बदमिजाज किन्नरों का तांडव

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देहरादून(प्रमुख संवादददाता)। सरकार ने किन्नर समाज की हैड को दायित्वधारी का दर्जा दिया तो आवाम को उम्मीद थी कि शायद अब किन्नर समाज के लोग बधाई के नाम पर लोगों के साथ तांडव नहीं करेंगें। हालांकि आवाम की यह सोच हवा हवाई दिखाई दे रही है क्योंकि किन्नर समाज के लोग जिस आक्रामक शैली से बधाई लेने के लिए लाखों रूपयों की मांग कर उन्हें अपना तांडव दिखाने से बाज नहीं आ रहे है उससे राजधानीवासी भी डरे और सहमें है। हैरानी वाली बात है कि सरकार व सिस्टम किन्नर समाज की अवैध वसूली पर तिनका भर भी नकेल नहीं लगा पा रहा है वहीं राजपुर रोड़ पर किन्नरों ने सड़क पर जो बेशर्मी का खुला तांडव किया और पुलिस को उन्होंने खुली चुनौती देते हुए सड़क पर जो तांडव मचाया उससे सड़क पर चलने वाला हर इंसान इनकी बेशर्मी देखकर अपने आप को लज्जित महसूस कर रहा था। पुलिस ने चार किन्नरों के खिलाफ मुकदमा ही दर्ज किया है लेकिन सवाल यह है कि आखिरकार सरकार व सिस्टम कब किन्नर समाज की अवैध वसूली और उनके द्वारा किये जाने वाले तांडव से आवाम को आजादी दिलायेगी।
राजधानी के राजपुर इलाके में चार किन्नरों ने सड़क पर जो खुला बेशर्मी का तांडव मचाया उसे देखकर सड़क पर चलने वाला हर कोई हैरान और डरा हुआ दिखाई दे रहा था। सड़क पर जिस तरह से जरा से विवाद में किन्नरों ने पुलिस के पिकेट बैरियर को बीच सड़क पर गिराया और यातायात को बाधित किया उससे पुलिस महकमें के लोग भी इनके तांडव से अपने आप को बचाते हुए नजर आये।
संयुक्त नागरिक संगठन किन्नर समाज के आतंक को लेकर बेहद नाराज दिखाई दे रहा है और उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से किन्नरों का आतंक उत्तराखंड में बढ़ता ही जा रहा है इनके द्वारा नेक के रूप में मनमर्जी से धनराशि की वसूलि की जाती है जो की एक आम आदमी के बस की बात नहीं है यदि इनके द्वारा मांगी गई धनराशि इनको न मिले तो यह बदतमीजी पर उतरते हैं यहां तक कि कपड़े भी उतरने तक की भी बात कह देते हैं ।मेरे पड़ोस में भी एक घटना घटी थी जिसमें इनके द्वारा मार पिटाई की गई थी और लगभग 5० किन्नर गाडिय़ों में भरकर वहां पर आ गए थे हमारे पड़ोसी ने पुलिस को फोन किया परंतु पुलिस भी आकर मूकदर्शक बनी रही पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की इससे किन्नरों का साहस और बढ़ गया किसी प्रकार से मध्यस्थता कर बात को सुलझाया गया ।इस समय प्रशासन को इनको बुलाकर नेक की धनराशि तय कराने की आवश्यकता है व किन्नरों के लिए ऐसी धनराशि तय होनी चाहिए जो की आम आदमी भी दे सके ।
संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने कहा है कि वर्तमान समय में किसी भी समाज की सभ्यता, उसका अनुशासन और कानून के प्रति उसकी निष्ठा से मापी जाती है। हाल ही में किन्नर समुदाय के कुछ व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक स्थान पर किये गए आपत्तिजनक एवं असभ्य व्यवहार की घटनाएं अत्यंत निंदनीय हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग या समुदाय को यह अधिकार नहीं है कि वह कानून व्यवस्था को चुनौती दे या समाज में डर और अराजकता का वातावरण बनाए। उनका कहना है कि ऐसे कृत्य, चाहे वे किसी से भी हों, न केवल सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं, बल्कि आपराधिक श्रेणी में आते हैं।
उनका कहना है कि हमारा प्रशासन एवं न्याय प्रणाली सभी नागरिकों के लिए समान रूप से कार्य करती है और हम यह अपेक्षा करते हैं कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह पर निष्पक्ष और कठोर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि हम पूरे समुदाय को दोषी न ठहराएं, बल्कि उन विशेष व्यक्तियों की पहचान कर, उनके विरुद्ध सटीक और उचित कदम उठाएं।

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