हवाबाजी में उत्तराखण्ड को पर्यटन प्रदेश बनाने का शोर?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में वर्षों से शोर मच रहा है कि उत्तराखण्ड को पर्यटन प्रदेश बनाने के लिए सरकार नये-नये पर्यटन स्थल चिन्हित कर उन्हें विकसित करेगी और उससे राज्य का जहां पर्यटन बढेगा वहीं युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी उत्तराखण्ड के नये पर्यटन स्थल उनका मन मोह लेंगे? हालांकि आज विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल में राज्य सरकार के पर्यटन मंत्री ने कुछ विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि नये पर्यटन स्थल कई स्थानों पर विकसित हो सकते हैं लेकिन सरकार का इस बारे में कोई भी विचार नहीं है और तो और वह यहां तक दावा कर गये कि सुबह आने वाले पर्यटकों को किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं है।
आज विधानसभा सत्र में एक विधायक के सवाल पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने स्वीकारा कि सुरूताल, सुतुडी बुग्याल, कुडका बुग्याल, भौंकनाथ टिब्बा के साथ ही चिन्यालीसौंड झील को पर्यटन के लिहाज से नये स्थल के रूप में विकसित करने की आपार सम्भावनायें हैं लेकिन इस बारे में किसी भी तरह का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि मंत्री ने माना कि पर्यटन स्थल के रूप में रूडकी को विकसित करने की तमाम संभावनायें हैं लेकिन अभी तक इस बारे में सरकार के पास कोई भी योजना नहीं है। वहीं एक विधायक के सवाल पर मंत्री ने यह स्वीकार किया कि अल्मोडा के मानीला क्षेत्र को भी एक नये पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है लेकिन उस क्षेत्र में अधिकांश जमीन वन विभाग की है ऐसे में इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही एक विधायक ने जानना चाहा कि जिम कार्बेट पार्क में पर्यटकों को आकृषित करने के लिए जसपुर रेंज का गेट खोलने पर सरकार का क्या इरादा है। इस पर जवाब देते हुए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि इस रेंज को खोलने की कोई भी योजना नहीं है एक विधायक ने सवाल किया कि सूबे की सीमा पर पर्यटन सूचना केंद्र न होने से आने वालों को तमाम दिक्कतें हो रही हैं क्या सरकार यह केंद्र खोलेगी। इस पर मंत्री ने विधायक को जो जवाब दिया वह काफी चौकाने वाला था उन्होंने सदन को बताया कि सूबे में आने वाले पर्यटकों को किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं है लिहाजा सीमा पर इस तरह के केंद्र खोलने की कोई योजना नहीं है।

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