सरकार को चुनौती दे रहे बर्खास्त कर्मचारी

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड में इन दिनों विधानसभा में दो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को जबसे सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध करार दिया है तबसे बर्खास्त कर्मचारियों ने सरकार व सिस्टम को चुनौती दे रखी है और वह इस बात को लेकर आन्दोलन की राह पर हैं जब उन्हें विधानसभा से बाहर कर दिया गया तो फिर उन पूर्व विधानसभा अध्यक्षों पर कब कार्यवाही होगी जिन्होंने उन्हें नियुक्तियां दी थी। विधानसभा के बाहर धरना देने वालों को पुलिस ने उन्हें वहां से जबरन हटाने का मिशन शुरू किया तो उससे कुछ बर्खास्त कर्मचारियों को चोट आई और उन्हें कॉरेनेशन अस्पताल भर्ती कराया गया जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। वहीं बर्खास्त कर्मचारी आंदोलन की राह पर आगे बढते हुए नजर आ रहे हैं और जैसे ही पुलिस महकमें को इस बात की भनक लगी कि बर्खास्त कर्मचारी राजभवन की ओर कूच कर सकते हैं तो उसके बाद पुलिस व खुफिया एजेंसियां एलर्ट हो गई और राजभवन की ओर आने वाले मार्ग पर पुलिस व पीएससी भी तैनात कर दी गई कि अगर आंदोलन कर रहे बर्खास्त कर्मचारियों ने राजभवन की ओर कूच करने का साहस किया तो उन्हें हाथीबडकला से पहले ही बैरियर लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा? अब सवाल यह खडे हो रहे हैं कि क्या विधानसभा से बर्खास्त हुये सैकडों कर्मचारी सरकार में मौजूदा कैबिनेट मंत्री व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद पर कार्यवाही होने तक अपने आंदोलन को आगे बढायेंगे या फिर वह सिर्फ मीडिया के सामने आकर अपने मन की बात उनसे साझा कर पूर्व विधानसभा अध्यक्षों पर कार्यवाही कराने की मांग बुलंद करेंगे?
आज सुबह काफी पुलिस बल ने विधानसभा के बाहर धरना दे रहे विधानसभा से बर्खास्त हुये सैकडों कर्मचारियों को जबरन धरना स्थल से उठा दिया और उसके बाद उनकी पुलिस से काफी नोकझोक भी हुई लेकिन पुलिस ने उन्हें सहस्रधारा रोड पर स्थित धरना स्थल पर छोड दिया लेकिन बर्खास्त कर्मचारियों ने सिस्टम को खुला अल्टीमेटम दिया कि जब तक इस मामले में और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी तब तक वह खामोश नहीं रहेंगे। पुलिस अफसरों को इस बात की आशंका थी कि अगर बर्खास्त कर्मचारी राजभवन के बाहर प्रदर्शन करने के लिए पहुंच गये तो उससे उनके सामने एक बडा संकट आकर खडा हो जायेगा इसी को देखते हुए काफी पुलिस बल व पीएससी को हाथीबडकला के समीप तैनात कर दिया गया था और साफ आदेश दिये गये थे कि अगर कोई भी प्रदर्शनकारी हथिबडकला से आगे जाने की कोशिश करे तो उसे हिरासत में ले लिया जाये। पुलिस अफसर अंकिता भण्डारी हत्याकांड में प्रदर्शनकारियों के राजभवन पहुंचने का खामियाजा पहले भुगत चुके हैं इसलिए कोई बर्खास्त कर्मचारी राजभवन तक न पहुंच पाये इसके लिए पुलिस अफसरों ने हाथीबडकला के आसपास अपनी किलेबंदी कर रखी थी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अब तक के कार्यकाल में भ्रष्टाचार व घोटालों के खिलाफ आवाज बुलंद की और उन्होंने जिस तरह से यूकेएसएसएससी से हुई भर्तियों की जांच का जिम्मा एसटीएफ को सौंपा और उन्होंने कुछ भर्तियों में दलाली व रिश्वतखोरी का खेल खेलने वाले चार दर्जन से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया तो उसके बाद से ही राज्य में दो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल व प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई भर्तियों को लेकर आवाज उठी कि इन भर्तियों में भी बडा घोटाला हुआ था जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी को पत्र लिखकर राज्य बनने के बाद से विधानसभा में हुई सभी भर्तियों की जांच कराने की मांग उठाई तो उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने डीके कोटिया कमेटी का गठन कर तीन पूर्व आईएएस अफसरों को एक माह के भीतर अपनी जांच पूरी करने का आदेश दिया था। डीके कोटिया कमेटी ने समय से पूर्व ही इन भर्तियों की जांच की और उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी ने दावा किया था कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल व प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई भर्तियां अवैध थी जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने लगभग ढाई सौ भर्तियों को निरस्त कर दिया था इसके बाद बर्खास्त हुये कर्मचारियों ने नैनीताल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था जहां एकल बैंच ने बर्खास्त कर्मचारियों को राहत दी थी लेकिन डबल बैंच ने डीके कोटिया कमेटी के फैसले को सही बताया था इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां भी न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराया जिसके बाद से ही बर्खास्त कर्मचारियों ने सरकार व सिस्टम के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रखी है और उन्होंने विधानसभा के बाहर तीन दिन से धरना दे रखा था जहां से आज पुलिस ने उन्हें जबरन उठा लिया और उन्हें सहस्रधारा रोड पर स्थित धरना स्थल पर छोड दिया गया। जिसके बाद से यह सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या बर्खास्त कर्मचारी दोनो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर कार्यवाही न होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे?

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