खस्ताहाल पैदल मार्ग पर कैसे चले यात्री?

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उत्तरकाशी(चिरंजीव सेमवाल)। उत्तराखंड चारधाम यात्रा का प्रथम धाम यमुनोत्री की डगर आसान नहीं है। जानकीचट्टी के आगे पांच किलोमीटर का पैदल मार्ग कइ स्थानों पर खस्ताहाल है। आलम यहां है कि एक दिन में हजारों घोड़े – खच्चरों के आवागमन से मार्ग पर गहरे -गहरे गढ़े हो रहे जिससे पैदल आने जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए खतरे से खाली नहीं।
इधर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता महावीर पंवार के ने बताया कि यमुनोत्री धाम के लिए वैकल्पिक मार्ग भंडेली गाड़ से वन विभाग के रास्ते पुराना भैरव मंदिर होते हुए यमुनोत्री में बाय पास वन वे संचालित किया जा रहा उसमें आज इस मार्ग की स्थिति बेहद खराब है !, घोड़े खच्चर चालकों के अनुसर पैदल मार्ग अनेक स्थानों पर बहुत ही खतरनाक और बड़े बड़े स्टेप सीढिय़ां हैं, खाई टाइप से बनी हुई गहरे गढ़े नाली की तरह जिनकी वजह से कई घोड़े खच्चर तो चढऩे में ही हांपने लगते हैं और कई यात्री गिरते हैं और चोटिल भी हो जाते हैं, और ऊपर से कीचड़ ही कीचड़ से पूरा रास्ता पैर रखने लायक नहीं है, यात्रा व्यवस्था बनाने के लिए तो यह मार्ग सही है, लेकिन इस मार्ग की संबंधित विभाग द्वारा या सरकार द्वारा तत्काल मरम्मत कार्य नहीं करवाया जाता है तो कोई अनहोनी होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। महावीर पंवार माहि का कहना है कि साफ सफाई प्रति दो दिन बाद अवश्य होनी चाहिए जिससे कीचड़ न बने, रास्ते में यदि अच्छे से सीढिय़ों को छोटा छोटा बनाकर और गड्ढों को आरसीसी सीमेंट कांक्रीट से बनाया जाए तो और बेहतर होगा।

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