विकासनगर(संवाददाता)। हैरानी वाली बात है कि सहसपुर में संजीवनी रिजॉर्ट के संचालक को आखिरकार किसने अपना संरक्षण दे रखा है कि वह अपने रिजॉर्ट में जुए के अड्डे से लेकर रेव पार्टी में अय्याशी और नशे का खुला धंधा कराने से भी नहीं डरा और दो बार इस रिजॉर्ट में गुनाहों का जो खेल होता रहा और पुलिस ने उस खेल को मजबूरी में बेनकाब तो किया लेकिन तमाम पुलिस फोर्स के बावजूद कैसे रिजॉर्ट का संचालक और लडकियों का दलाल वहां से फरार हो गया इसकी अगर पुलिस के आला अफसर बडी जांच कराने के लिए आगे आयें तो उन्हें शायद इस बात का आभास हो जायेगा कि पुलिस के कुछ लोग किस तरह से इस रिजॉर्ट को अपना पर्दे के पीछे रहकर खुला संरक्षण दे रहे थे? गजब बात है कि एक रिजॉर्ट में बार-बार गुनाह हो रहे हैं और न तो उस गुनाह को देखते हुए सिस्टम रिजॉर्ट पर बडी कार्यवाही करने के लिए आगे आ रहा है और न ही अभी तक रिजॉर्ट के संचालक और दलाल पर कोई ईनाम घोषित करने की पहल की गई जिससे पुलिस महकमें की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगते हुए दिखाई दे रहे हैं? अगर रिजॉर्ट के संचालक को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है तो इस बात में भी कोई शक नहीं वहां होने वाले हर गुनाह के राजदार भी पुलिस के कुछ कर्मचारी जरूर होंगे जिनके चेहरे आखिर कौन बेनकाब करेगा यह एक बडा सवाल खडा हो रखा है?
गौरतलब है कि सहसपुर के संजीवनी रिजॉर्ट में गुप्त सूचना के बाद पुलिस टीमों ने वहां बडी कार्यवाही करते हुए जिस तरह से रेव पार्टी में नशे और अय्याशी के खेल को नेस्तनाबूत किया तो फिर वो कौन महकमें का लंका भेदी था जिसने रिजॉर्ट के संचालक और चंडीगढ से लाई लडकियों के दलाल को भगाने के लिए उनके लिए मुखबरी का खेल खेला था? हैरानी वाली बात है कि बार-बार संजीवनी रिजॉर्ट में अवैध धंधे हो रहे हैं लेकिन रिजॉर्ट को सील कर उसके संचालक के खिलाफ बडी कार्यवाही करने का पुलिस महकमा क्यों साहस नहीं कर पाता यह उसकी मंशा पर बडा सवाल खडा कर रहा है? सवाल यह भी खडा हो रहा है कि अभी तक पुलिस के हाथ गुनाहगारों की गिरेबॉ तक क्यों नहीं पहुंच पाये? क्यों अब तक इनके ऊपर ईनाम घोषित नहीं किया गया? क्यों अब तक इस रिजॉर्ट को सील करने की दिशा में सिस्टम ने अपनी सख्ती नहीं दिखाई? ऐसे में उत्तराखण्ड की राजधानी में कैसे अवैध धंधे करने वालों पर नकेल लग पायेगी यह अपने आपमें कई सवाल खडे कर रहा है?
सहसपुर विधानसभा के होरावाला गांव में संजीवनी रिजॉर्ट में एसएसपी देहरादून के निर्देश पर अनैतिक देह व्यापार और मादक पदार्थों की तस्करी मामले में अभी तक रिजॉर्ट के संचालक अमित गर्ग व संजय फरार है फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है उक्त प्रकरण में पुलिस ने संजीवनी रिजॉर्ट से पंद्रह युवतियों को बरामद किया था जिन्हे रिजॉर्ट संचालक अमित गर्ग व संजय के द्वारा डांस करने के लिए बुलाया था पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ था कि रिजॉर्ट में लड़कियों को काम दिलाने के बहाने बुलाया जाता है और बाद में उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता है संजीवनी रिजॉर्ट में दिल्ली हरियाणा चंडीगढ़ पंजाब आदि राज्यों से लड़कियों को बुलाया जाता था और उनसे जबरन देह व्यापार कराया जाता था साथ ही रिजॉर्ट में अवैध नशा भी ग्राहकों को परोसा जाता था पूर्व में भी संजीवनी रिजॉर्ट में बड़े पैमाने पर जुआ खिलाने का खुलासा हुआ था उस दौरान बाहरी राज्यों के कई अपराधिक किस्म के व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था बावजूद इसके उस दौरान भी रिजॉर्ट को सीज नही किया था और संचालक तब भी बच निकला था देह व्यापार और मादक पदार्थ बरामद होने के बाद से ही संचालक व एक अन्य फरार है तो वही उक्त प्रकरण की विवेचना विकासनगर कोतवाल शंकर सिंह बिष्ट को सौंपी गई है उनका कहना है कि छापे की कार्यवाही के बाद से ही थानाध्यक्ष सहसपुर गिरिश नेगी द्वारा संजीवनी रिजॉर्ट को सील किया है जिससे कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ ना की जा सके। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार जब संजीवनी रिजॉर्ट में देश के कुछ राज्यों से आये बडे जुआरियों को वहां दबोचा गया था तो उस समय भी वहां का जो नजारा था उसे देखकर यह सवाल खडे हो रहे थे कि क्या इलाके का पुलिस महकमा घृतराष्ट्र था कि उसे इस बात का पता ही नहीं चला कि वहां क्या-क्या गुनाह हो रहे हैं? जुआरियों के पकडे जाने के बाद भी इस रिजॉर्ट पर कार्यवाही न होने से सिस्टम पर सवाल खडे हुये थे और अब जब वहां अय्याशी और नशे का जो काला खेल देखने को मिला उसे देखकर यह सवाल खडे हो गये कि आखिरकार इस रिजॉर्ट के संचालक पर आखिरकार किसकी दया बनी हुई है जिसके चलते उसके रिजॉर्ट पर बडी कार्यवाही करने के लिए सिस्टम आगे ही नहीं आया? अगर रिजॉर्ट संचालक के मोबाइल फोन को खंगालने के लिए पुलिस के आला अफसर अगर आगे आये तो उन्हें यह भी दिखाई दे सकता है कि पुलिस के कुछ लोग शायद पर्दे के पीछे रहकर रिजॉर्ट के संचालक के हमराज बने हुये थे?