मैगी प्वांइट पर वैध-अवैध का खेल?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। हैरानी वाली बात है कि जिस मसूरी रोड पर आये दिन सरकार, शासन, प्रशासन के बडे-बडे अफसर आते-जाते रहे उन्हें वर्षों से मैगी प्वाइंट पर बने रेस्तरा अवैध नजर क्यों नहीं आये यह अब एक बडा सवाल उस समय खडा हो गया जब जिला प्रशासन ने मैगी प्वाइंट में रेस्तरा से अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे कुछ रेस्तरांओं पर तो जेसीबी चलाकर उनका रोजगार उजाड दिया वहीं आज भी सैकडों रेस्तरा कैसे वैध बने हुये हैं यह जिला प्रशासन पर एक सवालिया निशान लगा रहा है? सवाल यह खडा हो रहा है कि अगर मैगी प्वाइंट पर कुछ रेस्तरा जिला प्रशासन और एमडीडीए की नजर में अवैध हैं तो फिर वहां सैकडों रेस्तरा कैसे वैध हो सकते हैं जो आर थ्री में कहीं पास ही नहीं हैं? अगर जिला प्रशासन मैगी प्वाइंट में भी वैध और अवैध के खेल में कुछ को तोड गया और सैकडों को बचा गया तो उससे सिस्टम पर उंगलियां उठनी तय है कि क्या वैध और अवैध में रसूकदारों को क्षमादान और असहाय दुकानदारों के रेस्तराओं पर जेसीबी चली तो फिर न्याय और अन्याय में फर्क कौन करेगा?सवाल खडा होता है कि क्या जो जमीन आर थ्री में है ही नहीं वहां का एमडीडीए क्या मानचित्र पास करता है?
उल्लेखनीय है कि मैगी प्वाइंट में वर्षों से सैकडों रेस्तरा लोहे के पिलर और चादरों पर बने हुये हैं क्योंकि वहां की जमीन रजिस्ट्री तो हो रखी है लेकिन उसका दाखिला खारिज नहीं है और वह जमीन आर थ्री में भी पास नहीं है इसलिए अधिकांश रेस्तरा सिर्फ लोहे के ढांचे पर ही खडे हुये हैं और लोहे के ढांचों पर खडे रेस्तरा एक के बाद एक बनते चले गये लेकिन न तो कभी जिला प्रशासन और न ही कभी एमडीडीए ने वहां हो रहे निर्माण कार्यों को वैध व अवैध बताने के लिए अपने कदम आगे बढाये जिससे काफी युवा पीढी वहां किराये पर जगह लेकर मैगी, खाने-पीने का छोटा मोटा सामान बेचकर अपना ध्यान सिर्फ अपने काम पर केन्द्रित किये हुये थे और चंद स्थानों को छोडकर कहीं पर भी कोई ऐसी गतिविधि संचालित होती हुई दिखाई नहीं दी जिससे कि सरकार व सिस्टम को यह सोचना पडता कि वहां गैर कानूनी काम का धंधा चल रहा है? जिला प्रशासन और एमडीडीए की आंखों के नीचे मैगी प्वाइंट में सैकडों रेस्तरा बन गये और वहां से युवा पीढी छोटा मोटा काम करने में भी कोई शर्म महसूस नहीं कर रही थी लेकिन अचानक ऐसा कौन सा भूचाल सिस्टम के सामने आ गया कि उन्होंने राजधानी में सिर्फ मैगी प्वाइंट को ही वैध और अवैध के बीच बांटने के लिए अपने कदम आगे बढा दिये? हैरानी वाली बात है कि कुछ रेस्तरा मालिकों को सिर्फ कागज दिखाने का नोटिस दिया गया लेकिन कल सुबह जिला प्रशासन का बडा अमला चंद रेस्तराओं पर ही अपना तांडव दिखाने के लिए आगे आ गया और तो और रेस्तरा चलाने वालों को यहां तक मौहलत नहीं दी कि वह अपना सामान तो रेस्तरा से बाहर निकाल दें? जिला प्रशासन का यह हिटलरशाही पैमाना उस समय बेनकाब हो गया जब चंद रेस्तराओं को ही तोडकर वह खामोश हो गया और सिर्फ कुछ लोगों के जाम लगाने और प्रदर्शन करने से ही सिस्टम की दबंगता हवा-हवाई हो गई? ऐसे में वो रेस्तरा संचालक जिला प्रशासन को कोसते हुए नजर आये जिनके रेस्तरा पर सुबह-सुबह ही जेसीबी चला दी गई लेकिन और रेस्तराओं पर जेसीबी चलाने का जिला प्रशासन कोई साहस नहीं दिखा पाया? प्रशासन का एक अफसर कुछ रेस्तरा संचालकों को यह कहते हुए भी सुना गया कि ऊपर से आदेश है कि रेस्तराओं को तोड दो लेकिन सवाल यह है कि इस तोडफोड में जिला प्रशासन ने वैध और अवैध का पैमाना कैसे तय कर लिया कि कुछ पर तो जेसीबी चला दी गई और सैकडों को दबाव और राजनीति के चलते कहीं न कहीं उनके रेस्तराओं को अभयदान दे दिया गया? अब सिस्टम को आवाम कटघरे में खडा कर रहा है कि अगर मैगी प्वांइट इलाका आर थ्री नहीं है और वहां हो रखे निर्माणों को तोडना है तो फिर वहां वैध और अवैध का पैमाना क्यों तय किया जा रहा है? अगर कुछ रेस्तरा तोड दिये गये तो फिर और रेस्तराओं पर सिस्टम क्यों और किसके इशारे पर तोडने के लिए आगे नहीं आ रहा इसका जवाब सरकार को भी देना पडेगा?

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