पर्यटकों को चप्पे-चप्पे पर खाकी देख लगता है भय?

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड सरकार राज्य में पर्यटन बढाने के लिए बडे-बडे दावे करती आ रही है और उसका फोकस उत्तराखण्ड में पर्यटन को तेजी के साथ आगे बढाने का है लेकिन सवाल यह तैर रहे हैं कि अगर पर्यटक स्थलों पर जाने के लिए पर्यटकों को खुली आजादी नहीं मिलेगी और उनके पर्यटक स्थलों पर इंजोए करने का सपना पुलिस के डर से खत्म होगा तो राज्य मे कैसे पर्यटन मे चार चांद लग पायेंगे यह अपने आप मे एक बडी पहेली बन गया है? गजब की बात है कि राजधानी मे ही जब शाम ढलते ही चप्पे-चप्पे पर पुलिस के बैरियर पर फोर्स आने जाने वाले लोगों और पर्यटकों के वाहनों की जिस तरह से तलाशी लेने के लिए आगे खडी हो जाती है उससे पर्यटन नगरी में इंजोए करने आ रहे पर्यटकों के मन में पुलिस का एक बडा डर देखने को मिल जाता है कि आखिरकार चप्पे-चप्पे पर पुलिस ऐसे क्यों खडी हो जाती है कि मानो जैसे राजधानी को कुछ डर सता रहा हो? गोवा मे पर्यटकों को मिलती आजादी से ही वहां का पर्यटन खूब खिलखिला रहा है और उसी के चलते वहां हमेशा पर्यटकों का तांता लगा रहता है जबकि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की एंट्री उसी समय दिखाई देती है जब कुछ दिनों की छुट्टियां हुआ करती हैं? सरकार को चाहिए कि इंजोए के लिए आने वाले पर्यटकों के सामने पुलिस का ऐसा किला न खडा करे जिसके चलते पर्यटकों को पर्यटन स्थलों पर खुली आजादी से इंजोए करने मे भय सताने लगे?
उत्तराखण्ड को एक दशक से पर्यटन प्रदेश के रूप में विख्यात करने के लिए पूर्व सरकारें भी काम करती रही हैं लेकिन उनकी सोच गोवा सरकार के पर्यटन को बढावा देने के लिए कभी दिखाई नहीं दी थी जिसके चलते उत्तराखण्ड के अधिकांश पर्यटक स्थलों पर बारह महीने पर्यटकों की एंट्री देखने को नहीं मिलती है जिससे पर्यटक स्थलों पर व्यापार करने वालों के सामने भी अपनी रोजी रोटी का संकट मंडराया रहता है। उत्तराखण्ड के कुछ पर्यटक स्थलों पर आने के लिए पर्यटकों की काफी रूचि दिखाई देती है लेकिन आज भी उत्तराखण्ड के अन्दर गोवा जैसा पर्यटन पर्यटकों को नहीं मिल पा रहा है जिससे सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार कब सिस्टम यह परखने की कोशिश करेगा कि उत्तराखण्ड के पर्यटन स्थलों को बारह महीने गुलजार रखने के लिए ऐसा क्या करें कि पर्यटकों की एंट्री तेजी के साथ पर्यटक स्थलों पर दिखाई दे जिससे कि सरकार को भी बडा राजस्व मिलता रहे। उत्तराखण्ड के गढवाल व कुमांऊ में कुछ चुनिंदा ही पर्यटक स्थल पर्यटकों को भाते हैं और हमेशा पर्यटकों की दौड छुट्टियों के दौरान वहां दिखाई देती है। उत्तराखण्ड में गोवा की तर्ज पर कब पर्यटन गुलजार होगा यह आज भी एक बडी पहेली बना हुआ है? वहीं राजधानी के मसूरी में इंजोए के लिए आने वाले सैकडो पर्यटकों को उस समय एक डर की भावना दिखाई देती है जब उन्हें शहर मे एंट्री करने के दौरान रात्रि में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बैरियरों पर काफी पुलिसकर्मी चैकिंग करते हुए दिखाई दे जाते हैं और उनके मन में यह भावना पैदा होती है कि उत्तराखण्ड तो शांतप्रिय राज्य है तो फिर यहां चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस के मन में आखिरकार किस बात का भय रहता है कि वह वाहनों की चैकिंग करते हुए भी अकसर आगे खडे हुये नजर आ जाती हैं। गोवा का पर्यटन आज के इस दौर मे बारह महीने पर्यटकों से गुलजार दिखाई देता है और उसके पीछे सिर्फ एक कारण ही माना जाता है कि वहां इंजोए करने आये पर्यटकों को जगह-जगह पुलिस का कोई खौफ देखने को नहीं मिलता? गोवा आज पर्यटन के क्षेत्र में जिस ऊचाई पर पहुंच गया है वह किसी से छिपा नहंी है इसलिए सरकार को उत्तराखण्ड के अन्दर पर्यटन को बढावा देने के लिए पर्यटक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को इंजोए करने के बजाए अगर पुलिस उन्हें अपनी चैकिंग का डर दिखायेगी तो उससे राज्य के पर्यटन को गोवा की तर्ज पर गुलजार करना असम्भव ही दिखाई देता रहेगा?

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