जोशीमठ पहुंचे मुख्य सचिव डॉक्टर सुखबीर सिंह संधू

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जोशीमठ(संवाददाता)। चमोली जोशीमठ में आज सुबह के सबसे बड़े नौकरशाह मुख्य सचिवडॉक्टर सुखबीर सिंह संधू जोशीमठ पहुंच चुके हैं उन्होंने आपदा पीडि़तों का हालचाल जाना स्थलीय निरीक्षण किया अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी प्रकार से आपदा प्रबंधन में कमियां नहीं होनी चाहिए सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है उन्होंने मलारी इन माउंट व्यू उरगम कालोनी कनेक्शन किया आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी जोशी में पहुंचे उन्होंने आपदा पीडि़तों से मिलकर के जोशीमठ की समस्या के बारे में बात की वस्तु स्थिति जानने के लिए जगह-जगह लोगों से बात की दूसरी तरफ बद्रीनाथ की विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, प्रमुख हरिश परमार जोशीमठ, नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने मनोहर वांग क्षेत्र का स्थली भ्रमण किया उसके बाद नरसिंह मंदिर वार्ड सिंघार वार्ड मैं जाकर के लोगों की घरों का निरीक्षण किया उसके बाद धरना स्थल पर पहुंचे धरना स्थल पर आज भी जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का कर्मी धरना जारी रहा जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने अब जयपुर हवाई क्षेत्रों का दौरा किया और पुनर्वास के बारे में लोगों से बात की जिन लोगों को डेंजर जोन से हटाए नहीं गये उनसे बातचीत कर प्रशासन से बात कर रहे हैं सामाजिक संगठन जनदेश की कलावती शाह लक्ष्मण सिंह नेगी नेगी आप द पीडि़त क्षेत्र में जाकर के लोगों से बातचीत की।
गेटवे ऑफ हिमालय कहा जाने वाला जोशीमठ, बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिबध् फूलों की घाटी पहुंचने का अंतिम शहर है। यह शहर ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (छभ् 7) पर स्थित है। भारत-चीन सीमा पर अग्रिम चौकियों की वजह से भी यह शहर सामरिक महत्व रखता है जोशीमठ शहर में 197० के दशक से हल्का भू-धसांव हुआ। 1976 में मिश्रा समिति ने अपनी रिपोर्ट में ये बताया कि जोशीमठ धीरे-धीरे भूगर्भ में समा रहा है। फरवरी 2०21 में धौलीगंगा में आई बाढ़ के कारण अलकनन्दा के तट के कटाव के उपरान्त से इस समस्या ने गम्भीर स्वरूप ले लिया है। तब से सैकड़ों मकान दरक चुके हैं, अब तो धरती फाड़कर जगह-जगह से पानी भी निकलने लगा है, कुछ भवन जमीन में ऐसे समा चुके हैं जैसे पहले कभी थे ही नहीं। फिलहाल यहाँ होटल में यात्रियों के रुकने पर रोक लगा दी है, एशिया का सबसे लंबा औली रोपवे बंद कर दिया गया है।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार पूरा शहर ग्लेशियर के मलवे पर बसा हुआ होने की वजह से अति भूस्खलन के लिये अतिसंवेदनशील है। जोशीमठ की पहाड़ी के नीचे सुरंग से निकाली जा रही एनटीपीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना भी समस्या को बढ़ा रही है। हेलंग विष्णुप्रयाग बाईपास की खुदाई भी एक बड़ी समस्या है। पर्यटकों का दबाव, अनियोजित विकास और ड्रेनेज सिस्टम न होने की वजह से भी ये समस्या विकराल हो गयी है। राज्य में भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (प्प्ज्),रूड़की, केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (ब्ठत्प्), रूड़की, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, देहरादून तथा वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून की टीम भी जोशीमठ के भूधंसाव की जांच के लिए जोशीमठ पहुंच चुकी है जांच की जा रही है।

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