नगर संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल के केन्द्रीय मीडिया प्रभारी शिव प्रसाद सेमवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ शिकायतकर्ता विधायक उमेश कुमार एवं त्रिवेन्द्र सिंह रावत के एक मंच पर आने के एक समाचार का संज्ञान लेते हुए दहाड़ लगाई है कि यदि यह समाचार सही है तो वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेंगें और नये सिरे में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की जायेगी और त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच व मुकदमा दर्ज करने की मांग की जायेगी और जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाता तब तक इस आंदोलन को जारी रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत एक भ्रष्ट सीएम रहे है और उनका भ्रष्टाचार अक्षम्य है।
यहां कचहरी रोड स्थित दल के केन्द्रीय कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने एक अखबार में प्रकाशित समाचार के बारे में बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच बंद कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व शिकायतकर्ता एक मंच पर आ गये है और वहीं शिकायतकर्ता के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि शिकायतकर्ता को जांच नहीं चाहते है और सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि यह आपसी मामला बन गया है और त्रिवेन्द्र सिंह रावत के वकील ने कहा है कि अब मुव्वकिल वर्तमान समय में मुख्यमंत्री नहीं है और कोर्ट ने दिसम्बर माह का समय दिया तथा शिकायतकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह कम समय है और तिथि को बढाया जाये तो सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को फिलहाल चार जनवरी 23 तक स्थगित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट नैनीताल ने 27 अक्टूबर 2०2० को उस समय के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई से जांच कराने व मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिये थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता के साथ ही साथ वह स्वयं एवं एक अन्य पत्रकार पार्टी थे और जिन पर राजद्रोह का मुकदमा कर जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई मनमुटाव या कोई मानहानि का केस नहीं है और यह एक संज्ञेय अपराध है और बातचीत या किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं हो सकता है और इसके लिए कानून भी इजाजत नहीं देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हो सकता है कि इस समाचार पत्र के पत्रकार से शायद लिखने में कोई त्रुटि तो नहीं हुई है क्योंकि कोर्ट ने जो कहा हूबहू वैसा ही लिखा जाता है इसमें किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में उस समय त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शिक्षिका रही उत्तरा पंत बहुगुणा को अपमानित किया वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि चार जनवरी के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करेंगें और उन्होंने कहा कि इसके बाद यदि इस मामले पर सीबीआई जांच नहीं होती है तो फिर से एक बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जायेगा और जनहित याचिका दायर की जायेगी और जिसमें राज्य सरकार व त्रिवेन्द्र सिंह रावत को पार्टी बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वर्तमान राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी को वापस लेने के लिए पत्र लिखा लेकिन जब राज्य सरकार पर दवाब पडा तो राज्य सरकार के न्याय विभाग ने अपने हाथ पीछे खींच लिये और एसएलपी को लेने से मना कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भी उनके पास पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भ्रष्टाचार के खिलाफ पर्याप्त सबूत है।
इस अवसर पर यूकेडी महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष उत्तरा पंत बहुगुणा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जो उनका भरे दरबार में अपमान किया और जांच कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सही है तो सीबीआई जांच से क्यों डर रहे है और वह अपनी सीबीआई जांच करा ले। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए और वीआईपी का नाम उजागर होना चाहिए और बेरोजगारों के लिए रोजगार दिया जाये और राज्य सरकार को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।