कौन है करोडपति आईपीएस?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में वर्षों से इस बात को लेकर एक बडी बहस चली आ रही है कि राज्य में कुछ आईएएस, आईपीएस, पीपीएस और पीसीएस अफसरों के पास अकूत दौलत का खजाना है जिसका राज बेनकाब होना चाहिए लेकिन किसी भी सरकार ने बेनामी सम्पत्तियां बनाने वाले अफसरों पर नकेल लगाने के लिए कोई पहल नहीं की जिसके चलते राज्य के अन्दर लोकायुक्त का गठन करने की मांग उठती रही लेकिन इसके बावजूद भी राज्य के अन्दर कोई भी सरकार लोकायुक्त बनाने के लिए तैयार दिखाई नहीं दे रही ऐसे में बहस चल रही है कि आखिर दौलतमंद अफसर कब बेनकाब होंगे और जब राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लडने के लिए आगे आ चुकी है तो फिर उसकी बेनामी सम्पत्तियों वाले अफसरों पर खामोशी कई सवाल खडे करने लगी है? दिल्ली में एक होटल मालिक ने अपने ऊपर हो रखे कर्ज को लेकर आत्महत्या कर ली थी लेकिन काफी समय बाद इस आत्महत्या की गूंज उत्तराखण्ड के गलियारों में उस समय गंूज गई जब यह आशंका पनपी की उत्तराखण्ड के एक वरिष्ठ आईपीएस की काली कमाई मृतक होटल मालिक के होटल में लगी हुई थी जिसे वह वापस मांगने के लिए होटल मालिक पर दबाव बना रहा था जिसके चलते यह आत्महत्या हुई? उत्तराखण्ड के गलियारों में अब इस बात को लेकर बहस चल रही है कि आखिरकार वो कौन आईपीएस है जिसकी काली कमाई होटल में लगी हुई थी? सवाल खडा हो रहा है कि क्या इस आईपीएस का चेहरा बेनकाब हो पायेगा जिसकी काली कमाई का पैसा होटल में लगा हुआ था? चर्चा यह भी है कि यह मामला जल्द देश के गृहमंत्री के सामने भी गंूज सकता है और इस आत्महत्या की जांच कराने को जैन समाज कभी भी आगे खडा हुआ दिखाई देने की सम्भावनायें प्रबल हो गई हैं?
उल्लेखनीय है कि रेडिशन ब्लू के मालिक अमित जैन ने लगभग एक माह पूर्व पूर्वी दिल्ली के मंडाली स्थित खेलगांव में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी लेकिन पुलिस को वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। जांच के बाद यह बात सामने आई थी कि कर्जे की वजह से अमित जैन ने यह कदम उठाया था क्योंकि कोविड के दौरान के नुकसान की भरपाई के लिए अमित ने कई सौ करोड रूपये का लोन लिया हुआ था। पांच सितारा होटल रेडिशन ब्लू के मालिक अमित जैन की आत्महत्या को लेकर सोशल मीडिया पर एक ट्वीट एक चैनल के रिपोर्टर का सामने आया जिसमें अमित जैन की फोटो भी लगाई गई और यह लिखा गया कि ये गाजियाबाद में पांच सितारा होटल का संचालन करने वाले अमित जैन थे इसलिए लिखा क्योंकि इन्होंने आत्महत्या कर ली है। वजह जो सामने आ रही है वह है उत्तराखण्ड के एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर की काली कमाई की वापसी का दबाव, जो उसने होटल में निवेश की थी। उम्मीद है कि जल्द पर्दाफाश होगा। यह ट्वीट कल से उत्तराखण्ड के अन्दर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और उसके बाद से ही राज्य के अन्दर यह बहस चल रही है कि आखिरकार वह कौन वरिष्ठ आईपीएस अफसर है जिसकी काली कमाई मृतक होटल मालिक के होटल में लगी हुई थी? कल से ही इस आईपीएस के नाम को लेकर आवाम के बीच शंकाओं का दौर चल रहा है लेकिन कुछ लोगों को आभास है कि इस होटल में किस वरिष्ठ आईपीएस की काली कमाई का पैसा लगा हुआ था? सवाल खडे हो रहे हैं कि राज्य के अन्दर लोकायुक्त का गठन होता तो बेनामी सम्पत्ति का किला खडा करने वाला हर चेहरा बेनकाब हो जाता और जिस तरह से देश के कुछ राज्यो में लोकायुक्त भ्रष्ट अफसरों की काली कमाई का भंडाफोड करती आ रही है उसी तरह से उत्तराखण्ड के अन्दर भी उन भ्रष्ट अफसरों की काली कमाई का राज बेनकाब हो जाता जिन पर वर्षों से अकूत दौलत कमाने का दाग लगता आ रहा है? अब राज्य के अन्दर जिस तरह से एक आईपीएस की काली कमाई को लेकर भूचाल मचा है उससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या सरकार राज्य में भ्रष्टाचार व घोटालेबाजों के चेहरे बेनकाब करने के लिए लोकायुक्त का गठन करने के लिए आगे आयेगी जिससे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार से लडने का जो संकल्प लिया है वह धरातल पर सच साबित हो सके?

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