प्रमुख संवाददाता
देहरादून। चमोली के जोशीमठ में जब दरारों से आवाम डरने और सहमने लगा तो उत्तराखण्ड से लेकर देशभर की निगाहें जोशीमठ पर जा टिकी कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि जोशीमठ के होटल, घर और सडकों में बडी-बडी दरारें आ गई और उससे वहां रहने वाले हजारांे परिवारों के सामने अपने आशियाने बचाने का बडा संकट आकर खडा हो गया। जोशीमठ में भूधसाव के चलते वहां आये भीषण संकट को देखते हुए असामाजिक तत्वों ने अफवाहें फैलाकर सरकार को निशाने पर लेने का जो कुचक्र रचा उससे जोशीमठवासियांे में एक बडा डर देखने को मिला। जोशीमठ को लेकर चल रही अफवाहों को खामोश करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला और वह जोशीमठ में वह अंगद की तरह खडे हुये और उन्होंने वहां आपदा पीडितों को जिस तरह से गले लगाकर उन्हें वचन दिया कि सरकार इस संकट की घडी में उनके साथ खडी है और किसी के भी आशियाने नहीं तोडे जायेंगे इसलिए किसी को भी अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है इसके साथ ही जोशीमठवासियांे को यह वचन भी दिया कि सरकार उन्हें बाजार भाव पर मुआवजा देगी और अपने इस वचन को उन्होंने कैबिनेट की बैठक में लाकर जोशीमठवासियांे के मन में मुआवजे को लेकर चली आ रही शंका भी दूर हो गई। जोशीमठ को बचाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने एक बडे विजन के तहत अपनी टीम को जिस तरह से वहां मैदान में उतार रखा है और आपदा पीडितों को रिलीफ सेंटर में ठहराने, खाने-पीने की व्यवस्था के साथ वहां अलाव का प्रबन्ध किया है उससे साफ नजर आ रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री की सफल रणनीति के चलते अब जोशीमठ शांत हो गया है और वहां के नागरिकों का दर्द भी धीरे-धीरे कम हो चला है क्योंकि उन्हें इस बात का आभास हो गया है कि जोशीमठ के इस संकट में देश के प्रधानमंत्री उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के साथ खडे हुये हैं और यकीन है कि सरकार उन्हें मुआवजा देकर उनके साथ न्याय करेगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ऐसे सफल मुख्यमंत्री बन गये हैं जो राज्य में आने वाली किसी भी आपदा को लेकर अपनी सारी ताकत उस आपदा से निपटने के लिए लगा देते हैं। उत्तराखण्ड देखता आ रहा है कि जब भी राज्य के अन्दर कहीं पर भी आपदा आई तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मोर्चा संभाला और आपदा केन्द्र में डेरा डालकर अफसरों को आपदा मंे फंसे लोगों को बचाने और उनके रहने से लेकर खाने तक का सारा प्रबन्ध करते हुए हमेशा दिखाई दिये यही कारण है कि राज्य के मुख्यमंत्री किसी भी आपदा के दौरान विपक्ष को राजनीति करने का कोई मौका ही नहीं देते और वह संकटकाल में हर आपदा पीडित के साथ खडे होकर उनका दर्द हरकर उनके बीच राजनीतिक हीरो बनते आ रहे हैं। चमोली के जोशीमठ में कुछ समय पूर्व जब भूधसाव के कारण मकानों, होटलों और सडकों में बडी-बडी दरारें आनी शुरू हुई तो उस मंजर को देखकर जोशीमठवासी डरे और सहमें हुये नजर आने लगे और उनके सामने यह संकट भी आकर खडा हुआ कि इन दरारों के कारण कभी भी उन्हें हादसे का शिकार होना पड सकता है। जोशीमठवासियों के मन में अपने मकानों में आ रही दरारों को लेकर जब एक बडा डर और अपने आशियाने बचाने को लेकर चिंता का दौर शुरू हुआ तो कुछ विपक्षी राजनेताओं ने इन दरारों के दर्द में कराह रहे लोगों के बीच जाकर वहां राजनीति करने का जो पासा फेंका उसे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहचान गये और उन्हांेने खुद इस संकट से निपटने के लिए जोशीमठ में डेरा डाला और उन्होंने वहां उत्तेजित और आक्रोशित जनता को साफ संदेश दिया कि सरकार किसी के आशियाने नहीं तोड रही इसलिए किसी को धबराने की कोई जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने अपनी टीम के साथ जोशीमठ में डेरा डालकर आपदा पीडितों के बीच जाकर उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ खडी हुई है और किसी भी परिवार को धबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार उन्हें बाजार भाव पर मुआवजा देगी। जोशीमठवासियों के मन में चली आ रही शंका उस समय भी हवा-हवाई हो गई जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री से बात उन्हें आश्वासन दिया कि जोशीमठ के लिए जो भी सम्भव सहायता होगी केन्द्र सरकार उत्तराखण्ड सरकार को देगी। मुख्यमंत्री ने जोशीमठ में जिस तरह से अंगद बनकर वहां डेरा डाला और जोशीमठवासियों को खतरे वाले मकानों और होटलों से हटने के लिए कहा तो मुख्यमंत्री की बात उत्तेजित जनता मान गई और उन्होंने अपने होटल और अपने मकान खाली कर दिये जिसके बाद आपदा पीडितों को रिलीफ सेंटर में रखा गया जहां उनके खाने-पीने और अलाव की बेहतर व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जोशीमठ में प्रशासन ने जो जगह चिन्हित की हैं वहां सात सौ से आठ सौ घर हैं उन्हें खाली करा लिया गया है और अन्तिरम राहत मंे उन्हें डेढ लाख के चैक भी अधिकांश लोगों को अब तक मिल गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नये पुर्नवास के लिए वह जगह ढूंढ रहे हैं और सभी परिस्थितियों पर उनकी नजर है। मुख्यमंत्री की सफल रणनीति का ही परिणाम है कि वहां खतरनाक इमारतों को तोडने का ऑपरेशन शुरू हो गया है और वहां लोग अब शांत हो चुके हैं जिसके चलते जोशीमठ अब शांत दिखाई दे रहा है।