भ्रष्ट आईपीएस अफसरों के चेहरे पहचानता है उत्तराखण्ड!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही कुछ आईपीएस अफसरों ने जिस तरह से बडे-बडे भ्रष्टाचार कर अकूत दौलत कमाई है वह किसी से छुपा नहीं है और इन भ्रष्ट आईपीएस अफसरों की सम्पत्तियों की जांच कराने के लिए कभी भी न तो ईडी सामने आई और न ही विजिलेंस के किसी बडे अफसर में अपने ही विभाग के भ्रष्ट आईपीएस अफसरों की सम्पत्तियों को खंगालने का साहस दिखा? अब दिल्ली के एक पांच सितारा होटल के मालिक की आत्महत्या के बाद जब यह बहस छिडी कि उत्तराखण्ड के एक आईपीएस की काली कमाई भी होटल में निवेश हो रखी थी और वह होटल मालिक से अपना पैसा वापस लेने के लिए उस पर दबाव बना रहा था तो होटल मालिक ने डिप्रेशन में आकर मौत को गले लगा लिया था? उत्तराखण्ड के गलियारों में अचानक भूचाल मच गया कि आखिरकार काली कमाई करने वाला वो कौन आईपीएस है जिसने पांच सितारा होटल में अपना बडा पैसा निवेश किया हुआ था? आईपीएस का नाम सामने आते ही राज्य में तैनात कुछ अफसरों और मीडिया का एक सिडिकेट राज्यवासियों का ध्यान भटकाने के लिए अफवाहों को हवा देने में जुटा हुआ है लेकिन उनकी इस अफवाह की सिस्टम को पहचानने वाले लोग ही हवा निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं। भ्रष्टाचार से किस-किस आईपीएस ने दौलत का किला खडा किया हुआ है अगर सरकार के मुखिया इसकी बडी जांच कराने के लिए आगे आ जाये तो उन भ्रष्ट आईपीएस अफसरों के चेहरे उत्तराखण्ड की जनता के सामने खुलकर बेनकाब हो जायेंगे?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य की जनता कुछ आईपीएस अफसरों को नजदीक से पहचानती रही है जिन्होंने महत्वपूर्ण कुर्सी लेने के लिए कुछ राजनेताओं की गुलामी को स्वीकारा और उनके बताये पद चिन्हों पर चलने के लिए अपने कदम आगे बढाये? उत्तराखण्ड में कुछ आईपीएस अफसर ऐसे दिखाई दिये जिन्होंने महत्वपूर्ण कुर्सी हासिल करते ही भ्रष्टाचार का खूब तांडव मचाया और इस तांडव को करने के दौरान उन्होंने जहां जमीनों पर खुलकर कब्जे कराये वहीं उन्होंने अवैध खनन का काला कारोबार कराकर खूब दौलत बटोरी और ऐसे चंद आईपीएस अफसर हमेशा अपने इलाकों में आवाम की रडार पर रहे लेकिन उनका कुछ सफेदपोशो और राजनेताओं से गठबंधन होने के कारण उनके द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई जा रही दौलत पर सरकार ने कभी भी ध्यान नहीं दिया और न ही उनके खिलाफ कोई एक्शन लेने का कभी साहस दिखाया? कुछ राजनेताओं के साथ चंद आईपीएस अफसरों ने इतना बडा गठबंधन किया हुआ था कि वह उनके इशारे पर उनके विरोधियों को नेस्तानबूत करने के मिशन में खुलकर आगे खडे हुये दिखाई देते थे जिस कारण ऐसे भ्रष्ट अफसरों को देखकर आवाम भी हैरान होती थी कि वह लोकतंत्र में जी रहे हैं या फिर राजशाही में? उत्तराखण्डवासियों ने कभी भी यह सपने में नहीं सोचा था कि पुलिस के कुछ आईपीएस राज्य के अन्दर इतना बडा भ्रष्टाचार करेंगे जिसकी कोई सीमा ही न हो? उत्तराखण्ड के अन्दर जब भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लडने का जज्बा राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिखा दिया है तो उन्हें राज्य के हर उस भ्रष्ट अफसर की बेनामी सम्पत्तियों को भी खंगालने के लिए एक बडा ऑपरेशन चलाना चाहिए जिन्होंने राज्यवासियों की सेवा करने के बजाए अपने खजाने को दौलत और बेनामी सम्पत्तियों से भरने का खूब तांडव मचाया था? दिल्ली में एक पांच सितारा होटल के मालिक द्वारा आत्महत्या की गई तो उसके कुछ समय बाद अचानक यह बात उठने लगी कि उत्तराखण्ड के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की काली कमाई होटल में निवेश हो रखी थी और वह आईपीएस होटल मालिक से अपना पैसा मांगने के लिए उस पर दबाव बनाने का तांडव कर रहा था जिससे परेशान होकर होटल मालिक ने आत्महत्या कर ली थी? होटल मालिक की मौत में उत्तराखण्ड के एक वरिष्ठ आईपीएस का नाम सामने के बाद राज्य के गलियारों में उस आईपीएस को लेकर एक नई बहस छिडी हुई है कि आखिरकार वो कौन आईपीएस है जिसने होटल में अपनी काली कमाई का पैसा निवेश किया हुआ था? होटल मालिक की मौत में उत्तराखण्ड के एक आईपीएस का नाम सामने आने पर कुछ अफसरों और मीडिया के एक सिंडिकेट ने आवाम का ध्यान भटकाने के लिए एक बडी साजिश के तहत अफवाहें फैलाने का जो कुचक्र रचा हुआ है वह तो आने वाले कुछ समय में बाहर आ ही जायेगा लेकिन इस मामले में जिस तरह से राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले की सच्चाई उजागर करने को कहा है उससे साफ नजर आ रहा है कि वो आईपीएस भी जल्द जरूर बेनकाब हो सकता है जिसने अपनी काली कमाई को होटल में निवेश किया हुआ था? उत्तराखण्ड के अन्दर पहली बार कोई मुख्यमंत्री ऐसा देखने को मिला है कि उन्होंने राज्य में फैले भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए ऑपरेशन चला रखा है ऐसे में राज्य के अन्दर यह बहस भी चल गई है कि सरकार के मुखिया को राज्य के उन सभी भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों को खंगालने का ऑपरेशन चलाना चाहिए जो राज्य की जनता की गाढी कमाई को लूटकर अपना दौलत का किला खडा कर चुके हैं? अह्म बात यह है कि विजिलेंस तो बडे अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों को खंगालने का ऑपरेशन चला नहीं सकती इसलिए ईडी को भी अपना तीसरा नेत्र खोलकर उन भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों पर अपनी रडार धुमानी होगी जिन्होंने भ्रष्टाचार से बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा कर रखा है? उत्तराखण्ड के अन्दर सिस्टम को नजदीक से पहचानने वाले जानते हैं कि राज्य में कौन-कौन अफसर भ्रष्टाचार की गंगा में डूबकर खूब गोते लगाता रहा है और इस भ्रष्टाचारी गंगा से वह कितना बडा बेनामी सम्पत्ति का अपना साम्राज्य खडा कर चुका है?

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