देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री को राजनीति का चाणक्य माना जाता है और वह जिस अंदाज में पिछले चार सालों से सरकार चला रहे हैं उसके चलते कभी भी विपक्ष का कोई नेता उनके खिलाफ आवाज उठाने के लिए आगे बढता हुआ नजर नहीं आया क्योंकि वह सबको साथ लेकर चलने मे ही अपना विश्वास दिखाते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में यह संदेश दे रखा है कि वह पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चलायेंगे और वह द्वेष भावना से कभी भी कोई काम नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री के इस विजन से विपक्ष के नेताओं को भी मुख्यमंत्री के वचन पर पूरा भरोसा है और उस भरोसे पर हमेशा मुख्यमंत्री खरा उतरते हुए आ रहे हैं। हाल ही में चंद दिन पूर्व नैनीताल में पंचायत चुनाव को लेकर जो तांडव मचा और कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने अपने साथ हुई मारपीट और चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के अपहरण को लेकर उन्होंने जो नाराजगी खुले रूप से सोशल मीडिया पर दिखाई थी उससे सरकार भी कहीं न कहीं असहज नजर आई लेकिन यह बात तो साफ हो रही थी कि यशपाल आर्य की नाराजगी को विधानसभा सत्र के शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री दूर कर देंगे। सुबह जब मुख्यमंत्री और यशपाल आर्य की दो तस्वीरें सामने आई तो उसे देखकर हर कोई यह सोचने लगा कि मुख्यमंत्री ने नाराज दिखाई दे रहे यशपाल आर्य की नाराजगी को एक ही झटके मे दूर कर दिया है? यह इसलिए भी कहा जा रहा है कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती और एक तस्वीर में जिस तरह मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष एक दूसरे को देखकर मुस्करा रहे थे उससे कहीं न कहीं यह संदेश चला गया कि राजनीति के चाणक्य ने नेता प्रतिपक्ष को भरोसा दिला दिया कि उनके साथ जो अन्याय हुआ वह दुखद है और वह हमेशा उनके साथ खडे हैं?
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पूर्व नैनीताल में जिला पंचायत के दौरान जो अराजकता देखने को मिली उसको लेकर काफी बहस छिडी की आखिरकार जब अराजकता हो रही थी तब मित्र पुलिस कहां गायब थी? बेतालघाट में भीड पर गोलियां चलाने वाले युवक की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई तो उससे पुलिस महकमे की खूब छिछलेदारी होने लगी और उच्च न्यायालय भी इन घटनाओं को लेकर नैनीताल पुलिस कप्तान से काफी नाराज दिखाई दी। आज जब चमोली के गैरसैंण में विधानसभा का सत्र शुरू होना था तो उससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई और इस मुलाकात की जो तस्वीरें सामने आई उसे देखकर यह साफ झलक गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने यशपाल आर्य ने अपनी सारी पीडा बयां कर दी थी कि चुनाव में उनके साथ क्या घटा है। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने जिस गरमजोशी के साथ यशपाल आर्या का हाथ थामा और उसके बाद दोनो मुस्कराते हुए नजर आये उन फोटो को देखकर यह साफ हो गया था कि रूठे यशपाल आर्य को मुख्यमंत्री ने मना लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी आज राजनीति के वो चाणक्य बन चुके हैं जिसकी कल्पना भी शायद किसी ने की थी और विपक्ष का कोई भी नेता सरकार से कितना भी नाराज क्यों न दिखाई दे रहा हो मुख्यमंत्री अपनी चाणक्य राजनीति से उसे मना ही लेते हैं और यही चाणक्य नीति देखकर भाजपा और विपक्ष के बडे-बडे राजनेता भी घबराये हुये नजर आते हैं कि ऐसे में उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा यह उन्हें भी नहीं पता।
गौरतलब है कि चंद दिन पूर्व पिछले दिनों नैनीताल के जिला पंचायत चुनाव के दौरान जो कुछ घटा था उसको लेकर कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सिस्टम से बहुत नाराज थे और उनका खुला आरोप था कि ऐसी अराजकता जो उत्तराखंड की राजनीति में पहले कभी किसी ने नहीं देखी। दिनदहाड़े पुलिस की नजरों के सामने खुलेआम जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण। इससे मैं अत्यंत आहत हूं। निश्चित रूप से यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और संस्कारों पर किया गया एक अभूतपूर्व आघात है। यह न्याय के देवता गोल्ज्यू की भूमि है, जो हर आँसू, हर याचना का प्रतिकार करते हैं सहलाते हैं, अन्याय से जन्मे हर घाव पर मरहम लगाते हैं। यशपाल आर्य ने कहा था कि मुझे विश्वास है गोल्ज्यू जरूर न्याय करेंगे। उनके प्रतिनिधि के रूप में नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, मैं विश्वास करता हूं, इस प्रकरण को अनदेखा नहीं करेंगे। हमारे मुख्यमंत्री स्वयं चम्पावत से हैं, जो गोल्ज्यू की जन्म और कर्म भूमि रही है। यह मात्र एक संयोग नहीं वरन देवता के आशीष का प्रमाण है। गोल्ज्यू को न्याय करना ही होगा, और वो जरूर करेंगे। अन्याय देवताओं की इस पुण्यभूमि पर कभी फलफूल नहीं सकता। आज विधानसभा सत्र से पहले साफ नजर आ गया कि कुमांऊ के दोनो बडे राजनेताओं ने आपसी सौहार्द में मिलकर आगे बढने का संकल्प लिया और मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने यशपाल आर्य की सभी नाराजगी को दूर कर उन्हें एक बार फिर अपना बना लिया।

