अदृश्य बन गया हाकम का हाकिम?

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देहरादून। उत्तराखण्ड में एक सफेदपोश इतना पॉवरफुल कैसे बन गया कि वह सरकारी नौकरियां बेचने का इतना बडा खिलाडी बना रहा कि उस पर किसी की निगाह भी नहीं गई और वह कई राजनेताओं और अफसरांे का भी दुलारा बनने के खेल में सफल होता रहा। पुष्कर सिंह धामी के सख्त रूख के चलते यूकेएसएसएससी से कई भर्तियांे मंे फर्जीवाडे का खेल एसटीएफ ने बेनकाब तो किया लेकिन सरकारियां नौकरियां बेचकर युवा पीढी के साथ खिलवाड करने वाले हाकिम सिंह के सीने में छिपे उन राजों को वह बाहर नहीं निकाल पाई जिसके सामने आने पर उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडा तूफान मच सकता था? भर्तियों की जांच में जिस तरह से बडा खेल सामने आया उसे बेनकाब करने में एसटीएफ का रोल सिर्फ इतना जरूर दिखाई दिया कि वह भर्तियांे के गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचाती रही लेकिन इन भर्तियों में पेपर लीक और साजिश का तानाबाना कहां और कौन-कौन लोग बुना करते थे यह आज तक शायद राज ही बनकर रह गया? नौकरियों का सौदागर हाकम सिंह इतना बडा कैसे हो गया कि वह अकेला ही नौकरियां बेचने का किंग मेकर बना रहा यह सवाल आज भी राज्य के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और यह बात भी उठ रही है कि हाकम सिंह का हाकिम क्या कोई अदृश्य शक्ति थी जिस तक एसटीएफ के हाथ नहीं पहुंच पाये?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड सरकारों को हमेशा चुनौती देता आया नौकरियों के सौदागर हाकम सिंह रावत को एसटीएफ ने गिरफ्तार करने का साहस तो दिखाया था लेकिन हाकम सिंह रावत के सीने में दफन सैकडों राज एसटीएफ पता नहीं लगा पाई जिसके चलते बार-बार उत्तराखण्ड के गलियारों में हर तरफ एक ही शोर मच रहा है कि आखिर हाकम सिंह का हाकिम कौन है जिसे आज तक एसटीएफ खोज ही नहीं पाई? सवाल यह भी उठे थे कि एसटीएफ के पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिससे वह हाकम सिंह को लम्बे समय तक सजा दिलाने में सफल हो सके क्योंकि पुलिस कस्टडी रिमांड पर उससे जो राज पता लगाये होंगे वह अदालत में कितने ठहर पायेंगे यह तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन राज्य बनने के बाद से इक्कीस सालों तक वह जिस तरह से दौलत लेकर युवाओं को नौकरियां बांटता रहा वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए बडा घातक ही साबित हो रहा है। एक अकेला हाकम सिंह क्या सरकारों से इतना बडा था कि वह हर भर्तियों में खेल खेलकर युवाओं को नौकरी बेचता रहा? एसटीएफ ने जिस हल्केपन से इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अपने कदम आगे बढाये हैं वह आवाम को आज भी रास नहीं आ रहा है और उनका कहना है कि यह घोटाला इतना बडा है कि सीबीआई के अलावा कोई भी एजेंसी इस भर्ती घोटाले का सच बाहर नहीं ला सकती? एसटीएफ अगर हाकिम के हाकिम तक पहुंचने का साहस दिखाती तो वह हाकिम सिंह रावत का पोलियोग्राफ टेस्ट या नारको टेस्ट कराने के लिए जरूर आगे आती लेकिन उसने हाकम सिंह का पोलियोग्राफ टेस्ट कराने की दिशा में कोई पहल की हो ऐसा देखने को भी नहीं मिला है? उत्तराखण्ड के गलियारों में यह शोर सुनाई दे रहा है कि एसटीएफ ने भले ही भर्ती घोटालों को लेकर 50 से ज्यादा लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया हो लेकिन इस घोटाले के मास्टर माइंड के तार किस किस सफेदपोश और अफसरों से जुडे हुये थे इसका सच वह बाहर नहीं ला पाई क्योंकि हाकम सिंह रावत के अफसरों और राजनेताओं से इतने गहरे सम्बन्ध हैं कि अगर एसटीएफ उनका खुलासा करने का साहस दिखाती तो राज्य में एक नया भूचाल मच जाता? इसीलिए एसटीएफ ने सिर्फ अपनी जांच को सिर्फ घोटाले तक ही सीमित रखा और यह पता लगाने की कोशिश नहीं कि की हाकिम सिंह रावत का हाकिम आखिर उत्तराखण्ड में कौन-कौन है? उत्तराखण्ड की युवा पीढी को इक्कीस सालों से जो हाकम सिंह दर्द देता आ रहा है उस हाकिम के हर राज बेनकाब होने चाहिए थे क्योंकि सिर्फ जेल भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री करने से एसटीएफ की पीठ नहीं थपथपाई जा सकती और हाकम सिंह रावत का गुनाह इतना बडा है कि उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है क्योंकि उसने जिस तरह से नौकरियां बेचकर अपने आपको राज्य के अन्दर अफसरशाही और राजनेताओं को जिस तरह से अपने पॉवरफुल होने का एहसास कराया था वह काफी हैरान करने जैसा ही आज तक दिखाई देता है? भर्ती प्रकरण में एक के बाद एक जेल से बाहर आ रहे हैं लेकिन आज भी राज्य के अन्दर एक सवाल तैर रहा है कि आखिर हाकम सिंह का हाकिम क्या अदृश्य शक्ति है जिस तक एसटीएफ के हाथ नहीं पहुंच पाये?

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