रंगीन मिजाज ‘चाचा-भतीजा’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी में पुलिस हाकिम की नजर में अब सट्टा शायद अपराध नहीं रह गया है क्योंकि अगर हाकिम इसे भी गैर कानूनी धंधा मानते तो वह अपनी अपराध बैठक में क्रिकेट और मटका सट्टा करने वालों पर भी पुलिस दरोगाओं को एक शब्द तो जरूर बोलते लेकिन उनकी सट्टेबाजों पर रहस्यमय चुप्पी अब पुलिस को भी कटघरे में खडा कर रही है? चंद दिन पूर्व जिस टैक्नीशन की कुख्यात निक्कु के भतीजे ने बेस बॉल बेट से कई वार कर उसकी हत्या कर दी थी उसके बारे में शहर के अन्दर यही शोर है कि वह भी क्रिकेट सट्टे का बादशाह है लेकिन पुलिस के कुछ दरोगाओं और कर्मचारियों की कृपा से उस पर कभी भी शिकंजा नहीं कसा गया और दौलत की गर्मी का भूत उसके सिर पर इस कदर सवार था कि उसने एक बेकसूर युवक को सरेआम मौत की नींद सुला दिया? राजधानी के अन्दर एक चाचा-भतीजा क्रिकेट सट्टे और मटका सट्टे के बादशाह बनकर जिस तरह से रंगीन मिजाज का रूप धारण किये हुये हैं वह किसी से छिपा नहीं है लेकिन दौलत के दम पर कुछ दरोगा व पुलिसकर्मी उन्हें अपनी पनाह में रखे हुये हैं जिसके चलते सट्टे का काला कारोबार ऊफान पर है? गजब की बात तो यह है कि राजधानी में कुछ सट्टेबाजों के पास पासपोर्ट तक मौजूद है और खाकी की दया के चलते ही आज तक पुलिस ने चंद सट्टेबाजों के पासपोर्टों को रद्द कराने के लिए कोई पहल की और न ही पासपोर्ट अधिकारी को सट्टेबाजों का पासपोर्ट रद्द करने का कोई खत लिखा? इससे बडी हैरानी वाली क्या बात हो सकती है कि शहर में एक व्यापारी ने खुद को गोली मारकर मौत चुन ली और इस मौत का गुनाह कुछ सट्टेबाजों पर आ रहा था जिन्होंने सम्भवत: उससे क्रिकेट सट्टे करोडो रूपये लेने थे यह मामला पुलिस हाकिम के पास आने के बावजूद भी उनके द्वारा इतने गंभीर मामले की जांच के आदेश तक न देना सट्टेबाजों के कहीं न कहीं सीना चौडा करने जैसा ही दिखाई दे रहा है?
उल्लेखनीय है कि पुलिस मुख्यालय मे बैठे कुछ पुलिस अफसर आये दिन दावा कर रहे हैं कि राज्य को अपराधमुक्त और गैर कानूनी धंधे करने वालों से आजादी दिलाने के लिए ऑपरेशन चलाया जायेगा और जिन्होंने गैर कानूनी धंधों से अकूत दौलत कमाई है उनके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट लगाया जायेगा और उनकी हिस्ट्रीशीट खोली जायेगी। ताजुब वाली बात है कि पुलिस मुख्यालय के आला अफसरों के आदेशों का राजधानी में तो दावा हवा हवाई ही दिखाई दे रहा है? शहर के अन्दर दर्जनों सफेदपोश और बडे सट्टेबाजों का सिंडिकेट खाकी के कुछ लोगों के साथ गठबंधन कर उन्हें अपना संरक्षण दे रहा है और सबकुछ पता होने के बावजूद भी राजधानी पुलिस हाकिम की रहस्यमय चुप्पी से तो दून गैर कानूनी धंधे करने वालों से आजाद होगा ऐसा दिखाई नहीं देता? सरकार के मुखिया और पुलिस मुखिया उत्तराखण्ड में युवाओं में नशे के बढ़ रहे प्रचलन को लेकर काफी चिंतित हैं और उन्हें नशा माफियाओं पर नकेल लगाने के लिए एक टास्क फोर्स का भी गठन किया है जिससे युवा पीढी को नशे के दलदल से बचाया जा सके और नशा माफियाओं पर नकेल लगाई जा सके। युवा पीढी को नशे से बचाने का सरकार ने जो जज्बा दिखाया है वह काफी सराहनीय है लेकिन सरकार को इस बात के लिए भी बडा मंथन और चिंतन करना चाहिए कि क्रिकेट और मटके सट्टे का नशा जिस तरह से युवा और काफी व्यापारियों के दिमाग में बस चुका है और इस नशे के चलते वह आये दिन क्रिकेट और मटके सट्टे पर लाखों रूपये लगाकर खुद तो बर्बादी की राह पर आकर खडे हो ही रहे हैं साथ में उनके परिवार भी इस सट्टे के कारण भूखमरी की राह पर आ रहे हैं जिस ओर न तो सिस्टम का कोई ध्यान जा रहा है और न ही पुलिस के बडे अधिकारी इन सट्टेबाजों की नाक में नकेल डालने के लिए कोई बडा कदम उठाने का साहस कर रहे हैं? राजधानी के अन्दर दर्जनों सफेदपोश और बडे सट्टेबाजों ने अपने इस गोरखधंधे को चलाने के लिए पुलिस के कुछ दरोगा और पुलिसकर्मियों को दौलत की रोशनी दिखाकर उन्हें अपने पाले में कर रखा है? जिसके चलते वह अपने आपको सुरक्षित रखने के मिशन में सफल हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि राजधानी के पुलिस हाकिम को राजधानी में सट्टेबाजों का कोई ज्ञान न हो लेकिन सबकुछ मालूम होने के बाद भी वह गैर कानूनी धंधा करने वाले इन सट्टेबाजों पर पुलिस का डंडा चलाने से क्यों पीछे हट रहे हैं यह समझ से परे है? बातदें कि एक चाचा-भतीजा सट्टे के बडे बादशाह हैं और दौलत के दम पर वह जिस तरह से रंगीन मिजाजद्ध कर रहे हैं वह शहर में हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है? राजधानी पुलिस का कुछ सट्टेबाजों से कितना स्नेह है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ सट्टेबाजों के पासपोर्ट तक जब्त करने या उन्हें निरस्त कराने के लिए पुलिस अभी तक आगे नहीं आई है जिससे पुलिस पर सवालिया निशान लगने तय हैं? अब अगर व्यापारी की सट्टेबाजों की धमकियों से हुई मौत पर भी पुलिस हाकिम चुप्पी साधे हुये हैं तो फिर राजधानी गैर कानूनी धंधे करने वालों से कैसे आजाद हो पायेगी इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है?

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