अवैध खनन का ‘खौफनाक खेल’

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कोई नहीं रोक सका काले सोने की चोरी
बदमाशों की तर्ज पर माफिया मचा रहे तांडव
‘क्राईम स्टोरी’ लगातार खोल रहा है खनन माफियाओं की पोल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य, विकास की नई ऊंचाईयों को छू रहा है। आए दिन सरकार राज्य की जनता के सामने अपने विकास को लेकर उन्हें यकीन दिला रही है कि उत्तराखण्ड विकास की राह पर किस तेजी से आगे बढ रहा हैै। हालांकि विकास की जो छवि जनता को दिखाई जा रही है, वह हकीकत से कितना इत्तफाक रखती है यह कहना बहुत मुश्किल है? उत्तराखण्ड का निर्माण हुए दो दशक से अधिक का समय बीत चुका लेकिन कुछ दुश्वारियों आज भी जस की तस बनी हुई है। अगर इन दुश्वारियों को रैंक के हिसाब से पिरोया जाए तो पहला स्थान अवैध खनन को ही हासिल होगा। राज्य निर्माण के बाद से आज तक न जाने कितनी सरकारें आई और कितनी सरकारें गई लेकिन कोई भी सरकार अवैध खनन के गोरखधंधे को पूर्ण रूप से रोकने में सफल नहीं हो पाई। हां, इतना जरूर है कि जब कभी भी विभागीय अधिकारियों पर दबाव पड़ता है तो उनकी टीमें जरूर अवैध खनन से भरी कुछ गाड़ियों को पकड़कर यह जताने से पीछे नहीं हटती कि उन्होंने अवैध खनन पर कितनी बड़ी कार्रवाई की है। राज्य में अवैध खनन के काले कारोबार का फैलाव एक वायरस की तरह हो रहा जोकि धीरे-धीरे प्राकृतिक स्रोत से बहने वाली नदियों की हस्ती को मिटाने का कार्य कर रहा है। मौजूदा समय में तो आलम यह है कि अवैध खनन का खेल अब खौफनाक हो गया है। खनन माफिया बदमाशों की तर्ज पर तांडव मचाते हुए नजर आ रहे है। बेलगामी और बेखौफी का आलम तो यह है कि यह खनन माफिया किसी भी पुलिसकर्मी या किसी आम आदमी पर खनन के वाहन चढ़ाने से भी पीछे नहीं हट रहे है? सरकार के खनन विभाग से लेकर उत्तराखण्ड पुलिस के आला अधिकारियों के पास दबंग कर्मचारियों की अच्छी खासी फौज मौजूद है लेकिन बावजूद इसके वे लगातार खुलेआम हो रही काले सोने की चोरी को रोकने में उनकी नाकामी किसी से छिपी नहीं है। ‘क्राईम स्टोरी’ लगातार खनन माफियाओं की पोल खोलता आ रहा है लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि न तो पुलिस और न ही खनन विभाग इसके खिलाफ कोई एक्शन लेने में रूचि दिखाते हुए नजर आते है? हां, अब इतना जरूर है कि दो दिन पूर्व कैंट कोतवाली क्षेत्र में हुई घटना के बाद पुलिस जरूर हरकत में आई है। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस तभी नींद से जागी जब उसके एक कर्मचारी पर हमला हुआ जबकि खनन माफिया तो लगातार नदियों का सीना चीर कर वहां से सरकार का काला सोना चुरा रहे है?
सफेदपोशों और खनन माफियाओं के गठजोड़ की चर्चाएं उत्तराखण्ड में आम है। राज्य के किसी भी जनपद में जब भी अवैध खनन का मुद्दा प्रकाश में आया है तो उस गोरखधंधे को अंजाम देने वाले माफियाओं के साथ किसी न किसी सफेदपोश का भी धीमें से उठा ही है? यही वह गठजोड़ है जिसके चलते विकास की राह पर अग्रसर राज्य उत्तराखण्ड आज तक अवैध खनन के दानव से मुक्ति नहीं पा सका है। खनन माफियाओं के हौसलें अब इतने बुलंद हो चुके है कि वह जो काम छिपते छिपाते करते थे उसे अब वह बेखौफ होकर खुलेआम कर रहे है और तो और यदि कोई उनके रास्ते का रोड़ा बनने की कोशिश करता है तो वह उसे रास्ते से हटाने के लिए भी तैयार रहते है। बता दें कि कैंट कोतवाली से कुछ किलोमीटर दूरी पर जैंतनवाला के समीप एक खनन माफिया ने कैंट कोतवाली के पुलिसकर्मी के ऊपर खनन सामग्री से भरा ट्रैक्टर चढ़ा दिया था। बताया जा रहा है कि इस घटना की गूंज सीएम दरबार तक जा पंहुची और मुख्यमंत्री ने स्वयं इसका संज्ञान लेते इस घटना पर कड़ी नारजगी जताई और पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार को दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डीजीपी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दलीप सिंह कुंवर को घटना में शामिल चारों आरोपित भाइयों को तत्काल गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। वहीं, डीजीपी के आदेश पर कैंट कोतवाली निरीक्षक विनय कुमार को लाइन-हाजिर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर-ट्राली चढ़ाने के आरोपित ट्रैक्टर चालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उसके तीन भाइयों को तलाश रही है। चारों भाइयों पर अवैध खनन करने और सिपाही पर ट्रैक्टर ट्राली चढ़ाने का आरोप है। चारों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मात्र दो दिन के भीतर पुलिस के आला अधिकारियों ने जिस तेजी के साथ इस घटना में खुलासों को लेकर जो फुर्ती दिखाई है अगर ऐसी ही फुर्ती वे समूचे राज्य में चल रहा अवैध खनन के खिलाफ दिखा दें तो खनन माफियाओं के दिल में भी उनका डर स्थापित होगा लेकिन ऐसा कभी संभव हो पाएगा, इस सवाल को जवाब तो भविष्य के गर्भ में ही कैद है?

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