देहरादून(नगर संवाददाता)। उत्तराखण्ड क्रांति दल के निष्कासित पूर्व पदाधिकारियों ने दल से अपने निष्कासन को असंवैधानिक करार दिया है और वहीं दूसरी ओर उन्होंने मोर्चा खोलते हुए आगामी 24-25 जुलाई को मसूरी में खुला द्विवार्षिक अधिवेशन किये जाने का ऐलान किया है और कहा कि दल चंद लोगों की बपौती नहीं है। उनका कहना है कि दल को बचाने की आज आवश्यकता है और इसके लिए ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पूर्व केन्द्रीय महामंत्री एवं निष्कासित जय प्रकाश उपाध्याय ने कहा है कि आज दल को बचाने की आवश्यकता है और इसके लिए वह जनता की अदालत में जा रहे है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि दल के केन्द्रीय अध्यक्ष के पद से उनका कोई लेना देना नहीं है और वह दल से सच्चे सिपाही के रूप में काम करते रहेंगें। उन्होंने अपने निष्कासन को असंवैधानिक करार दिया है जिसका विरोध किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के संविधान में वर्णित नियमों प्रावधानों और भारतीय संविधान में लिखित लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत दल के वरिष्ठ नेता रहे निष्कासित जय प्रकाश उपाध्याय के नेतृत्व में उनकी अध्यक्षता में दल का खुला द्विवार्षिक महाधिवेशन 24-25 जुलाई 2०23 को मसूरी देहरादून में किया जाना सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने कहा कि जिसमें नई कार्यकारणी का गठन किया जाना प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि इस महाधिवेशन को सफल बनाने के लिए देवेन्द्र कण्डवाल को संरक्षक बनाया गया है मातृशक्ति की प्रतीक दल की वरिष्ठ नेत्री राज्य आन्दोलनकारी प्रमिला रावत (एडवोकेट) को महाधिवेशन के लिए मुख्य संयोजक बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि दल के वर्तमान संविधान वर्णित समस्त पदों पर चयन, चुनाव होंगें। उन्होंने कहा कि दल के संविधान में आवश्य शब्दों को घटाया अथवा बढ़ाये जाने का प्रस्ताव लाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दल का वर्तमान संविधान में कई खामियां नजर आ रही है संविधान की पुन: समिक्षा कर सुलभ-सरल एवं ठोस रूप लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दल के पदाधिकारियों के चयन व चुनाव एवं कर्तव्यों के लिए संविधान में विशेष प्रावधान किया जायेगा।
इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता प्रमिला रावत ने कहा है कि वर्तमान में दल में धन का जबरदस्त दुरुप्रयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसको रोकने के लिए भारतीय संविधान में वर्णित जन-धन दुरुप्रयोग अधिनियम के तहत दुरुप्रयोग करने वालों के खिलाफ ठोस न्यायिक कार्यवाही की संस्तुति की जायेगी।
उन्होंने कहा कि द्विवार्षिक महाधिवेशन में राज्यहित के लिए आगामी दो वर्षों के लिए जन-संघर्ष के प्रस्ताव लाये जायेंगें। इस अवसर पर शकुन्तला रावत ने कहा कि आज दल को बचाने की जरूरत है इसके लिए वह अपने निष्कासन के लिए कोर्ट नहीं बल्कि जनता की अदालत में जायेंगें और वहीं से इसका निपटारा हो सकेगा। इस अवसर पर देवेन्द्र कंडवाल, जबर सिंह पावेल आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वार्ता में जय प्रकाश उपाध्याय, देवेन्द्र कंडवाल, प्रमिला रावत, शकुन्तला रावत, जबर सिंह पावेल आदि शामिल रहे।