देहरादून(नगर संवाददाता)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ कांग्रेस उपाध्यक्ष मथुरादत्त जोशी ने आयरन फोर्टीफाइड चावल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आयरन फोर्टीफाइड चावल का देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असफल पायलट प्रोजेक्ट चला रहे है उससे लगातार एनिमिया व मधुमेह की बीमारियां बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार फोर्टिफाइड चावल के रूप में देश की 8० करोड़ जनता को जहर परोस रही है। उन्होंने कहा कि यह फोर्टीफाइड चावल लगातार मिड डे मिल में थोपा जा रहा है जिसे सहन नहीं किया जायेगा और इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया जायेगा।
यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि आयरन फोर्टीफाइड चावल के नाम से आर्टिफिशियल चावल बनाने का केन्द्र सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2०21 को प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल चावल की घोषणा की थी और नीति आयोग ने चावल के वितरण पर आपत्ति जताई कि यह पूर्ण मिनिरल चावल में मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने भी इस मामले पर उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार फोर्टीफाइड चावल पर भी संदेह है और इस चावल में 2० एमजी आयरन मौजूद है और उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अपील है कि चावल की विस्तृत जांच हो। उन्होंने कहा कि कुपोषण को खत्म करने की बात करने वाली केन्द्र सरकार लोगों को बीमार करने की कोशिश कर रही है और सोच समझ कर निर्णय सरकार को लेना होगा।
उन्होंने कहा कि 8० करोड़ जनता को जहर बांटने का काम केन्द्र सरकार कर रही है जिसे किसी भी दशा में सहन नहीं किया जायेगा। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा है कि केन्द्र सरकार नेखाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत फोर्टिफाइड चावल क्यों शुरू किया और क्या केन्द्र की मोदी सरकार कि सी विदेशी संगठन से आसक्त हो गई थी या इसमें कोई निहित स्वार्थ शामिल है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2०21 को लाल किले की प्राचीर सेपीएम मोदी ने एक असामान्य घोषणा की गरीब महिलाओं, गरीब बच्चों में कुपोषण और जरूरी पौष्टिक पदार्थों की कमी, उनके विकास में बड़ी बाधा बनती है। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए यह तय कि या गया है कि सरकार अपनी अलग-अलग योजनाओं के तहत जो चावल गरीबों को देती है, उसेवितजपलि करेगी। गरीबों को पोषणयुक्त चावल देगी। उन्होंने कहा कि राशन की दुकान पर मिलने वाला चावल हो, मिड डे मील में बालकों को मिलने वाला चावल हो, वर्ष 2०24 तक हर योजना के माध्यम से मिलने वाला चावल वितरित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसका क्या सन्दर्भ है और कैसे पर्दे के पीछे चीजें सामने आईं घोषणा के तीन दिन बाद, नीति आयोग के अधिकारियों ने चावल के फोर्टिफिकेशन को सार्वभौमिक बनाने के लिए एक योजना तैयार करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि 29 नवंबर 2०21 को एक फाइल नोटिंग में नीति आयोग के कृषि सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों ने बच्चों के स्वास्थ्य पर आयरन फोर्टिफाइड चावल के प्रति कूल प्रभाव के बारे में गंभीर चि तं ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा िक डीजी (इंडियन काउंसिल फॉर मेडि कल रिसर्च) द्वारा भी इसका उल्लेख कि या गया था और इसलिए इसे आगे बढ़ाने से पहले मानव स्वास्थ्य पर चावल के फोर्टिफिकेशन के प्रभाव पर वि शषे ज्ञों की एक विस्तृत श्रंखला के साथ परामर्श की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में, इस तरह का हस्तक्षेप अल्पावधि के लिए ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह था कि यहांतक कि आईसीएमआर जो की भारत के प्रमुख चि कित्सा अनुसंधान केंद्र है, उसको भी पीडीएस के तहत फोर्टिफाइड चावल को रोल आउट करने की प्रभावशीलता के बारेमेंगंभीर संदेह था। उन्होंने कहा कि पोषण पर नीति आयोग के राष्ट्रीय तकनीकी बोर्ड की सदस्य, प्रोफेसर डॉ. अनुरा कुरपड ने उन बच्चों में सीरम फेरिटिन के स्तर मेंवृद्धि देखी, जिन्हें आयरन-फोर्टिफाइड चावल दिया गया था।
सीरम फेरिटिन मधुमेह के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। डॉ कुरपड सार्वजनिक रूप से आयरन-फोर्टिफाइड चावल के जोखिमों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं। उनका कहना है कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मोदी सरकार खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राष्ट्रव्यापी पीडीएस में जिस फोर्टि फाइड चावल की भूमि का निभा रही है, उसमें 2० एमजी आयरन है। यह चावल हानिकारक है और इसका प्रयोग किसी भी दशा में नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कम से कम 6 संगठनों का इस्तेमाल किया जो यह सुनिश्चित करने के लिए जुड़ा हुआ था कि उनके पास भारत के प्रीमिक्स बाजार मेंकम सेकम 17 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि तो केन्द्र की मोदी सरकार ने इसे कैसे सुगम बनाया। इस अवसर पर वार्ता में मथुरा दत्त जोशी, गरिमा दसौनी, लक्ष्मी कपरूवान अग्रवाल, अमरजीत सिंह, शीशपाल सिंह बिष्ट, आशीष सैनी आदि शामिल रहे।