जमीन की धोखाधडी मामले में सुधीर विंडलास के ठिकानों पर सीबीआई के छापे

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी के उद्यमी व बिल्डर सुधीर विंडलास के ठिकानों पर सीबीआई की कुछ टीमों ने आज छापेमारी का ऑपरेशन शुरू किया और वहां उन्होंने सर्च ऑपरेशन चलाकर कारोबारी के दस्तावेज खंगालने के लिए डेरा डाला। बिल्डर के ठिकानों पर सीबीआई के छापों की खबर राजधानी मंे आग की तरह फैल गई और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि सीबीआई का अगला कदम क्या होगा।
मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह सीबीआई की लगभग चार टीमें राजधानी के उद्यमी व बिल्डर सुधीर विंडलास के घर और कारोबारी ठिकानों पर सर्च अभियान के लिए पहुंची और उनके इस ऑपरेशन से राजधानी के अन्दर एक बडी हलचल मच गई। सीबीआई का यह ऑपरेशन दोपहर में भी चल रहा था और यह बात उठ रही थी कि आखिरकार सीबीआई को अब तक की छापेमारी में क्या-क्या मिला है। चर्चा यहां तक है कि सीबीआई के हाथ कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिली हैं लेकिन उनका ऑपरेशन मीडिया से दूरी बनाये हुये है इसलिए सीबीआई का अधिकारिक कोई बयान सामने नहीं आया कि उनके इस छापे में उन्हें क्या जानकारियां मिली हैं। सुधीर विंडलास के ठिकानों पर छापेमारी की खबर से यह आशंकायें भी उठ रही थी कि सीबीआई उन पर अपना शिकंजा कस सकती है। उल्लेखनीय है कि सुधीर विंडलास के खिलाफ राजपुर थाने में धोखाधडी के कुछ मामले दर्ज हो रखे हैं और सुधीर विंडलास के खिलाफ पुलिस विभाग द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाने पर संजय सिंह नामक व्यक्ति ने उच्च न्यायालय नैनीताल में याचिका दाखिल की थी कि इस मामले में किसी सेंट्रल एजेंसी से जांच कराई जाये क्योंकि पुलिस की जांच पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है यह मामला उच्च न्यायालय में अभी चल ही रहा था कि संजय सिंह ने सुधीर विंडलास के खिलाफ सीबीआई जांच कराने के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। मामला काफी गंभीर होने के कारण राज्य सरकार ने सुधीर विंडलास पर दर्ज धोखाधडी मामलों की जांच सीबीआई से कराये जाने को लेकर केन्द्र सरकार को पत्र लिखा था जिसके बाद से यह भी सम्भावनायें तेज हो गई थी कि केन्द्र सरकार कभी भी इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप सकती है जिसके चलते इस मामले का सारा सच सामने आ जाये। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरूआती दौर में ही साफ कह दिया था कि वह राज्य में किसी को भी भू-माफियागिरी नहीं करने देंगे चाहे कोई कितना भी बडा व्यक्ति क्यों न हो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। संजय सिंह ने मुख्यमंत्री को जो शिकायती पत्र में शिकायत की थी उसमें कहा था कि उनकी जोडी गांव मंे बीस बीद्या जमीन है और यह जमीन उनके, उनके भाई व माता के नाम है और सबके नाम पर रजिस्ट्री है। संजय सिंह से जब इस बारे में सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि 2010 में सुधीर विंडलास ने अपने कर्मचारियों को नकली नाम देकर रजिस्ट्रार विभाग में खडा किया और सुधीर विंडलास के परचेज मैनेजर रवि दयाल के नाम सुधीर विंडलास के कर्मचारियों ने फर्जी रजिस्ट्री कर दी थी लेकिन 2015 में सुधीर विंडलास ने यह रजिस्ट्री कैंसल करा दी थी। संजय सिंह ने बताया कि 2021 में फिर सुधीर विंडलास ने इस जमीन की रजिस्ट्री करा ली। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह जमीन मालती देवी, किरती वर्मा और उषा गुप्ता से खरीदी थी जिन्होंने यह जमीन गंग बहादुर से खरीद रखी थी लेकिन गंग बहादुर के मरने के बाद सुधीर विंडलास ने गंग बहादुर के परिजनों को लालच देकर दोबारा उनसे रजिस्ट्री करा ली थी। संजय सिंह ने बताया कि इस जमीन को लेकर सुधीर विंडलास दो बार फर्जीवाडा कर चुके हैं और यहां तक बताया कि तीन बार प्रशासन के आदेश पर उन्होंने जमीन में बाउंड्री वॉल की थी लेकिन सुधीर विंडलास ने हर बार बाउंड्री वॉल तोड दी थी। इस फर्जीवाडे में रजिस्ट्रार ऑफिस की मिलीभगत की भी आशंकायें उठ रही हैं उसी के चलते यह मामला काफी गर्माया हुआ है और यह साफ है कि इस मामले में अब सीबीआई अपनी जांच को तेजी के साथ आगे बढाकर हर उस सच को सामने ले आयेगी जो वर्षों से सामने नहीं आ पा रहा था। इस मामले में जब सुधीर विंडलास से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।

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