कैसे हो पायेंगे पंचायत चुनाव?

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड़ के अन्दर पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और चुनावी नामांकन का भी शोर बंद हो चुका है इसके बाद पंचायत चुनाव लडने वालों ने जीत का झंडा बुलंद करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। वहीं राजधानी से लेकर गढ़वाल के पहाड़ों में आफत की बारिश ने सरकार और चुनाव आयोग की नींद उडाकर रख दी है क्योंकि कुछ जनपदों में बारिश के कारण सड़कों पर मलबा और पहाड़ टूटने से जो रास्ते बंद हुये हैं उसने कहीं न कहीं सुगम पंचायत चुनाव कराने को लेकर सरकार के सामने एक बडी चुनौती खडी कर दी है? कुछ जनपदों में आपत की बारिश से जो कोहराम मचा हुआ है ऐसे में पंचायत चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के मन में एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिरकार मतदाता टूटे-फूटे और ब्लाक हुये रास्तों का सफर तय करके कैसे पोलिंग बूथों पर मतदान करने के लिए पहुंच पायेगा?
उत्तराखण्ड में पंचायत चुनाव को लेकर लम्बे अर्से से एक बडा संग्राम सरकार और विपक्ष के बीच चल रहा था लेकिन सरकार ने अपनी इच्छाशक्ति दिखाते हुए चुनाव कराने की हरी झंडी दी और उसके बाद चुनाव की घोषणा हुई लेकिन आरक्षण के मुद्दे को लेकर मामला उच्च न्यायालय नैनीताल पहुंचा था जहां तीसरे दिन लम्बी सुनवाई के बाद न्यायालय ने राज्य के अन्दर चुनाव कराने को लेकर लगी रोक को हटा दिया था। चुनाव आयोग ने चुनाव कराने का समय तय किया और उसके बाद चुनावी बिगुल बजा और चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों ने अपना नामांकन कर अपने आपको चुनावी मोड मे लाकर खडा कर दिया है। पंचायत चुनाव का काउनडाउन शुरू हो चुका है लेकिन इसी बीच राजधानी से लेकर गढवाल के कुछ पहाडी जनपदों में जिस तरह से आफत की बारिश ने हर तरफ हाहाकार मचा दिया है उससे सरकार के सामने भी पंचायत चुनाव कराना एक टेढ़ी खीर बना हुआ है। मुख्यमंत्री का कहना है कि उत्तराखण्ड में मानसून और भूस्खलन की धटनायें हो रही है और मौसम विभाग जैसे भविष्यवाणी कर रहा है उसके आधार पर सरकार काम कर रही है। उत्तरकाशी क्षेत्र में दो जगह सडक मार्ग पूरी तरह से कट गया है, उस पर काम चल रहा है, निरन्तर सभी स्थानों पर बचाव और राहत कार्य निरंतर चलाये जा रहे हैं। आपदा का असर कम हो इसके लिए मॉकड्रिल भी इस बार हुई है और बैठकें भी की गई हैं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि राज्य के पहाडी जनपदों में जिस तरह से आफत की बारिश ने सरकार और आम जनमानस को जिस तरह से डराया हुआ है उसके चलते राज्य के अन्दर पंचायत चुनाव का जो बिगुल बजा है वह किस तरह से सार्थक होगा यह अभी भी बडी पहेली है।

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