भ्रष्ट अफसरों को रास नहीं आते ईमानदार अफसर!

0
143

भ्रष्टाचारमुक्त राज्य की कल्पना सिर्फ सपना न बन जाये?
आवाम बोल रहाः सीएम साहब भ्रष्टों के चेहरे बेनकाब करने को बना दो लोकायुक्त!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर स्वच्छता के साथ सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सत्ता चलाने के लिए अपना इरादा तो आवाम के सामने शेयर किया लेकिन अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में स्वच्छता के साथ सरकार चलती हुई दिखाई नहीं दी? इसके पीछे जो कारण आज तक निकलकर आया वह यही था कि राज्य मंे तैनात काफी भ्रष्ट अफसरों को ईमानदार अफसर रास नहीं आते जिसके चलते वह ईमानदार अफसरांे को किसी न किसी निशाने पर लेने का खेल खेलते आ रहे हैं और अगर राज्य मंे तैनात काफी भ्रष्ट अफसरों की सम्पत्तियों की जांच के लिए कोई बडा पैमाना तय कर दिया जाये तो उससे साफ झलक जायेगा कि राज्य में भ्रष्ट अफसर किस तरह से सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें अपने रंग में रंगते रहे हैं? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त करने का एक बडा संकल्प ले रखा है और 2025 तक वह राज्य को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प बार-बार हर मंच से दोहरा रहे हैं लेकिन राज्य के अन्दर अभी भी काफी भ्रष्ट अफसर ऐसे हैं जो ईमानदार अफसरों को अपनी रडार पर लेकर उन्हें किसी न किसी बहाने एक बडे चक्रव्यूह में घेरने का खेल खेलते आ रहे हैं जिससे सवाल खडा हो रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का जो संकल्प लिया था क्या उनके भ्रष्टाचारमुक्त राज्य की कल्पना राज्य में तैनात कुछ भ्रष्ट अफसर पूरी करने देंगे यह राज्य के अन्दर अभी दबी जुबान में एक बहस का विषय बना हुआ है?
उल्लेखनीय है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी और उनकी किचन टीम राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की दिशा में तेजी के साथ काम कर रही है और उनका यही विजन है कि राज्य में हर तरफ स्वच्छता के द्वार खुले रहे और कोई भी भ्रष्टाचार और घोटालों का खेल न खेल पाये? उत्तराखण्ड में बाइस सालों से भ्रष्टाचार और घोटालों का जो खेल चलता आ रहा है उसका अंत राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करने के लिए तो आगे बढते जा रहे हैं लेकिन उनके इन बढते कदमों से काफी सफेदपोश और भ्रष्ट अफसरों के सिंडिकेट की नंीदे उडी हुई हैं और उनका मानना है कि अगर इसी तरह से राज्य में सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे बढती रही तो यह उनके लिए एक बडा सिरदर्द बन जायेगा यही कारण है कि कुछ सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों के सिंडिकेट को ईमानदार अफसर रास नहीं आ रहे? उत्तराखण्ड मंे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी टीम तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ रही है लेकिन उन्हें ऐसा सिस्टम रास नहीं आ रहा है? यही कारण है कि कुछ सफेदपोश और राज्य के कुछ भ्रष्ट अफसरों ने पर्दे के पीछे से एक बडा गठबंधन किया हुआ है और वह अपने आपको राज्य के अन्दर बाइस सालों से पॉवरफुल मानकर अपने बडे-बडे खेल खेलकर अकूत दौलत कमाने के मिशन मंे सफल होते आ रहे हैं लेकिन मौजूदा दौर में स्वच्छता के साथ सरकार चलाने का संकल्प ले चुके मुख्यमंत्री के ऑपरेशन भ्रष्टाचारमुक्त को लेकर उनमें कहीं न कहीं बडी बेचैनी बनी हुई है क्योंकि सरकार के मुखिया ने जिस तरह से कुछ बडे अफसरों पर कार्यवाही करने का जो साहस दिखाया है उससे भ्रष्ट अफसरों और काफी सफेदपोशों की नींद उडी हुई है और वह यही खाका तैयार करने में लगे हुये हैं कि किसी तरह से ईमानदार अफसरों को अपनी रडार पर लेकर उन्हें निशाने पर किसी न किसी बहाने लिया जाये जिसके चलते वह अपने मिशन में कामयाब होकर फिर दौलत कमाने के खेल में आगे बढ जायें? सवाल यह भी खडा हो रहा है कि उत्तराखण्ड को अगर भ्रष्टाचारमुक्त करना है तो उसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री को विजिलेंस के साथ लोकायुक्त का भी गठन कर देना चाहिए जिससे कि जिन भ्रष्ट अफसरों ने कुछ सफेदपोशों के साथ मिलकर अकूत दौलत का खजाना भर रखा है उनके खजाने पर लोकायुक्त एक बडा प्रहार कर उन सभी सफेदपोश और भ्रष्ट अफसरों के सिंडिकेट को बेनकाब कर सके जिन्होंने बाइस सालों में राज्य के अन्दर इतनी अकूत सम्पत्ति का किला खडा कर लिया है जिसकी आम इंसान शायद कल्पना भी नहीं कर सकता?

LEAVE A REPLY