शासन-प्रशासन सतर्क, सावधानी बरतने की हिदायत
देहरादून। बीते कुछ वर्षाें से जैसे दिसंबर का महीना आता है, तो एक जानलेवा बीमारी कोरोना कुछ इस प्रकार से चर्चाओं में आ जाती है मानो यह एक परंपरा ही बन गई। बीते कुछ वर्षाें में कोरोना नामक बीमारी ने पूरे विश्व में असंख्य लोगों की जान ली है। वर्ष 2022 जाने को तैयार बैठा है और वर्ष 2023 के इस्तकबाल की तैयारियों शुरू हो गई है। जाते हुए इस साल के अंतिम माह में एक बार फिर से कोरोना की आहट सुनने को मिल रही है? टीवी चैनलों पर आजकल चीन की तरफ से एक बड़ी अपडेट सुनने को मिल रही है कि वहां पर कोरोना ने अपने फन फैलाने शुरू कर दिए है। जिसको लेकर भारत में हड़कंप मचता हुए नजर आ रहा है। सर्व विदित है कि कोरोना की बीमारी ने भारत देश में पिछले वर्षाें में कितना तांडव मचाया था और कईयों को मौत की नींद सुलाया था। ऐसा तांडव फिर से देखने को न मिले इसको लेकर केन्द्र सरकार से लेकर सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारें सतर्क हो गई है। उनके द्वारा लोगों को हिदायत दी गई है कि कोरोना से बचने के लिए सभी प्रकार की सावधानियों को बरतें। कोरोना के संक्रमण को लेकर जनता में दो धड़ें देखने को मिल रहे है। जिनमें से एक धड़े का यह मानना है कि कोरोना अब उतना प्रभावी साबित नहीं हो पाएगा जितना कि पहले हुआ था। उनका यह तर्क इस वजह से है कि भारत में कोरोना की वैक्सीन लगभग सभी को लग चुकी है, जिसकी वजह से अब प्रत्येक इंसान कोरोना से लड़ने में काफी हद सक्षम है। वहीं दूसरे धड़े का कहना है कि कोरोना का यह नया वेरियंट पहले से ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि इस वेरियंट की मारक क्षमता से अभी काफी लोग अंजान है। हालांकि शासन प्रशासन ने अपनी तरफ से एडवाइजरी जारी करके जनता को सतर्क रहने के लिए कहा है और कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की हिदायत भी दी है। जानकारों की माने तो, उनका कहना है कि जिस प्रकार से भारत के प्रत्येक राज्य में एक अभियान के तहत वैक्सिनेशन हुआ है, उसकी वजह से इस बार यदि कोरोना यहां आता है तो संभवतः वह ज्यादा असरदार साबित नहीं होगा?
गौरतलब है कि कोरोनावयरस का संक्रमण भारत में बड़ी ही तेजी के साथ फैला था। जिसको को रोकने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा लॉकडाउन जैसा कठिन कदम उठाया गया था। लॉकडाउन की वजह से हर आम से लेकर खास की कमर तोड़ रख दी थी। इसकी वजह से आर्थिकी पर सबसे ज्यादा गहरी चोट पंहुची थी। हालांकि एक लंबे अंतराल के बाद जनता इस संकट से उबरी और उसकी दिनचर्या धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी। लेकिन चीन से आ रही खबरों ने एक बार फिर से सबको सकते में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि चीन में कोरोना के मामले तेजी के साथ बढ़ने फिर से शुरू हो गए है। वहां लोगों को कतारों में लग कर वैक्सीन लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। चीन भारत का पड़ोसी देश है और यही सबसे बड़ा कारण समझा जा रहा है कि भारत में कोरोना को लेकर एक बार फिर से चिंता बढ़नी शुरू हो गई है। कोरोना की इस आहट से देश के सभी राज्य का शासन प्रशासन मुस्तैद होता हुआ नजर आ रहा है। अधिकारियों ने आम जन मानस से अपील की है कि वह कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती के साथ पालन करें और इस शीत ऋतु में अपनी सेहत का ख्याल रखें। कुछ वर्ष पुराने कोरोनाकाल को याद किया जाए तो कई डरावने दृश्य जहन में कौंध जाते हैं। उत्तराखण्ड की राजधानी दून में कोरोनाकाल के दौरान हुए मौतों के अंतिम संस्कारों के दृश्य आज भी एक बुरे सपने से लगते है। हालांकि कोरोना की आहट को देखते हुए उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार पूरी तरह से अलर्ट नजर आ रही है। सरकार ने अपनी पूरी मशीनरी को यह चेता रखा है कि वह इस आहट को हल्के में न लें और राज्य के स्वास्थ्य विभाग को इस बीमारी से जड़ी सारी अपडेट पर अपनी पैनी निगाह रखने की हिदायत दे रखी है। सरकार की तैयारी को देखकर यह अभास हो रहा है कि इस बार कोरोना उतना प्रभावी नहीं होगा जितना की शुरूआती समय में हुआ था, क्योंकि उस समय कोरोना कुछ ऐसे आया था मानो किसी परीक्षा मेें सवाल पाठ्यक्रम से बाहर से आ गए हो। अब देखने वाली बात यह होगी यदि कोरोना लौटकर आता है तो वह कितनी प्रभावी होगा या यह भी हो सकता है कि इस बार कोरोना फुस्स बम भी साबित हो सकता है?
कोई नहीं सुनना चाहेगा वह विचित्र नाम
कोरोनावायरस का संक्रमण जब पिछली बार तेजी से फैला था तो जनता के शब्दकोश में कुछ विचित्र नामों ने अपना घर बना लिया था। क्वारंटीन, लॉकडाउन, कोविड, वेरियंट सरीखे ऐसे कई नए नाम सामने आए थे। इन सभी नामों के पीछे एक दहशत का भाव छिपा हुआ था। जब भी कोई इन नामों को सुनता था तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती थी। वैक्सिनेशन के महाकुंभ मे डुबकी लगाने के बाद अब भारत की जनता काफी राहत महसूस कर रही है। सरकारें इस बात पर भी जोर दे रही है कि जिन लोगों ने बूस्टर डोज़ नहीं लगाई है वह बूस्टर डोज़ भी जल्द से जल्द लगवा लें, ताकि ऐसे विचित्र नामों का जिक्र दोबारा सुनने को न मिले।