टॉप क्वालिटी सीएम हैं धामी

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देहरादून(संवाददाता)। वर्तमान समय में भारत के अधिकतम राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन एनडीए की सरकारें हैं। माना जाता है कि इन भाजपानीत शासित राज्यों में डबल इंजन की सरकारें काफी अच्छा काम कर रही हैं। बात कानून व्यवस्था की हो या विकास की, ये राज्यों औरों की तुलना में उन्नीस ही साबित हो रहे हैं। भाजपा या एनडीए शासित इन राज्यों में से कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जिनके मुखियाओं की लोकप्रियता पिछले कुछ समय में तेजी के साथ बढ़ी है। इन मुखियाओं में अधिकतर ऐसे हैं, जिनकों अपने राज्यों में शासन करने का भले ही लंबा चौड़ा अनुभव न हो लेकिन अपने अल्प समय के कार्यकाल में जो प्रसिद्धी इन्होंने हासिल की है, उसका मुरीद आज कल भारत का नेशनल मीडिया भी हो गया। महाराष्ट्र-झारखंड के विधानसभा चुनाव के इस दौर में अधिकतर न्यूज चस्नल सुबह शाम इन राज्यों से जुड़ी खबरें ही प्रसारित करने में लगे हुए हैं। इसी दौरान देश के प्रख्यात न्यूज चस्नल में चल रही चर्चा के मध्य एक सवाल उठा कि ऐसे कौन-कौन से मुख्यमंत्री हैं, जिनका अपने राज्य की जनता से सीधा संवाद है और वे निरंतर अपनी जनता से उनकी समस्याओं को लेकर रूबरू होते हैं तथा उसका निस्तारण करने को अपनी पहली प्राथमिकता देते हैं? इस सवाल के जवाब में देश के एक मशहूर और कालजयी पत्रकार ने तपाक से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शासित इस राज्य के मुखिया का अपनी जनता से सदैव ही सीधा संवाद रहता है। उन्होंने यहां तक भी इशारा किया कि जनता से सीधे संवाद की परंपरा को उत्तराखण्ड के बाद भाजपा और एनडीए शासित राज्यों ने भी अपनाया है। इस चर्चा से यह बात सामने आई कि उत्तराखण्ड को पुष्कर के रूप में एक टॉप क्वालिटी (उच्च गुणवत्ता) वाला मुखिया मिला है और पुष्कर की इसी गुणवत्ता का ही प्रभाव है कि आज भारत का नेशनल मीडिया भी उनकी कार्यशैली का मुरीद हो चला है तथा उनकी लोकप्रियता के कसीदे भी पढ़ रहा है। जब आप किसी दूसरे राज्य में जाते हैं, और उस राज्य के लोग आपसे यह सवाल करते हैं कि आप किस राज्य से आए हो? जिसके जवाब में आप उनसे कहते हैं कि हम उत्तराखण्ड से आएं हैं, तो दूसरे राज्य का व्यक्ति आपके राज्य की उपलब्धियों को आपके सामने ही प्रस्तुत करने लग जाए। इस एहसास खूबसूरती का अंदाजा लगाना भी आसान नहीं होता। मौजूदा समय समूचे भारत में उत्तराखण्ड की एक ऐसी छवि बन चुकी है, जो यह बताता है कि यह पहाड़ी राज्य किस तेजी के साथ विकास के पथ पर दौड़ रहा है। 24 वर्ष पुराने राज्य उत्तराखण्ड ने भले ही अपने शुरूआत के दो दशकों में काफी उतार चढ़ाव देखें हों लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि जब से राज्य की कमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई है, तब से उत्तराखण्ड के स्वरूप में अप्रत्याशित बदलाव देखे को मिला है और जोकि प्रदेश और प्रदेशवासियों के लिए काफी साकारात्मक है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में अनेकों ऐसी योजनाएं और परियोजनाएं शुरू हुई हैं, जो विकास के पथ पर मील का पत्थर साबित हो रही है। उत्तराखण्ड की जनता से सीएम पुष्कर का जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। अपने प्रदेश की जनता से मिलने के लिए उन्हें किसी लाव लश्कर की जरूरत नहीं पड़ती अपितु वह तो कभी मॉर्निंग वॉक करते-करते किसी दुकान पर आवाम से चाय पर चर्चा करते हुए मिल जाते है या फिर किसी भी समारोह में एक आम जनमानस की तरह लोगों से रूबरू होते हुए वहीं नन्हें मुन्नें बच्चों के साथ अठखेलियों करते हुए भी दिखाई दे ही जाते हैं। प्रदेश के अंदर राजनीति, विकास और जनकल्याण के मध्य जिस प्रकार से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक व्यवस्थित समन्वयय स्थापित किया है, उसी का परिणाम है कि आज उत्तराखण्ड पूरे में अपनी एक अलग पहचान बनाता हुआ नजर आ रहा है। गौरव की अनुभूति तो प्रदेशवासियों को उस समय होती है जब उनके राज्य की उपलब्धियों का गुणगान भारत की नेशनल मीडिया के दिग्गज पत्रकार करते हैं और उदाहरण के रूप में प्रदेश के मुखिया की खूबियों को देश और दुनिया के सामने रखते हैं। यहीं वजह है कि अब लोग पुष्कर ंिसंह धामी को को ‘टॉप क्वालिटी सीएमÓ की संज्ञा देने से भी नहीं चूक रहे, जिन्हे लोकप्रियता के ग्राफ में अब पूरे देश के अंदर हाई रैंकिंग प्राप्त हो रही है।

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