पुष्कर राज मंे दिखने लगा मित्र पुलिस का ‘अक्स’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के आला पुलिस अफसर खाकी और आवाम के बीच पनपती आ रही खाई को पाटने के लिए अकसर बडे-बडे दावे किया करते थे लेकिन उनके यह दावे सिर्फ मीडिया की सुर्खियों तक ही सिमट कर रह गये थे और यही कारण है कि बाइस साल तक आवाम के मन में यही नाराजगी पनपती रही कि आखिरकार राज्य में कुछ अफसर जब चंद राजनेताओं के इशारे पर लोगों के खिलाफ फर्जी मुकदमें लिखने का तांडव करते रहे है तो ऐसी पुलिस को वह कैसे मित्र मान सकते हैं? आवाम और पुलिस के बीच दिखाई देती आ रही खाई को पाटने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री एक बडी सोच के साथ आगे बडे हैं और यही कारण है कि पुष्कर राज में आवाम को अब मित्र पुलिस का अक्स देखने को मिल रहा है क्योंकिे मुख्यमंत्री की खाकी पर हमेशा पैनी नजर रहती है और यही कारण है कि अब राज्य के अन्दर फर्जी मुकदमें लिखने के खेल पर विराम लग गया है। राजधानी के पुलिस कप्तान ने अपने आवास के समीप फुटपाथ पर बैठी एक बुजुर्ग महिला को वह अपने साथ अपने आवास में ले गये जहां उन्होंने उसका थैला उठाया और उसे भोजन कराया तो यह दृश्य काफी मार्मिक दिखाई दिया और उससे आवाम के मन एक ही सोच पैदा हो रही है कि ऐसा सबकुछ सिर्फ राज्य के दयावान मुख्यमंत्री के राज में ही सम्भव है।
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी जो उत्तराखण्ड में जनसेवक बनकर सत्ता चला रहे हैं उन्होंने राज्यवासियों को भरोसा दिला रखा है कि किसी के साथ भी कोई अन्याय नहीं होगा और एक आम इंसान के लिए वह पुष्प हैं और अपराधियों और माफियाओं के लिए वह हमेशा फायर के रूप में ही दिखेंगे। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही आवाम व खाकी के बीच एक बडी खाई देखने को मिलती रही और आवाम के मन में थाने व चौकियों के अन्दर जाने का जो डर देखने को मिलता था वह किसी से छिपा नहीं है? चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उनके चंद चहेते आईपीएस अफसरों ने खाकी की मर्यादा को तार-तार करते हुए अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए काफी निर्दोष लोगों पर चंद राजनेताओं के इशारे पर फर्जी मुकदमें लिखकर उन्हें जेल भेजने का जो प्रपंच रचा था वह उत्तराखण्ड के इतिहास में हमेशा काले अध्याय के रूप में ही जाना जायेगा? पुलिस से आवाम ने इतनी दूरी बना ली थी कि पुलिस अफसर भी बार-बार चिंतित दिखाई दिये कि आखिर वह कैसे आवाम व पुलिस के बीच की दूरी को कम करें। उत्तराखण्ड में चोरी की वारदातों को देखते हुए कई बार पुलिस अफसरों ने आवाम को संदेश दिया कि अगर कोई व्यक्ति कुछ दिनों के लिए घर से बाहर जाये तो वह इसकी सूचना पुलिस को देकर जाये लेकिन आवाम ने कभी भी पुलिस अफसरों पर भरोसा नहीं किया और यही कारण है कि पुलिस और आवाम के बीच कभी खाई नहीं पट पाई। पुलिस के कुछ बडे अफसरों ने चंद राजनेताओं के इशारे पर जिस तरह से उनके विरोधियों को सबक सिखाने के लिए साजिशों का बडा खेल खेला उससे उत्तराखण्ड के अन्दर खाकी की गरिमा को भी काफी आघात लगा था? हालांकि उत्तराखण्ड के अन्दर चंद आईपीएस ऐसे भी हैं जिन्हें राज्य की जनता दिल से उन्हें हमेशा सैल्यूट करती है और उनका मानना रहता है कि अगर ऐसे अफसर आवाम के बीच पद पर रहेंगे तो आवाम उनकी हर बात का अनुसरण करेगी और पुलिस व आवाम के बीच की खाई जरूर दूर होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने जबसे सत्ता संभाली है तबसे उन्होंने साफ संदेश दे रखा है कि पुलिस अफसर और पुलिस कर्मचारी ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाहन करें और एक आम इंसान के साथ वह मित्रता निभायें और अपराधियों को वह अपनी खाकी का इकबाल दिखायें। बीते रोज राजधानी के पुलिस कप्तान दलीप कुवर का एक मानवीय चेहरा आवाम के सामने आया है तो इसके पीछे राज्य के दयावान बन चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ही प्रेरणा मानी जा रही है और यह साफ दिख रहा है कि अब पुलिस उस रास्ते पर चल निकली है जहां आवाम उसे मित्र पुलिस कहने से नहीं हिचकेगा?

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