आयुष का फिल्मी ड्रामा!

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तो क्या सुरक्षा बढ़ाने को लेकर हमले का रचा प्रपंच?
आखिर किसने खोल रखा था एक बजे रात तक कैफे
आयुष का सुरक्षाकर्मी हमले के समय भटूरे तल रहा था!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। त्रिवेन्द्र शासनकाल में दो स्टिंग सामने आये और उसने उत्तराखण्ड की राजनीति में भूचाल मचा दिया था। हैरानी वाली बात है कि स्टिंग करने वाला एकाएक त्रिवेन्द्र रावत के पाले में पहुंच गया और उसने वरिष्ठ पत्रकार व खानपुर से मौजूदा विधायक के खिलाफ राजपुर थाने में गुप्तचुप तरीके से मुकदमा कायम कराया था और इस मुकदमें की भनक उमेश कुमार को भी नहीं लग पाई जिसके चलते उन्हें उनके गाजियाबाद स्थित आवास से भारी पुलिस फोर्स ने गिरफ्तार कर लिया था। उमेश कुमार के खिलाफ मुकदमा कामय कराने का ईनाम आयुष को मिला और उसे कुछ सुरक्षाकर्मी दिये गये थे लम्बे समय से उमेश व आयुष के बीच कभी कोई वाद विवाद नहीं दिखा लेकिन उमेश के खिलाफ मुकदमा कायम करा चुके आयुष गौड ने एक फिल्मी ड्रामा पुलिस के सामने पेश किया कि जब वह रात्रि एक बजे एक कैफे से निकलकर रात्रि लगभग दो बजे जब अपने स्टाफ के लिए परोठे पैक कराकर जा रहा था तभी कार और मोटरसाइकिलों से आये कुछ लोगों ने उस पर बोतलों, डंडों और सरियों से हमला कर दिया और उसे गाडी से खींचने का प्रयास किया लेकिन वह फिल्मी अंदाज मंे सबको चकमा देकर बच निकला। गजब की बात यह है कि आयुष ने यह भी दावा किया कि जब उसे गाडी से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे तो वह बार-बार कह रहे थे कि इसका काम खत्म कर दो। फिल्मी अंदाज में पुलिस में लिखाई गई इस शिकायत को देखकर कोई भी आयुष गौड के इस ड्रामें पर यकीन नहीं कर रहा है और यह बात भी उठ रही है कि जब आयुष की सुरक्षा मंे एक पुलिसकर्मी तैनात है तो जब उस पर इतने हमलावर हमला कर रहे थे तो क्या पुलिसकर्मी आयुष गौड की गाडी मंे भटूरे तल रहा था कि उसे पता ही नहीं चला कि आयुष पर हमला हो रहा है? पुलिस कप्तान को चाहिए कि आयुष के इस फिल्मी ड्रामे का सच सामने लाने के लिए घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे खंगाले और उन पर भी बडी कार्यवाही करे जिसने देर रात को कैफे और रेस्तरा खोल रखा था?
वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार पर त्रिवेन्द्र शासनकाल में राजपुर थाने में एक साजिश के तहत फर्जी मुकदमा लिखवाने वाले आयुष गौड को पूर्व सरकार और मौजूदा सरकार ने किस बात के लिए सुरक्षा मुहैया करा रखी है यह समझ से परे है? अचानक आयुष गौड का नाम सोशल मीडिया में सुर्खियां बन गया कि उस पर देर रात दो दिन पूर्व राजपुर रोड पर हमलावरों ने बडा हमला कर दिया। हैरानी वाली बात है कि हमलावरों ने बोतलों से सरियों से और डंडों से हमला किया लेकिन आयुष गौड को चोट सिर्फ आंख के पास ही लगी। यह चोट कहीं न कहीं ये गवाही दे रही है कि यह हमला एक ड्रामें से ज्यादा कुछ नहीं है? सवाल खडे हो रहे हैं कि अगर आयुष गौड पर देर रात हमला हुआ था तो वह सीधे थाने क्यों नहीं गया अगर वह थाने नहीं जा पाया तो उसने सौ नम्बर पर फोन क्यों नहीं किया? सवाल उठ रहे हैं कि क्या उस समय आयुष गौड ने कुछ ऐसा सेवन तो नहीं कर रखा था जो उसके लिए ही पुलिस के आने पर उसे कटघरे में खडा कर देता? आयुष गौड की कहानी किसी नई वेब सीरिज की कहानी जैसी नजर आ रही है जिसमें शुरूआती दौर में लिखा होता है कि यह कहानी काल्पनिक है और इसका सत्यता से कोई लेना देना नहीं है? आयुष गौड के साथ जब उसका सुरक्षाकर्मी उसके साथ था तो फिर कैसे हमलावर उसे गाडी से खींच रहे थे और खींचते हुए वह यह भी धमकी दे रहे थे कि इसका आज काम तमाम कर देंगे? सबकुछ अगर आमने सामने हो रहा था तो सिर्फ आयुष गौड को बोतल, सरिये, डंडों से हुये हमले में मात्र तिनकाभर ही आंख के पास चोट आई? अह्म सवाल यह है कि जब भी किसी व्यक्ति को कोई सुरक्षाकर्मी मुहैया कराया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह उसे हर हमले से बचाये लेकिन आयुष गौड के साथ तैनात सुरक्षाकर्मी ने उसे हमलावरों से बचाने के लिए क्यों गोली नहीं चलाई यह एक यक्ष प्रश्न अब इस कहानी में उभरकर सामने आ रहा है? आयुष गौड का चेहरा साफ दर्शा रहा है कि यह चोट किसी हमले में नहीं लगी बल्कि इस चोट का रहस्य कुछ और ही है? कहानी इसलिए भी रोचक हो गई है जब राजधानी का सारा व्यापार रात ग्यारह बजे बंद हो जाता है तो फिर आयुष गौड ऐसे कौन से कैफे में रात एक बजे तक वहां था? उसका नाम आयुष गौड ने अपनी शिकायत में क्यों नहीं दर्ज कराया? सवाल यह भी है कि आखिर वह कौन सा रेस्तरा था जहां रात लगभग दो बजे आयुष गौड अपने स्टाफ के लिए परोठे लेने के लिए गया था? आयुष गौड ने तो पुलिस सिस्टम को भी यह कहकर कटघरे में खडा कर दिया है कि वह रात एक बजे एक कैफे से निकला और लगभग दो बजे उसने एक जगह से पराठे लिये क्योंकि अगर कैफे और पराठें बनाने का धंधा रात भर चल रहा है तो यह पुलिस महकमें को कटघरे में खडा करता है कि आखिर राजधानी में कैफे और रेस्तरा बंद करने की कोई समय सीमा भी है कि नहीं?
कप्तान साहब हमले की कराओ एसआईटी से जांच
खानपुर से विधायक उमेश कुमार पिछले कुछ समय से उत्तराखण्ड के अन्दर चर्चा का केन्द्र बने हुये हैं। वहीं दो दिन पूर्व अचानक उमेश कुमार के खिलाफ त्रिवेन्द्र शासनकाल में राजपुर थाने में मुकदमा कायम कराने वाले आयुष गौड की बीते रोज कुछ खून से सनी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रखी थी और यह प्रपंच रचा जा रहा था कि यह हमला सम्भवतः उमेश कुमार के साथियों ने किया है? अब आयुष गौड ने राजपुर थाने में अपने ऊपर हुये कथित हमले की शिकायत दी है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार व खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार का कहना है कि पुलिस कप्तान को चाहिए कि वह आयुष गौड पर हुये कथित हमले का सच सामने लाने के लिए एक एसआईटी का गठन करंे जो इस पूरे हमले की कहानी का सच जाने कि कहां आयुष गौड अपने सुरक्षाकर्मी के साथ रात में मौजूद था और कहां उस पर कथित हमला हुआ वहां आसपास के सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला जाये कि आयुष गौड पर रहस्यमय हमला करने के लिए कितने लोग कार और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आये थे। उमेश कुमार ने कहा कि अगर आयुष गौड पर इतना बडा हमला हुआ है तो उसे जो चोट लगी है वह कुछ और ही कहानी बयां कर रही है इसलिए इस बात का भी सच सामने लाया जाये कि कहीं अपनी सुरक्षा बढाने के लिए आयुष गौड ने अपने ऊपर यह फिल्मी हमले की कहानी की स्क्रिप्ट खुद ही तो नहीं लिखी हुई?

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