उत्तराखण्ड के लिए घातक बना दरोगा भर्ती घोटाला?

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटाले किस कदर अपनी जडें जमा चुके हैं यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जिस तरह से हरीश रावत राज में दरोगा भर्ती पर उंगलियां उठी तो उसके बाद उसकी जांच का मिशन शुरू हुआ तो अभी तक बीस संदिग्ध दरोगा चिन्हित हुयेे जिन्हें निलम्बित कर दिया गया और ऐसी भी आशंका है कि यह संख्या काफी बढ सकती है जिसको लेकर पुलिस मुख्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठने शुरू हो गये हैं? हरदा राज में दरोगा भर्ती में घोटाले का जो जिन्न बोतल से बाहर निकला है उससे हरदा भी युवाओं के निशाने पर आ गये हैं? अब बहस छिड गई है कि यह घोटाला पुलिस महकमें का है इसलिए इस पूरे घोटाले को बेनकाब करने के लिए सरकार को विजिलेंस से नहीं बल्कि सीबीआई से इसकी जांच करानी चाहिए जैसी जांच राज्य बनने के बाद दरोगा भर्ती घोटाले में हुई थी और उसका सारा सच बेनकाब हो गया था? अब खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की है जिसमें उन्होंने लिखा है कि 2015 में दरोगा भर्ती कांड के समय मुख्यमंत्री कौन था? वही तो नहीं जो लोगों को कोदा-झंगोरा खाकर कुपोषण से लडने की सलाह देते हैं? दरोगा भर्ती घोटाला सामने आने के बाद यह बहस भी छिड गई है कि सिर्फ दरोगाओं पर कार्यवाही कर यह मामला खत्म नहीं होना चाहिए क्योंकि उन चेहरों को भी बेनकाब कर राज्य की जनता के सामने लाना चाहिए जिन्होंने इस दरोगा भर्ती घोटाले में पर्दे के पीछे रहकर भ्रष्टाचार का खेल खेला था?

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