भ्रष्ट नेताओं का जमीर हवनकुंड में स्वाहा!

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उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार करने वाले भी बन रहे ‘धर्मात्मा’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य की जनता के मन में एक बडी टीस पैदा हो गई थी कि जिस मिशन से उत्तराखण्ड राज्य का गठन किया गया था वह धरातल पर सफल नहीं हो पा रहा है। उत्तराखण्ड मंे दर्जनों बडे-बडे राजनेताओं ने भ्रष्टाचार के समुद्र में खूब गोते लगाये और उन्हांेने जिस तरह से दौलत का साम्राज्य खडा कर दिया उसी का परिणाम है कि आज राज्य उसी जगह खडा हुआ नजर आ रहा है जहां से सम्भवतः उसकी शुरूआत हुई थी? उत्तराखण्ड के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जिस तेजी के साथ भ्रष्टाचार व घोटाले हुये उससे राज्य की जनता के मन में एक बडा अफसोस रहा कि उन्होंने ऐसे राजनेताओं को आखिर क्यों चुना जिन्हें राज्यवासियांे का दर्द ही मालूम नहीं है कि उन्हें किस तरह से भ्रष्टाचार से लडना पड रहा है? गजब की बात तो यह है कि उत्तराखण्ड के अन्दर काफी भ्रष्ट नेताओं का जमीर शायद हवनकुंड में स्वाहा हो चुका है इसलिए वह भ्रष्टाचार के दलदल में पूरी तरह से धसने के बावजूद भी राज्य की जनता के सामने ऐसे नाटक कर रहे हैं मानो वह कितने बडे धर्मात्मा हों? उत्तराखण्ड की जनता अब ऐसे भ्रष्ट नेताओं के चेहरे पहचान चुकी है इसलिए उन्हें राज्य की जनता तिनकाभर भी गंभीरता से नहीं ले रही है और उसका मानना है कि वह ऐसे भ्रष्ट नेताओं के मकडजाल में अब फंसने वाली नहीं है जिन्होंने उत्तराखण्ड को दोनो हाथों से लूटने का तांडव मचाया हो?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्डवासियों को एक उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उनका राज्य विकास की राह पर इतनी तेजी के साथ आगे बढेगा कि वह देश मंे अपनी एक अलग पहचान बनायेगा लेकिन ऐसी सोच रखने वाले लोगों को उस समय गहरा आघात लगा जब राज्य में ईमानदारी का ढोल पीटने वाले काफी राजनेता भ्रष्टाचार के खेल में इस तेजी के साथ आगे बढे जैसे 20-20 मैच मंे खिलाडी तेजी से रन बनाने के लिए आगे आता है? उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का इतना बडा तांडव देखने को मिलता रहा कि अकसर उसकी गूंज उच्च न्यायालय नैनीताल में गूंजती रही लेकिन इसके बावजूद भी भ्रष्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अफसरों का कॉकस राज्य को दीमक की तरह चाटता चला गया और राज्य विकास की राह पर पैसेंजर गाडी से भी कम गति पर आगे बढा जिसको लेकर राज्यवासियांे के मन में हमेशा एक बडी पीडा देखने को मिलती रही? उत्तराखण्डवासियों ने जब यह धारणा बना ली थी कि वह किसी भी सरकार को पांच साल के बाद सत्ता नहीं देगी तो उसको देखते हुए भी राजनेताओं ने कोई सबक नहीं लिया? वहीं जब राज्य के अन्दर मात्र छह माह के लिए पुष्कर सिंह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया तो उन्होंने आवाम का दिल जितने के लिए सबसे पहले भ्रष्टाचार पर चोट करने का ऐलान किया और इस ऐलान के बाद उन्होंने जिस तरह से भ्रष्ट तंत्र को चिन्हित करने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये और उन्हांेने जब भ्रष्टाचार पर शुरूआती दौर में ही बडा प्रहार किया तो उससे राज्य की जनता को पुष्कर सिंह धामी में एक बडी सोच का राजनेता नजर आ गया और यही कारण था कि राज्य में सरकारों को लेकर चला आ रहा बाइस वर्षाें का मिथक तोड दिया और भाजपा को दुबारा सत्ता में लाकर यह साबित कर दिया कि उन्हें राज्य के अन्दर सिर्फ विकास चाहिए और जो भी राज्य का विकास करेगा उसे ही राज्य की जनता कुर्सी पर आसीन करेगी। गजब की बात यह है कि राज्य के कुछ भ्रष्ट नेताओं को भले ही प्रदेश की जनता ने नकारना शुरू कर दिया हो लेकिन उसके बावजूद भी वह अपने आपको राज्य के अन्दर धर्मात्मा का रूप आवाम के सामने पेश कर रहे हैं और ऐसा साबित कर रहे हैं कि वह राज्य के कितने बडे हितैषी हैं? बहस चल रही है कि उत्तराखण्ड मंे भ्रष्टाचार करने वाले कुछ राजनेताओं का जमीर इस कदर तार-तार हो गया है कि ऐसा लगता है कि उनका जमीर हवनकुंड मंे स्वाहा हो गया है? उत्तराखण्ड की जनता अब ऐसे भ्रष्ट राजनेताओं के नाटक को पहचान चुकी है जो भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाकर अपने आपको राज्य का सबसे बडा हितैषी बताने का भोपू बजा रहे हैं?

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