डॉन का लाइफ स्टाइल जी रहे दो कुख्यात सट्टेबाज

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पुलिस के कुछ बडे अफसर दम भरते हैं कि गैर कानूनी धंधे वालों पर नकेल लगाई जायेगी और उनके द्वारा अपराध से कमाई गई सम्पत्ति को सीज किया जायेगा तथा उन पर गैंगेस्टर और हिस्ट्रीशीट की कार्यवाही भी अमल में लाई जायेगी लेकिन राजधानी के अन्दर तो पुलिस अफसरों के यह दावे सिर्फ हवाबाजी से ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहे हैं। राजधानी के अन्दर तो कुछ खाकीधारियों का सट्टेबाजों से असीम प्रेम के चर्चे लम्बे समय से खाकी पर उंगलियां उठा रहे हैं लेकिन उसके बावजूद भी सट्टेबाजों और खाकी के गठबंधन का सच बाहर लाने के लिए पुलिस का कोई भी अफसर जिन्हें गैर कानूनी धंधे करने वालों से नफरत होनी चाहिए वह क्यों घृतराष्ट्र बनकर सबकुछ देख रहे हैं यह हैरान करने वाली बात है? राजधानी के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि एक ही परिवार के दो कुख्यात सट्टेबाज लम्बे अर्से से डॉन की तरह अपनी लाइफ स्टाइल जी रहे हैं और उनमें से एक कुख्यात तो अपना दिमाग सट्टे के धंधे में तरोताजा रखने के लिए हर हफ्ते दो बार लाल तेल से अपने सिर की जमकर मालिश कराता है और इस मालिश का दृश्य फिल्मों में विलेन की मालिश के दृश्य की तरह ही बताया जाता है और तो और दूसरा सट्टेबाज तो इतना बडा डॉन बन चुका है कि उसने जुराब पहनने और जूते पहनने के लिए एक नौकर रखा हुआ है जो कि उसे कपडे पहनाने से लेकर उसके हाथ पांव दबाने तक का काम करता है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सट्टेबाजी के धंधे में कुछ कुख्यात कितने बडे डॉन बन चुके हैं जो रईस जीवन जीकर पुलिस के कुछ दरोगाओं व कर्मचारियों को भी दौलत देकर उन्हें अपना गुलाम बनाये हुये हैं?
राजधानी के कई इलाकों में क्रिकेट और मटके सट्टे का काला कारोबार इतना ऊफान पर है कि उसका अंदाजा लगाया जाना भी मुश्किल है। लम्बे अर्से से राजधानी के अन्दर ऐसा देखने को मिल रहा है कि क्रिकेट और मटके का सट्टा शायद गैर कानूनी ही नहीं रह गया जिसके चलते पुलिस उन पर शिकंजा कसने के लिए कभी भी आगे आने का दम नहीं दिखाती? राजधानी के शहरी इलाके में दर्जनों सफेदपोश सट्टेबाजी को अपना व्यापार बना चुके हैं और दिखाने के लिए उन्होंने अपने ऊपर व्यापारी होने का चोला पहन रखा है और इस चोले के पीछे वह क्रिकेट और मटके का सट्टा फिल्मी अंदाज में खुलकर करा रहे हैं जिससे साफ दिखाई दे रहा है कि उन्हें पुलिस के दरोगाओं और कर्मचारियों का कितना बडा साथ मिला हुआ है? चंद व्यापारी अपने इस धंधे को जिस अदंाज में अंजाम तक पहुंचा रहे हैं उसकी गूंज हमेशा सुनाई तो सबको देती आ रही है लेकिन इन सट्टेबाजों पर नकेल लगाने के बजाए पुलिस के कुछ दरोगा और कर्मचारी उन्हें अपनी आसामी बनाकर उनसे बडे गोपनीय तरीके से दौलत वसूल करने का खेल खेलने में महारत हासिल कर चुके हैं? शहर के अन्दर एक ही परिवार के लगभग तीन चार सदस्य क्रिकेट, मटके सट्टे के साथ ही जुआ खिलाने के बडे बादशाह बने हुये हैं और इनमें से दो कुख्यात सट्टेबाज डॉन स्टाइल में अपना जीवन जी रहे हैं। चर्चा यहां तक है कि क्रिकेट और मटके सट्टे का बादशाह बना डॉन अपना दिमाग तरोताजा करने के लिए एक विशेष मसालची को रखे हुये है जो हफ्ते में दो बार डॉन के सिर की लाल तेल से मालिश करने के लिए उसके आशियाने पर पहुंचता है जहां डॉन उससे काफी देर तक अपने सिर की मालिश करवाता है और उसके बाद अपना बदन खोलने के लिए भी उससे अपने शरीर की मालिश कराकर अपने साथियों को अपना भौकाल दिखाता है। वहीं दूसरा सट्टेबाज तो इतना बडा डॉन है कि उसने जूते पहनने तक के लिए एक नौकर रखा हुआ है जो उसे जुराब पहनाने और जूते पहनाने के अलावा उसके हाथ-पांव दबाने के लिए भी उसके आंगन में उसके पास रहता है? सवाल यह है कि क्रिकेट, मटके सट्टे के अलावा शहर में कुछ स्थानों पर जुए के अड्डे चलाने के बादशाह बन चुके यह डॉन फिल्मी डॉन की तरह अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं और कुछ दरोगा और पुलिसकर्मियों के पास हर माह उनका महनताना उनके पास पहुंचता है ऐसी भी हमेशा आशंकायें और चर्चाएं उठती रही हैं लेकिन पुलिस के बडे अफसर कब सट्टे की दौलत से डॉन की जिंदगी जीने वालों की नाक में नकेल डालेंगे यह देखने वाली बात होगी?

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