर आया चेहरा यह बताने के लिए काफी है कि वह अपने राज्य की जनता के दर्द को अपना समझकर उनके साथ खडे रहते हैं और किसी की भी आंखों में आये आंसू देखकर वह भावुक हो जाते हैं।

