अपराध से कमाई काली कमाई पर कब चलेगा हंटर?
सीएम ने अपराधियांे की सम्पत्तियां सीज करने का दिया है आदेश
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य में अपराधियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाये हुये हैं और उन्होंने पुलिस वीक में सभी अफसरों को आदेश दिये थे कि अपराध से कमाई गई अपराधियों की काली कमाई को सीज किया जाये। मुख्यमंत्री के इस आदेश का राजधानी के अन्दर कब पालन होगा यह देखने वाली बात होगी क्योंकि राजधानी में सट्टा, जुआ और गैर कानूनी धंधे करने वालों पर गैंगेस्टर एक्ट तो लगा हुआ है लेकिन पुलिस हाकिम न जाने क्यों गैंगेस्टरों द्वारा कमाई गई काली कमाई को सीज करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं यह समझ से परे है और ऐसे में सीएम के अपराधमुक्त राज्य का सपना कैसे पूरा होगा यह एक बडा प्रश्न खडा हो चुका है? हैरानी वाली बात है कि सट्टेबाजों के सिंडिकेट ने तीसरी आंख से खाकी पर नजर रखी हुई है और अपने घरों के चारो ओर उन्होंने जिस तरह से सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं उसे देखकर पुलिस भी उनके घरों में घुसने का साहस नहीं दिखा पा रही है? गैर कानूनी धंधे करने वालों के साथ अगर पुलिस के कुछ दरोगा या कर्मचारी मिले हुये हैं और उनके काले धंधों के वह हमराज बनकर उनसे दौलत वसूल रहे हैं तो इस पर पुलिस मुख्यालय कब अपनी नजरें टेडी करेगा यह आज राजधानी में तो एक बडा सवाल खडा हो चुका है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकल्प ले रखा है कि राज्य को अपराधमुक्त करना है और इसके लिए वह लगातार पुलिस अफसरों को आदेश देते आ रहे हैं और राज्य के पुलिस अफसरों के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी पुलिस अफसरों को आदेश दिया कि वह अपराधियों पर नकेल लगाये और जिन अपराधियों ने अपराध व गैर कानूनी धंधों से सम्पत्तियां अर्जित कर रखी हैं उनकी सम्पत्तियों को सीज किया जाये। मुख्यमंत्री के इस आदेश से ऐसा आभास हुआ था कि शायद गैंगेस्टरों के खिलाफ बडी कार्यवाही अमल में लाई जायेगी और उनकी सम्पत्तियों को सीज करने का भी ऑपरेशन शुरू होगा। राजधानी में क्रिकेट, मटका सट्टा करने वाले सिंडिकेट में शामिल चाचा-भतीजा अपने परिवार के कुछ लोगों के साथ मिलकर जिस तरह से सट्टे के काले कारोबार को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं और वह अपने गैंग के साथ जुए के अड्डे पुलिस के कुछ दरोगाओं और कर्मचारियों के साथ मिलकर चला रहे हैं उसको लेकर यह सवाल खडा हो रहा है कि आखिरकार जब राजधानी में ही पुलिस के कुछ दरोगाआंे और गैर कानूनी धंधे करने वालों के सिंडिकेट ने हाथ मिलाकर एक बडे मिशन के तहत अपने काम को अंजाम देना शुरू कर रखा है उसकी भनक राज्य की खुफिया एजेंसियों को कैसे नहीं हो रही यह कई सवालों को जन्म दे रहा है? जरा-जरा सी बात पर दरोगा और पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर और निलम्बित करने का आदेश तो अकसर कुछ पुलिस अफसर देते आ रहे हैं लेकिन जिन दरोगाओं और पुलिसकर्मियांे ने गैर कानूनी धंधे करने वालों के साथ गुप्त गठबंधन कर रखा है उनके चेहरे बेनकाब करने के लिए पुलिस मुख्यालय के बडे अफसर कब अपना तीसरा नेत्र इन पर लगायेंगे यह अभी भी एक पहेली जैसा ही दिखाई दे रहा है? अगर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पुलिस अफसरों को अपराधियों द्वारा अपराध से कमाई गई सम्पत्तियों को सील करने का आदेश दे रहे हैं तो फिर आखिर क्या कारण है कि राजधानी में काफी दरोगा उनके इस सपने को साकार करने के लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ रहे? गैंगेस्टरों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट न खोलना पुलिस के काफी दरोगाओं पर उंगलियों उठा रहा है? अगर राजधानी में ही गैर कानूनी धंधे करने वालों की सम्पत्तियों को सीज करने और उनके सिंडिकेट का नेटवर्क तोडने के लिए पुलिस आगे नहीं आ रही है तो फिर राज्य के मुख्यमंत्री का उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त करने का सपना कैसे पूरा होगा इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है?