क्रिकेट सट्टेबाजी की चाश्नी में डूबे ‘सफेदपोशÓ

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी में जब भी कोई नया पुलिस कप्तान तैनात होता था तो वह समूची पुलिस को गैर कानूनी धंधे करने वालों पर नकेल लगाने का फरमान देते थे और उनका सबसे बडा शिकवा क्रिकेट सट्टेबाजों को लेकर रहता था जिसके चलते राजधानी में तैनात रहे कई पूर्व पुलिस कप्तानों ने अपने कार्यकाल में क्रिकेट सट्टेबाजों पर नकेल लगाने का चंद साहस तो दिखाया लेकिन वह साहस सिर्फ एक दिखावे से ज्यादा कभी कुछ नहीं दिखा? सट्टेबाजों पर सिर्फ जुआ एक्ट लगाकर उन्हें भविष्य में क्रिकेट सट्टा करने के लिए छूट देना ही आज काफी युवा पीढी और काफी व्यापारियों के लिए घातक बन चुका है और पुलिस के कुछ अफसर घृतराष्ट्र बनकर क्रिकेट सट्टेबाजों के प्रति जो अपना स्नेह दिखा रहे हैं उसी का परिणाम है कि राजधानी में दर्जनों सफेदपोश क्रिकेट सट्टेबाजी की चाश्नी में डूबकर खूब गोते लगा रहे हैं और यह सट्टे का धंधा उनके लिए शॉटकट से अकूत दौलत कमाने का एक पैमाना बन चुका है? गजब की बात है कि राजधानी में एक दर्जन से अधिक सफेदपोशों ने अपने आपको सेफ जोन में रखकर खुद को जिस तरह से सट्टे का बादशाह बना रखा है उनकी बादशाहत भेदने के लिए पुलिस के हाकिम कब अपना तीसरा नेत्र खोलेंगे यह अभी तक एक रहस्य बना हुआ है? हनुमान चौक में एक बडा व्यापारी जो आज तक भी सफेद कॉलर पहने हुये है वह भी सट्टे का बडा बादशाह है और एक परिवार के कुछ सट्टेबाजों को वह खुलकर पैसे का फाइनेस भी करता है और मौजूदा दौर में क्रिकेट मैच खत्म होने के बाद इस सफेद कॉलर ने अपने सिंडिकेट के सट्टेबाजों को मुम्बई में सैर सपाटे के लिए वहां भेजा है जिससे वह क्रिकेट के सट्टे में जीत से हासिल हुये रूपयों का दावतों में आनंद ले सकें?
पुलिस हाकिम को गैर कानूनी काम करने वालों पर कब गुस्सा आयेगा यह अभी तक एक रहस्य बनता हुआ ही दिखाई दे रहा है? गजब की बात है कि एक पुलिस अफसर को इस बात का पूरा शक है कि पुलिस के कुछ दरोगा और सट्टेबाजों का सिंडिकेट आपस में मिला हुआ है और पुलिस के हर ऑपरेशन की इन सट्टेबाजों के सिंडिकेट की सूचना दे दी जाती है जिसके चलते पुलिस के कुछ अफसरों का सट्टेबाजों पर शिकंजा कसना सम्भव नहीं हो पा रहा है? हैरानी वाली बात है कि राजधानी में एक दर्जन से भी अधिक बडे-बडे सफेदपोश क्रिकेट सट्टेबाजी की चाश्नी में डूबकर खूब दौलत कमा रहे हैं और इन सफेदपोशों पर आज तक पुलिस की निगाह क्यों नहीं गई यह हैरान करने वाली बात है? ऐसा नहीं है कि पुलिस के कुछ अफसरों को इन सट्टेबाजों के सिंडिकेट की जानकारी न हो लेकिन वह सबकुछ जानते हुए भी इन सट्टेबाजों पर नकेल लगाने के लिए किस उद्देश्य से आगे नहीं आना चाहते यह उनकी मंशा पर भी बडा सवालिया निशान लगाता आ रहा है? राजधानी में जब पत्रकार, कुछ व्यापारी और कुछ अन्य बडे सफेदपोश क्रिकेट सट्टे के बादशाह बने हुये हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी में क्रिकेट सट्टेबाजों का कितना बडा मकडजाल बना हुआ है जिसके जाल में काफी व्यापारी और युवा पीढी शॉटकट से अकूत दौलत कमाने का ख्वाब देखकर फसती जा रही है और अब तक काफी युवा और काफी व्यापारी क्रिकेट सट्टे के चस्के में अपना सबकुछ बर्बाद कर चुके हैं? राजधानी में एक व्यापारी ने कुछ दिन पूर्व क्रिकेट सट्टेबाजों के आतंक से खुद को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था लेकिन पुलिस के किसी भी अफसर ने व्यापारी की इस मौत का असली राज जानने की दिशा में कोई पहल की हो ऐसा देखने तक को नहीं मिला जिससे सट्टेबाजों के सिंडिकेट के हौसले बुलंद हो रखे हैं और उनके यह हौसले पुलिस के कुछ दरोगा ही उनसे गठबंधन करके बढाते हुए नजर आ रहे हैं? कुछ दरोगाओं का अगर राजधानी के एक दर्जन से अधिक बडे सट्टेबाजों के साथ पोलियोग्राफ टेस्ट करा दिया जाये तो खुलासा हो जायेगा कि खाकी और कुछ सट्टेबाजों के बीच किस तरह से एक बडा गठबंधन हो रखा है जिसके चलते सट्टेबाजों का सिंडिकेट अपने गैर कानूनी धंधे को बेखौफ अंजाम देने में जुटा हुआ है? चर्चा है कि हनुमान चौक में बैठे एक व्यापारी के बारे में कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह क्रिकेट सट्टे का एक बडा बादशाह है? हालांकि यह सच है कि यह सफेदपोश एक परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मिलकर सट्टे का इतना बडा कारोबार कर रहा है जो आज तक किसी की निगाह में नहीं आ पाया है या सबकुछ जानते हुए भी पुलिस के कुछ दरोगा खामोश हो रखे हैं? सफेदपोश बने सट्टेबाज व्यापारी ने अपने सिंडिकेट को क्रिकेट मैच समाप्त होने के बाद मुम्बई में सैर सपाटे के लिए भेजा है जिससे वह वहां तरोताजा होकर फिर राजधानी में अपने सट्टे के खेल में जुट जायें?

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