भूमि घोटाले में किसने डाला था दबाव?

0
108

देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में धाकड़ अंदाज मे सरकार चला रहे मुख्यमंत्री का एक ही मंत्र है कि न खाऊंगा न किसी को खाने दूंगा। मुख्यमंत्री के इस मंत्र ने बडे-बडे लोगों की नींद उडा रखी है और कुछ पूर्व सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से दौलत कमाने वाले कुछ बडे अफसरों को यह इल्म होता रहा है कि अगर उन्होंने युवा मुख्यमंत्री के शासनकाल में कुछ भी गलत किया तो उससे बचना असम्भव है। मुख्यमंत्री ने अपने तीन साल के कार्यकाल में बडे-बडे भ्रष्टाचारियों और माफियाओं को जिस तरह से धूल चटाने का काम किया है उससे उत्तराखण्डवासियों को विश्वास होता गया कि उनका उत्तराखण्ड अब सुरक्षित हाथों में है। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में नकल माफियाओं, बडे-बडे भूमाफियाओं पर जो प्रहार किया वह किसी से छिपा नहीं है और जब राजपुर इलाके मे साहनी बिल्डर ने गुप्ता बंधुओं के डर से आत्महत्या की तो मुख्यमंत्री के सख्त एक्शन के बाद राजधानी पुलिस ने चंद घंटो मे ही गुप्ता बंधुओं को थाने की हवालात मे कैद कर दिया था। तीन साल से बेदाग होकर सरकार चला रहे मुख्यमंत्री के साथ हरिद्वार प्रशासन के कुछ अफसरों ने एक बडा धोखा करके कोडियों की जमीन को करोडो में खरीदकर सरकार के खजाने को आघात पहुंचाया और एक तरह से मुख्यमंत्री की स्वच्छ छवि को धूमिल करने का उन्होंने जो कृत्य किया उसको लेकर यह बहस चल रही है कि भूमि घोटाले मे सरकार के मुखिया को जिस मास्टर माइंड ने धोखा दिया है उसे मुख्यमंत्री बडा सबक सिखायें कि सरकार के साथ धोखा करने का अंजाम क्या होता है? सवाल यह भी तैर रहे हैं कि घोटाला किस बडे के दबाव में अंजाम दिया गया इसका भी सच जनता के सामने आना चाहिए जिससे उस मास्टर माइंड को यह इल्म रहे कि पुष्कर राज में घोटाला और भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कोई हो वह उनकी रडार से नहीं बच पायेगा।
उत्तराखण्ड की धर्मनगरी हरिद्वार में नगर निगम ने एक बडा भूमि घोटाला करके यह कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके द्वारा किया गया घोटाला एक न एक दिन बेनकाब हो जायेगा? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेटवर्क इतना धाकड है कि उनके सामने वो भ्रष्टाचार और घोटाला सामने आ ही जाता है जिसे बडी चतुराई से किया गया होता है? भूमि घोटाला करके सरकार को करोडो रूपये के राजस्व का चूना लगाने का जो कृत्य किया गया उससे नाराज होकर मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने घोटालेबाजों को बडा सबक सिखाने का मन बनाया और मात्र एक माह के भीतर इस घोटाले की जांच कराकर हरिद्वार के मौजूदा डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त को सस्पेंड करके यह संदेश दे दिया था कि उनके शासनकाल में पारदर्शिता और स्वच्छता ही एकमात्र पैमाना है। हरिद्वार प्रशासन के बडे अफसरों को निलम्बित किये जाने के बाद से ही राज्य के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस घोटाले का मास्टर माइंड तो कोई और है जिसने घोटाले में सस्पेंड हुये चंद अफसरों पर दबाव बनाकर उन्हें घोटाला करने के लिए सम्भवत: मजबूर किया था? इस भूमि घोटाले में सरकार से धोखा करने वाले बडे खिलाडी (मास्टर माइंड) का चेहरा बेनकाब हो इसके लिए हर तरफ से एक आवाज बुलंद होती हुई दिखाई दे रही है कि जिस मुख्यमंत्री ने तीन साल से पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चला रखी है उसके दामन पर आखिरकार घोटाले का दाग लगाने वाला मास्टर माइंड आखिर कैसे बच सकता है? मुख्यमंत्री के एक्शन पर सबकी नजरें लगी हुई हैं और देखने वाली बात होगी कि इस घोटाले की पटकथा लिखने वाला मास्टर माइंड आखिर कब मुख्यमंत्री की रडार में फसेगा?
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के विजन को हवा मे उडाने के लिए हरिद्वार के नगर निगम में भूमि खरीद को लेकर जो करोडो का घोटाला अंजाम दिया गया उसकी भनक सरकार के कानो मे नहीं पड पाई लेकिन जैसे ही इस घोटाले की गूंज मुख्यमंत्री के कानो मे गूंजी तो वह सख्त अंदाज में घोटालेबाजों को सबक सिखाने के लिए आगे बढे और इस मामले की जांच उन्होंने एक आईएएस अफसर से कराकर बारह लोगों को निलम्बित कर दिया जिसमें हरिद्वार के डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त भी शामिल हैं। धामी के इस धाकड एक्शन से अफसरशाही में खलबली मची हुई है लेकिन हर तरफ एक शोर मचा हुआ है कि आखिरकार धाकड धामी को कैसे वो मास्टर माइंड ललकारने के लिए एक बडा खेल खेल गया जिसे इस घोटाले का असली मास्टर माइंड माना जा रहा है? अब एक ही आवाज बुलंद हो रही है कि पहले मुख्यमंत्री इस घोटाले में भ्रष्टाचार अधिनियम का मामला दर्ज कराकर एक बडा संदेश दे कि घोटालेबाज या भ्रष्टाचार करने वाला बक्शा नहीं जायेगा? चूंकि कांग्रेस इस घोटाले को लेकर सरकार की घेराबंदी करने का खेल खेल सकती है इसलिए सीएम इस घोटाले में हर उस चेहरे को जरूर बेनकाब करायेंगे जो अभी किसी की नजर में नहीं आ पाये हैं?

LEAVE A REPLY