इंसाफ के लिए भटकता बुजुर्ग

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हैल्पलाइन में आने वाली शिकायतों को लेकर हमेशा अलर्ट रहते हैं और वह अकसर शिकायत करने वाले कुछ लोगों को फोन करके पूछते हैं कि उन्होंने जो शिकायत दी थी उसका समाधान हुआ है कि नहीं। वहीं मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिला प्रशासन को डीएम के जनता दरबार में आवाम की शिकायतें सुनकर उन्हें फोरन न्याय देने का आदेश दिया हुआ है। हैरानी वाली बात है कि जिस राजधानी में सारी सरकार, शासन और राजभवन मौजूद है वहां एक बुजुर्ग को अपनी जमीन पर हुये कब्जे को छुडवाने के लिए पिछले 18० दिन से इंतजार करना पड रहा है जबकि यह न्याय जिला प्रशासन मात्र एक घंटे में मौके पर जांच कराकर बुजुर्ग की जमीन उसे दिलवा सकता था लेकिन गजब की बात है कि डीएम के जनता दरबार में हर बार बुजुर्ग कडकती धूप में उनके दफ्तर की चौखट पर जाता है लेकिन उसे आज तक न्याय नहीं मिल पाया। बुजुर्ग इस बात को लेकर हैरान है कि डीएम तो उसे न्याय दिलाने का वायदा करते आ रहे हैं लेकिन तहसीलदार, पटवारी, पुलिस से हो चुकी जांचो के बावजूद भी उसकी जमीन पर उसे कब्जा दिलाकर भू-माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही यह उसके मन में सिस्टम को लेकर एक नाराजगी पैदा कर चुका है। ऐसे में बुजुर्ग सरकार से सवाल पूछ रहा है कि आखिर कहां मिलता है न्याय…।
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने जबसे सत्ता संभाली है तबसे वह सभी जिलों के अफसरों को आदेश देते आ रहे हैं कि उनके यहां आने वाले फरियादियों की फरियाद सुनकर उन्हें तुरंत न्याय दिया जाये और बार-बार किसी भी फरियादी को अफसरों के कार्यालय के चक्कर न काटने पडे। मुख्यमंत्री के इस फरमान से आम जनमानस मे विश्वास है कि उन्हें अब न्याय के लिए भटकना नहीं पडेगा। सबसे अहम बात यह है कि मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के डीएम को आदेश दिये हुये हैं कि वह हफ्ते मे एक बार जनता दरबार लगायें और फरियादियों की फरियाद सुनकर उसे तत्काल न्याय दिलाया जाये, साथ ही यह भी सख्त हिदायत दे रखी है कि किसी भी फरियादी को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पडे। मुख्यमंत्री के इस आदेश पर राजधानी के अन्दर लगता है कि ग्रहण लगा हुआ है? प्रेमनगर मे रहने वाले एक 7०-75 वर्ष के बुजुर्ग गुरमेल सिंह की बडोवाला में सवा दो बीद्या जमीन है जिसकी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज भी उनके पास है और अपनी जमीन पर उन्होंने एक अर्से से बांउड्रीवॉल बनाकर गेट लगा रखा है लेकिन छह माह पूर्व कुछ भू-माफियाओं ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और बुजुर्ग ने फोरन राजधानी के डीएम को लिखित में शिकायत देकर सारा मामला बयां किया। डीएम ने बुजुर्ग को न्याय दिलाने के लिए पटेलनगर थाने को लिखा था और आईएसबीटी चौकी में कब्जा करने वालों ने तत्कालीन चौकी प्रभारी के सामने लिखित में दिया था कि वह चौबीस घंटे में अपना कब्जा हटा लेंगे। चर्चा रही कि तत्कालीन चौकी प्रभारी ने भू-माफियाओं से मिलकर ऐसा खेल खेला कि जब बुजुर्ग अपनी जमीन पर पहुंचा तो वहां से बुजुर्ग को झगडे की आशंका में वापस जाना पडा था। बुजुर्ग का कहना है कि उसके पास पटवारी, तहसीलदार, कानूनगो से लेकर पुलिस अफसर की रिपोट है जिसमें साफ अंकित है कि जमीन गुरमेल सिंह की है लेकिन डीएम के जनता दरबार से बुजुर्ग को 18० दिन बाद भी न्याय नहीं मिल पाया जो न्याय उसे मात्र एक घंटे में मिल सकता था। बुजुर्ग का कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो मौके पर तहसीलदार को भेजकर यह आंकलन करा लें कि जमीन किसके नाम है और उसके बाद उसकी जमीन पर उसे कब्जा दिलाकर उन भूमाफियाओं के खिलाफ पुलिस कप्तान धोखाधडी का मामला दर्ज करें जिन्होंने उसकी जमीन पर छह महीने से दादागिरी के चलते कब्जा किया हुआ है। बुजुर्ग को सीएम व डीएम पर विश्वास है लेकिन वो कौन छोटे अफसर हैं जो उसे छह माह से न्याय नहीं देना चाहते?

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